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Amethi News: बड़ी मेहनत बा धान की रोपाई मा...
Sat, 26 Jul 2025 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:01 AM IST
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अमेठी रेभिया नदी तट पर काव्य गोष्ठी में कविता पाठ करते कवि।-संवाद
अमेठी। अवधी साहित्य संस्थान की ओर से रेभिया नदी तट कुंडवा स्थित श्री मल्लिकार्जुन संकटमोचन धाम में शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा समारोह के समापन अवसर पर बृहस्पतिवार देर शाम संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ।
गोष्ठी का संयोजन डॉ. अभिमन्यु कुमार पांडेय व अध्यक्षता ज्ञानेंद्र पांडेय अवधी मधुरस ने की। ज्ञानेंद्र पांडेय ने पढ़ा कि बरगद पनघट पर खड़ा बांट रहा है छांव, कछु आए औ कछु गए बैठी पछारे पांव। प्रेम कुमार त्रिपाठी ने सुनाया कि प्रेम की उमंग में तरंग जब आए तो, स्वयं को डुबोने भगवान चले आते हैं। रामबदन शुक्ल पथिक ने हर विभाग का चोर है अफसर, चलती खूब दलाली है, मेरे देश का कर्णधार ही हमको देता गाली है... रचना से खूब तालियां बटोरीं। हरिनाथ शुक्ल ने सुनाया, बड़ी मेहनत बा धान की रोपाई मा, दउड़ा दर दवाई मा।
शबीर अहमद सूरी ने कहा कि प्यार ही प्यार है दुनिया में बताना होगा, फूल बागों में नहीं घर में खिलाना होगा। नरेंद्र प्रसाद शुक्ल ने पढ़ा, कुछ तो कदम बढ़ाना होगा आज नहीं तो कल, चूके तो पछताना होगा आज नहीं तो कल। रामेश्वर सिंह निराश ने पढ़ा, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब आपस में भाई-भाई, हरे रामा जहां धर्म सब प्यारा, हिंदुस्तान हमारा ना।
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सुरेश चंद्र शुक्ल ने पढ़ा फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन बगिया और बहारों में, तुमको उठा साथी मेरे गलियारे चौबारे में। इस मौके पर डॉ. केशरी शुक्ल, अभिजित त्रिपाठी, विवेक मिश्र, राम कुमारी साहू, जगदंबा तिवारी, अमर बहादुर सिंह, चंद्र प्रकाश पांडेय मंजुल सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में कैलाश शर्मा, टीपी सिंह, विनोद चंद्र मिश्र, त्रिभुवन पांडेय, मोहन लाल पांडेय, समीर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी का संयोजन डॉ. अभिमन्यु कुमार पांडेय व अध्यक्षता ज्ञानेंद्र पांडेय अवधी मधुरस ने की। ज्ञानेंद्र पांडेय ने पढ़ा कि बरगद पनघट पर खड़ा बांट रहा है छांव, कछु आए औ कछु गए बैठी पछारे पांव। प्रेम कुमार त्रिपाठी ने सुनाया कि प्रेम की उमंग में तरंग जब आए तो, स्वयं को डुबोने भगवान चले आते हैं। रामबदन शुक्ल पथिक ने हर विभाग का चोर है अफसर, चलती खूब दलाली है, मेरे देश का कर्णधार ही हमको देता गाली है... रचना से खूब तालियां बटोरीं। हरिनाथ शुक्ल ने सुनाया, बड़ी मेहनत बा धान की रोपाई मा, दउड़ा दर दवाई मा।
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शबीर अहमद सूरी ने कहा कि प्यार ही प्यार है दुनिया में बताना होगा, फूल बागों में नहीं घर में खिलाना होगा। नरेंद्र प्रसाद शुक्ल ने पढ़ा, कुछ तो कदम बढ़ाना होगा आज नहीं तो कल, चूके तो पछताना होगा आज नहीं तो कल। रामेश्वर सिंह निराश ने पढ़ा, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब आपस में भाई-भाई, हरे रामा जहां धर्म सब प्यारा, हिंदुस्तान हमारा ना।
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सुरेश चंद्र शुक्ल ने पढ़ा फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन बगिया और बहारों में, तुमको उठा साथी मेरे गलियारे चौबारे में। इस मौके पर डॉ. केशरी शुक्ल, अभिजित त्रिपाठी, विवेक मिश्र, राम कुमारी साहू, जगदंबा तिवारी, अमर बहादुर सिंह, चंद्र प्रकाश पांडेय मंजुल सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में कैलाश शर्मा, टीपी सिंह, विनोद चंद्र मिश्र, त्रिभुवन पांडेय, मोहन लाल पांडेय, समीर मिश्र आदि मौजूद रहे।