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Amethi News: शशि ने अनुशासन से बदला स्कूल का माहौल
Wed, 26 Nov 2025 12:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 26 Nov 2025 12:54 AM IST
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अमेठी सिटी। कंपोजिट विद्यालय भेलाईकला तिलोई की सहायक अध्यापिका शशि कुमारी सिंह क्षेत्र में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण माहौल में विद्यालय को नई दिशा देने का जिम्मा संभालते हुए अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय दिया। शुरुआती दौर में अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वच्छ वातावरण जैसी मूल जरूरतें भी पूरी नहीं थीं, मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनकी निरंतर कोशिशों से आज विद्यालय का माहौल बदला है और बच्चों में पढ़ाई को लेकर उत्साह बढ़ा है।
शशि कुमारी के अनुसार बच्चों में आत्मविश्वास जगाना सबसे बड़ी चुनौती रही। इसे ध्यान में रखते हुए प्रातःकालीन प्रार्थना सभा को सक्रिय बनाया गया। रोज एक विद्यार्थी मंत्र, प्रार्थना और राष्ट्रगान कराता है। इस अनुशासन ने बच्चों में मंच पर बोलने का साहस और सीखने का दृष्टिकोण विकसित किया। शिक्षक प्रेरक विचार साझा करते हैं, जिससे विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच मिलती है।
विद्यालय में पढ़ाई के लिए समयबद्ध व्यवस्था लागू की गई। शिक्षक समय पर कक्षाओं में पहुंचते हैं। मध्याह्न भोजन से पहले भोजन मंत्र की परंपरा शुरू हुई, जिससे बच्चों के व्यवहार में अनुशासन और संस्कार दोनों में सुधार आया। अब विद्यालय स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक माहौल में बच्चों को पढ़ने व खेलने की सुविधा देता है।
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विद्यालय के पुस्तकालय को सुव्यवस्थित कर बच्चों तक इसकी पहुंच आसान की गई। विद्यार्थी प्रतिदिन पुस्तकें पढ़ते हैं। साप्ताहिक क्विज से बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है। हाल में आयोजित विज्ञान क्विज में कक्षा छह के छात्र अंकुर ने ब्लॉक स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। करीब 200 बच्चों वाले इस विद्यालय में शशि कुमारी का धैर्य और समर्पण बदलाव की मिसाल बना। कठिन हालात में भी लक्ष्य पर टिके रहने की उनकी आदत कई महिलाओं के लिए प्रेरणा है। शशि कुमारी ने साबित किया है कि निरंतर प्रयास बदलाव लाते हैं, चाहे शुरुआत कितनी भी कठिन क्यों न हो।
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शशि कुमारी के अनुसार बच्चों में आत्मविश्वास जगाना सबसे बड़ी चुनौती रही। इसे ध्यान में रखते हुए प्रातःकालीन प्रार्थना सभा को सक्रिय बनाया गया। रोज एक विद्यार्थी मंत्र, प्रार्थना और राष्ट्रगान कराता है। इस अनुशासन ने बच्चों में मंच पर बोलने का साहस और सीखने का दृष्टिकोण विकसित किया। शिक्षक प्रेरक विचार साझा करते हैं, जिससे विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच मिलती है।
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विद्यालय में पढ़ाई के लिए समयबद्ध व्यवस्था लागू की गई। शिक्षक समय पर कक्षाओं में पहुंचते हैं। मध्याह्न भोजन से पहले भोजन मंत्र की परंपरा शुरू हुई, जिससे बच्चों के व्यवहार में अनुशासन और संस्कार दोनों में सुधार आया। अब विद्यालय स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक माहौल में बच्चों को पढ़ने व खेलने की सुविधा देता है।
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विद्यालय के पुस्तकालय को सुव्यवस्थित कर बच्चों तक इसकी पहुंच आसान की गई। विद्यार्थी प्रतिदिन पुस्तकें पढ़ते हैं। साप्ताहिक क्विज से बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है। हाल में आयोजित विज्ञान क्विज में कक्षा छह के छात्र अंकुर ने ब्लॉक स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। करीब 200 बच्चों वाले इस विद्यालय में शशि कुमारी का धैर्य और समर्पण बदलाव की मिसाल बना। कठिन हालात में भी लक्ष्य पर टिके रहने की उनकी आदत कई महिलाओं के लिए प्रेरणा है। शशि कुमारी ने साबित किया है कि निरंतर प्रयास बदलाव लाते हैं, चाहे शुरुआत कितनी भी कठिन क्यों न हो।