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Amethi News: आस्था, अध्यात्म व संस्कृति का अनूठा केंद्र है परमहंस आश्रम

Sat, 04 Apr 2026 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Sat, 04 Apr 2026 12:06 AM IST
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Paramahamsa Ashram is a unique center of faith, spirituality and culture.
 टीकरमाफी आश्रम स्थित भगवान शिव की प्रतिमा संग अन्य मंदिर। -संवाद
अमेठी सिटी। टीकरमाफी में आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का केंद्र श्रीमत स्वामी परमहंस आश्रम प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां आज भी गुरुकुल परंपरा चली आ रही है। यहां पर 600 से अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं, जिनमें 300 से अधिक छात्रों को आवास संग निशुल्क भोजन और पढ़ाई की सुविधा मिल रही है। यहां एक ही परिसर में उत्कल, द्रविड़ व बंग शैली में निर्मित मंदिर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। परिसर में करीब आठ करोड़ रुपये से दो द्वार, एक यज्ञशाला सहित 13 देवालयों की स्थापना की गई है।
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अमेठी तहसील मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर टीकरमाफी स्थित श्रीमत स्वामी परमहंस आश्रम 88 एकड़ में फैला है। आश्रम में स्वामी परमहंस का विशाल मंदिर बना हुआ है। स्वामी परमहंस महाराज की प्रेरणा और आश्रम प्रबंधक स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के मार्गदर्शन में मुंबई के मशहूर उद्योगपति व क्षेत्र के गांव पूरे जीवधर मजरे भेंटुआ निवासी अवधेश नारायण पांडेय की देखरेख में आश्रम के एक ही परिसर में उत्कल शैली में दुर्गा माता का मंदिर, द्रविड़ शैली में भगवान शिव नर्वदेश्वर का मंदिर, शनिदेव मंदिर, शनि शिला, नवग्रह मंदिर, पंचदेव मंदिर, बाबा काल भैरव मंदिर, 47 फीट की भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा, ध्यान गुफा, नंदी महाराज की प्रतिमा, यज्ञशाला की स्थापना हुई है।
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परिसर से पहले गोपुरम शैली से बना लक्ष्मीकांतम द्वार आश्रम की शोभा को चार चांद लगाता है। आश्रम परिसर से पहले पंडित राजा राम शुक्ल की स्मृति में राम दरबार द्वार बनाया गया है। आश्रम स्थित स्वामी परमहंस महाराज मंदिर से सटे परिसर में द्रविड़ शैली में 72 फीट ऊंचा हनुमान गढ़ी मंदिर बना है। बंग शैली में गणेश मंदिर के अंदर आयरन और पत्थर की आठ टन की मूर्ति लगी है। समाजसेवी संजय सिंह बताते हैं कि इस परिक्षेत्र में हिंसक जीव रहते हैं। स्वामीजी की कृपा से आज तक किसी को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा।
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अलौकिक थे स्वामी परमहंस
अवधेश नारायण पांडेय टीकरमाफी स्थित श्रीमत स्वामी परमहंस आश्रम के संस्थापक स्वामी परमहंस महाराज वर्ष 1918 में टीकरमाफी में कई हेक्टेयर में फैले घने जंगल में आए। वे नदी के रास्ते टीकरमाफी जंगल में पहुंचे। स्वामीजी यहां कुटी बनाकर रहने लगे। स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ जंगल कब्जाने की शिकायत की। उस समय एक बड़े अधिकारी यहां आए और परमहंस महाराज से जगह खाली करने के लिए कहा। स्वामीजी ने कुछ नहीं कहा। अधिकारी जाने लगे तो उनकी गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। घर पहुंचे तो परिवार में अनहोनी हो गई। बताते हैं कि जब अधिकारी अपने बेटे को लेकर आश्रम पहुंचे तो वह ठीक हो गया। उसी समय अधिकारी ने स्वामी परमहंस आश्रम के नाम जमीन दर्ज कर सुरक्षित करवा दी। बाद में लगान भी माफ कर दिया। यहां पर सच्चे दिल से आने वाले भक्तों की मुराद पूरी होती है। संतानहीन को संतान की प्राप्ति होती है।
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