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अस्पताल में डेंगू व मलेरिया की कई दवाओं का टोटा
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गौरीगंज (अमेठी)। जिले में डेंगू व मलेरिया के गंभीर रोगियों का उपचार संभव नहीं है। ब्लड बैंक न होने से जहां प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं है, वहीं कई दवाओं का अस्पताल में टोटा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 50 लोगों की जांच हो रही है। यहां की जांच में अब तक कोई संक्रमित नहीं मिला है। बावजूद इसके आवश्यक दवाओं की डिमांड के साथ संक्रमित लोगों के उपचार की व्यवस्था बनाई गई है।
वर्तमान समय में तेजी से फैल रहे वायरल फीवर के साथ डेंगू व मलेरिया भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बना है। डेंगू व मलेरिया के मरीजों को चिह्नित करने के लिए 606 टीमें डोर-टू-डोर सर्वे कार्य करने के साथ ही लोगों को बचाव के प्रति जागरूक करते हुए दवाओं का छिड़काव करा रही हैं।
जिला अस्पताल समेत सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ दी है। डेंगू-मलेरिया से संक्रमित लोगों की पहचान कर उनका उपचार करने के लिए जिला अस्पताल में बेड व वार्ड आरक्षित करते हुए जांच किट की व्यवस्था की गई है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन मलेरिया की 40 व डेंगू की 10 जांचें हो रही हैं। हालांकि जिला अस्पताल की जांच में अब तक कोई भी डेंगू या मलेरिया से संक्रमित नहीं मिला है।
संक्रमित लोगों के उपचार के लिए आवश्यक आर्टसुनेट, अर्टेमेथर, क्लोरीक्वीन, डॉक्सीसाइक्लिन, पेरासिटामोल, एजी 500, रेनटेक, साफिक्सिम व सफोटॉक्सिम दवा के साथ डीएनएस घोल की आवश्यकता होगी। बीते दिन शाम तक आवश्यक दवाओं में से सफोटॉक्सिम, आर्टसुनेट व अर्टेमेथर मौजूद नहीं रहीं।
जिले में ब्लड बैंक न होने से संक्रमित लोगों की प्लेटलेट्स घटने व अन्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होने पर उपचार के लिए आवश्यक संसाधन व उपकरण न होने से मरीजों का जिले में उपचार करना संभव नहीं होगा तो स्वास्थ्य विभाग के सामने बिना संसाधन व उपकरण इलाज करने की चुनौती भी होगी।
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू व मलेरिया के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। दवाओं की मांग बढ़ जाने से कुछ परेशानी सामने आ रही है। बावजूद इसके अस्पताल में ड्रग वेयर हाउस से दवाओं की आपूर्ति मांग के अनुसार सुनिश्चित कर मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
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वर्तमान समय में तेजी से फैल रहे वायरल फीवर के साथ डेंगू व मलेरिया भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बना है। डेंगू व मलेरिया के मरीजों को चिह्नित करने के लिए 606 टीमें डोर-टू-डोर सर्वे कार्य करने के साथ ही लोगों को बचाव के प्रति जागरूक करते हुए दवाओं का छिड़काव करा रही हैं।
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जिला अस्पताल समेत सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ दी है। डेंगू-मलेरिया से संक्रमित लोगों की पहचान कर उनका उपचार करने के लिए जिला अस्पताल में बेड व वार्ड आरक्षित करते हुए जांच किट की व्यवस्था की गई है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन मलेरिया की 40 व डेंगू की 10 जांचें हो रही हैं। हालांकि जिला अस्पताल की जांच में अब तक कोई भी डेंगू या मलेरिया से संक्रमित नहीं मिला है।
संक्रमित लोगों के उपचार के लिए आवश्यक आर्टसुनेट, अर्टेमेथर, क्लोरीक्वीन, डॉक्सीसाइक्लिन, पेरासिटामोल, एजी 500, रेनटेक, साफिक्सिम व सफोटॉक्सिम दवा के साथ डीएनएस घोल की आवश्यकता होगी। बीते दिन शाम तक आवश्यक दवाओं में से सफोटॉक्सिम, आर्टसुनेट व अर्टेमेथर मौजूद नहीं रहीं।
जिले में ब्लड बैंक न होने से संक्रमित लोगों की प्लेटलेट्स घटने व अन्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होने पर उपचार के लिए आवश्यक संसाधन व उपकरण न होने से मरीजों का जिले में उपचार करना संभव नहीं होगा तो स्वास्थ्य विभाग के सामने बिना संसाधन व उपकरण इलाज करने की चुनौती भी होगी।
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू व मलेरिया के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। दवाओं की मांग बढ़ जाने से कुछ परेशानी सामने आ रही है। बावजूद इसके अस्पताल में ड्रग वेयर हाउस से दवाओं की आपूर्ति मांग के अनुसार सुनिश्चित कर मरीजों का उपचार किया जा रहा है।