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Amethi News: अत्यंत प्रेरणादायक हैं श्रीकृष्ण की बाललीलाएं
Tue, 07 Jan 2025 12:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 07 Jan 2025 12:22 AM IST
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शाहगढ़ के तेजगढ़ गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। -संवाद
शाहगढ़ (अमेठी)। मनुष्य का प्रेम शुद्ध होता है तो ईश्वर स्वयं उसकी सहायता के लिए आते हैं। गोपियों की श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा हमें भगवान के प्रति आध्यात्मिक प्रेम की झलक दिखाती है। भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाएं अत्यंत प्रेरणादायक हैं। ये बातें तेजगढ़ में महामाई मंदिर पर आयोजित भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक धर्मेंद्राचार्य ने कहीं।
प्रवाचक ने प्रभु की बाललीलाओं में छिपे संदेश और अर्थ भक्तों को बताते हुए प्रभु गुणगान के लिए प्रेरित किया। भगवान के स्मरण और गुणगान से ही मनुष्य इस लोक में सभी बाधाओं से मुक्ति पाकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। ब्रज की धूल मात्र के स्पर्श से मनुष्य के सभी पापों का विनाश हो जाता है। लीला और क्रिया में अंतर होता है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसमें न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, परंतु भगवान उसका वध कर देते हैं। इस अवसर पर भजन गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
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प्रवाचक ने प्रभु की बाललीलाओं में छिपे संदेश और अर्थ भक्तों को बताते हुए प्रभु गुणगान के लिए प्रेरित किया। भगवान के स्मरण और गुणगान से ही मनुष्य इस लोक में सभी बाधाओं से मुक्ति पाकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। ब्रज की धूल मात्र के स्पर्श से मनुष्य के सभी पापों का विनाश हो जाता है। लीला और क्रिया में अंतर होता है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसमें न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे।
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उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, परंतु भगवान उसका वध कर देते हैं। इस अवसर पर भजन गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
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