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Amethi News: 14 हजार प्रसूताओं का भुगतान अटका
Mon, 27 Apr 2026 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 27 Apr 2026 12:19 AM IST
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अमेठी सिटी। जिले में स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है। जननी सुरक्षा योजना के तहत करीब 14 हजार प्रसूताओं का भुगतान 10 माह से लंबित है। इसी अवधि में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों की निशुल्क अल्ट्रासाउंड जांच भी बाधित है। तकनीकी समस्या के कारण दोनों योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे लाभार्थियों की परेशानी बढ़ गई है।
जिले में 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दो शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इस योजना में पंजीकृत गर्भवतियों को अधिकृत केंद्रों पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड सुविधा मिलती है। इसके लिए 15 निजी सेंटर संबद्ध हैं। प्रत्येक जांच पर 425 रुपये का ई रुपये वाउचर जारी होता है मगर जुलाई से पोर्टल में अद्यतन कार्य के कारण वाउचर बन नहीं पा रहे हैं।
भुगतान न मिलने से सेंटर संचालकों ने निशुल्क जांच बंद कर दी है। इससे करीब 60 हजार गर्भवतियों को दिक्कत हो रही है। जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव पर नगरीय क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये मिलते हैं। आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक संस्थागत प्रसव पर 600 रुपये प्रोत्साहन दिया जाता है। जुलाई के बाद से भुगतान न मिलने से प्रसूताओं को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्पर्श पोर्टल में तकनीकी समस्या बनी हुई है। इसी वजह से वाउचर और भुगतान प्रक्रिया प्रभावित है। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि समस्या उच्च स्तर पर है। संबंधित केंद्रों को वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जांच जारी रह सके, मगर जमीनी स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।
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जिले में 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दो शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इस योजना में पंजीकृत गर्भवतियों को अधिकृत केंद्रों पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड सुविधा मिलती है। इसके लिए 15 निजी सेंटर संबद्ध हैं। प्रत्येक जांच पर 425 रुपये का ई रुपये वाउचर जारी होता है मगर जुलाई से पोर्टल में अद्यतन कार्य के कारण वाउचर बन नहीं पा रहे हैं।
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भुगतान न मिलने से सेंटर संचालकों ने निशुल्क जांच बंद कर दी है। इससे करीब 60 हजार गर्भवतियों को दिक्कत हो रही है। जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव पर नगरीय क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये मिलते हैं। आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक संस्थागत प्रसव पर 600 रुपये प्रोत्साहन दिया जाता है। जुलाई के बाद से भुगतान न मिलने से प्रसूताओं को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्पर्श पोर्टल में तकनीकी समस्या बनी हुई है। इसी वजह से वाउचर और भुगतान प्रक्रिया प्रभावित है। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि समस्या उच्च स्तर पर है। संबंधित केंद्रों को वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जांच जारी रह सके, मगर जमीनी स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।