फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amethi News ›   Mayankeshwar sharam singh became minister

मयंकेश्वर ने मंत्री बन तिलोई को बनाया वीआईपी

Fri, 25 Mar 2022 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Mar 2022 10:48 PM IST
विज्ञापन
Mayankeshwar sharam singh became minister
गौरीगंज (अमेठी)। तिलोई से पांचवीं बार विधायक बने मयंकेश्वर शरण सिंह के योगी 2.0 सरकार में राज्यमंत्री बनाए जाने से न सिर्फ तिलोई में बल्कि पूरे जिले में जश्न का माहौल है। इसके पहले मयंकेश्वर 2002 से 2007 की सपा सरकार में करीब छह माह तक दर्जा प्राप्त मंत्री रहे हैं। मयंकेश्वर का पूरा राजनीतिक जीवन तिलोई से जुड़ा रहा।
विज्ञापन

कभी बड़ी रियासत रही तिलोई के राजा मोहन सिंह (अब स्वर्गीय) के पुत्र मयंकेश्वर शरण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1993 में हुए विधानसभा चुनाव से की थी। भाजपा के टिकट पर इस चुनाव में मैदान में उतरने वाले मयंकेश्वर ने अपने प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी डॉ. मुस्लिम को नौ हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया।
विज्ञापन

हालांकि 1996 में हुए मध्यावधि चुनाव में वे सपा प्रत्याशी डॉ. मुस्लिम से हार गए थे। 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मयंकेश्वर शरण पर दांव लगाया और वे दोबारा विधायक बने। हालांकि बाद में उन्होंने असंतुष्ट होकर 2005 में सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस दौरान छह माह तक वे ऊर्जा सलाहकार (दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री) रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

मयंकेश्वर ने 2007 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी से लड़ा और चुनाव जीतकर तीसरी बार विधायक बने। हालांकि 2012 में वे एक बार फिर सपा से चुनाव लड़े और हार गए। 2017 के चुनाव से पहले एक बार फिर मयंकेश्वर शरण सिंह ने अपनी पुरानी पार्टी भाजपा का रुख किया। भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीते।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर मयंकेश्वर शरण सिंह ने जीत दर्ज की और इस विधानसभा क्षेत्र में तीन दशक से कायम वह मिथक तोड़ दिया कि एक दल से कोई लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीत सकता।
मयंकेश्वर की पारिवारिक पृष्ठभूमि
17 जून 1969 को जन्मे मयंकेश्वर शरण सिंह तिलोई रियासत के इकलौते वारिस हैं। वे लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। मयंकेश्वर का परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय है। उनके पिता मोहन सिंह वर्ष 1969 में भारतीय जनसंघ तो 1974 व 1977 में कांग्रेस पार्टी से तिलोई के विधायक रहे। भाजपा ने मोहन सिंह को वर्ष 1996 में अमेठी से लोकसभा का चुनाव लड़ाया था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। मयंकेश्वर के परिवार में पत्नी उपासना सिंह के अलावा दो पुत्र मृगांकेश्वर शरण सिंह व उत्कर्ष शरण सिंह हैं।
सपा से दो चुनाव लड़े मयंकेश्वर
अपने जीवन का ज्यादातर समय भाजपा के साथ बिताने वाले मयंकेश्वर शरण सिंह सपा में भी रहे हैं। 1993 व 2002 में दो चुनाव भाजपा से जीतने के बाद मयंकेश्वर ने 2007 के चुनाव में सपा का दामन थाम लिया। 2007 के इस चुनाव में उन्हें विजयश्री हासिल हुई। हालांकि 2012 में वे सपा के टिकट पर दोबारा मैदान में में उतरे लेकिन कांग्रेस के डॉ. मुस्लिम से हार गए।

इस चुनाव में दिए कई विवादित बयान
गत विधानसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ने वाले मयंकेश्वर के सामने कांग्रेस ने प्रदीप सिंघल व सपा ने मो. नईम को उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में स्वयं को घिरा देख मयंकेश्वर ने एक समुदाय को लेकर कई विवादित बयान दिए। इन बयानों को लेकर वे पूरे चुनाव चर्चा में भी रहे।
विधानसभा चुनाव में कब किसे हराया
वर्ष - नाम - पार्टी - अंतर
1993 - डॉ. मुस्लिम - सपा - 9116
2002 - डॉ. मुस्लिम - कांग्रेस - 986
2007 - डॉ. मुस्लिम - कांग्रेस - 457
2017 - मो. सऊद - बसपा - 44,047
2022 - मो. नईम - सपा - 27,835
कब-कब हारे मयंकेश्वर
वर्ष - किससे हारे - हराने वाली पार्टी - अंतर
1996 - मो. मुस्लिम - सपा - 14,588
2012 - मो. मुस्लिम - कांग्रेस - 2710
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed