फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amethi News ›   Interview with Rajan ji maharaj

जिसमें राम नहीं वो मानव कहलाने का अधिकारी नहीं

Fri, 19 Nov 2021 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 11:03 PM IST
विज्ञापन
Interview with Rajan ji maharaj
15 : गौरीगंज : मानस मर्मज्ञ राजन जी महाराज। -संवाद - फोटो : AMETHI
गौरीगंज (अमेठी)। बिहार के सीवान जिले (मौजूदा निवास पश्चिम बंगाल का हावड़ा जिला) के मूल निवासी राजन जी महाराज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मानस मर्मज्ञ होने के साथ वे अति सरल व विनम्र हैं। पावन श्रीराम कथा के ख्यातिलब्ध प्रवचकों में एक हैं। खड़ी बोली के साथ भोजपुरी व अवधी में उनके कंठ से निकलने वाले भजन की खनक लोगों को अपनी ओर खींचती है।
विज्ञापन

उनके श्रीमुख से निकलने वाले एक-एक शब्द श्रोताओं को अध्यात्म रूपी गंगा का पवित्र स्नान कराते हैं। कथा की भाषा इतनी सरल कि अनपढ़ श्रोता भी एक-एक शब्द को समझ और ग्रहण कर सके। राजन जी महाराज इन दिनों राजनीति के क्षितिज पर जगमगाने वाली अमेठी में हैं।
विज्ञापन

पहली बार अमेठी पधारे राजन जी महाराज गदगद हैं कि उन्हें यहां के कथा प्रेमियों से रूबरू होने का मौका मिला। इस मौके पर ‘अमर उजाला’ ने उनसे आज के परिप्रेक्ष्य में श्रीराम, हिंदुत्व व राजनीति से जुड़े मुद्दों पर बात की। उनसे कुछ सवालों के जवाब मांगे। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
विज्ञापन
विज्ञापन

सवाल - लोक के लिए राम और राम कथा का क्या महत्व है?
जवाब - राम सिर्फ हिंदू के लिए नहीं हैं। राम मनुष्य मात्र के लिए हैं। राम में समग्र विश्व समाहित हो सकता है। गोस्वामी तुलसीदास ने मानस का प्रारंभ वर्ण और पूर्ण मानव शब्द पर किया है। इन दो शब्दों के माध्यम से तुलसीदास ने बताने की कोशिश की है कि जिसके भीतर राम चरित्र नहीं वह मानव कहलाने का अधिकारी नहीं। लोक से राम कितने गहरे जुड़े हैं इसके लिए मानस का अध्ययन जरूरी है।
सवाल - नए दौर को हिंदू चेतना के जागरण का दौर कहा जा रहा है। इससे कितना सहमत हैं?
जवाब - अपनी-अपनी दृष्टि है। मेरी दृष्टि में युवा पीढ़ी जागृत चेतना का प्रतीक बनकर उभरी है। कथाओं के प्रति, धर्म के प्रति, आस्था के प्रति उसके मन में बड़ा स्थान है। यह अच्छे भविष्य का सूचक है। हिंदू ही नहीं सनातन धर्म के लिए भी।
सवाल - राम किस प्रकार के हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं?
जवाब - हंसते हुए.. हिंदुत्व के कई प्रकार होते हैं क्या? अखिल ब्रह्मांड में सिर्फ एक धर्म है और वह है सनातन। जिसका न आदि है न अंत। बाकी सब पंथ हैं। हम हिंदुस्तान में हैं इसलिए हमने अपने धर्म को हिंदू मान लिया। सनातन ही एक ऐसा धर्म है जो पूरे विश्व के मंगल की कामना करता है। राम की बात करें तो वे मानव मात्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सवाल - अधिकांश कथावाचक भगवा वस्त्र पहनते हैं। कहा भी जाता है कि वेश बहुत जरूरी होता है। आप ऐसा नहीं करते क्यों?
जवाब - भगवा धारण करने का मैं अधिकारी नहीं। भगवा रंग विरक्ति का प्रतीक है। भगवा धारण करने का अधिकार केवल और केवल सन्यासी-महात्मा को है। मैं गृहस्थ हूं। मेरा भी परिवार है। पत्नी हैं बच्चे हैं। इसीलिए मैं भगवा धारण नहीं करता।
सवाल - हिंदू धर्म में समाज जातियों में बंट रहा है। संप्रदायों में टूट रहा है। इसको कैसे देखते हैं?
जवाब - जाति की व्यवस्था प्रारंभ से है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। इसमें किसी को बड़ा-छोटा नहीं कह सकते। अपने कर्म के हिसाब से सबको अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई। सब अपना कार्य कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान में इस व्यवस्था का लाभ धर्म परिवर्तन कराने वाले उठा रहे हैं। इसके लिए हम भी दोषी हैं। हमें किसी को उपेक्षित करने का अधिकार नहीं। राम ने भिलनी के घर भोजन किया। इससे लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए।
सवाल - वर्तमान परिस्थिति के आधार पर हिंदुत्व का क्या भविष्य देखते हैं?
जवाब - यह बड़ा कठिन प्रश्न है। एक श्लोक है धर्मों रक्षति रक्षित:। हिंदुत्व का भविष्य उज्ज्वल बना रहे इसके लिए धर्मावलंबियों को अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान होना होगा। लोग कथावाचकों को प्रेरणाश्रोत मानते हैं। ऐसे में यह हमारी भी जिम्मेदारी है। हम सबको अपने उत्तरदायित्व का सम्यक निर्वहन करना होगा। कथाकार, पत्रकार, चित्रकार, नीतिकार, अदाकार और गीतकार इसमें मील का पत्थर हैं। इन्हें समाज की नींव को मजबूत करना चाहिए।
सवाल - वैश्विक परिदृष्य में श्रीराम को कैसे देखते हैं। दुनिया के लिए राम क्या है?
जवाब - श्रीराम आदर्श पुरुष हैं। हम हैं तब हैं यह बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात यह है कि हम नहीं हैं तब भी हैं। जीवन में राम चरित्र हैं। आप नहीं होकर भी हैं यही श्रीराम हैं। राम दुनिया के लिए विशेष हैं। आज इंडोनेशिया से लेकर चीन तक कई देशों में बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली रामकथा को इसकी बानगी माना जा सकता है।
सवाल - आप कथा के साथ अपने मधुर भजनों के लिए लोकप्रिय हैं। क्या कहना चाहेंगे?
जवाब - इसको मैं अपने रघुनाथ जी की करुणा मानता हूं। गाने का शौक बचपन से था। हमेशा गाता रहता था। इस तरह नहीं गाता था। मानस में भी लिखा है जे गावहिं यह चरित संभारे, ते एहि ताल चतुर रखवारे। गोस्वामी ने लिखा है कि मानस गाने का विषय है। प्रसंग को पुष्ट करने के लिए भी भजनों की आवश्यकता पड़ती है। हम जो भजन गाते हैं वे ऐसे होते हैं जिससे समाज को संदेश मिल सके। कथा के दौरान मेरे भजन प्रसंग से जुड़े होते हैं। भजन का असर जीवन के साथ मन पर भी पड़ता है। श्रोता के अंतर्मन में उतरने का यह सशक्त साधन है।
सवाल- बदलते दौर में ऐसे आयोजन काफी महंगे हो गए हैं। साधारण धर्मावलंबी ऐसे आयोजन कैसे करा सकता है?
जवाब - आज का युग अर्थ प्रधान है। बदलते परिवेश में कथा का स्वरूप बदला है। कथा का खर्च स्वरूप के कारण है। मनुष्य का स्वभाव है कि वह बिना स्वरूप के आकर्षित नहीं होता। जो सामान जितना महंगा हो उसे उतना ही अच्छा मानता है। कथा को दिव्य और भव्य बनाने के फेर में खर्च बढ़ गया है। मुझे ही लीजिए। मेरे साथ 14 लोग हैं। जाहिर है कि खर्च ज्यादा होगा। ऐसे में साधारण आयोजन में जाने पर सबका खर्च उठाना मुश्किल होगा। साधारण धर्मावलंबियों को ऐसे आयोजन मिलकर कराने चाहिए। नहीं करा सकेें तो जहां ऐसे आयोजन हो रहे हों उसका हिस्सा बनकर अपनी आस्था को मजबूती प्रदान करें।
सवाल - राम को लेकर राजनीति भी खूब हो रही, इसे कैसे देखते हैं?
जवाब - राम राजनीति के लिए नहीं होनेे चाहिए। राम आस्था के लिए होने चाहिए। राम जीवन के लिए होने चाहिए। राम जीवन मेें आदर्श के लिए होने चाहिए। राम नैतिक मूल्य के लिए होने चाहिए। राम हमारे जीवन के उत्थान के लिए होने चाहिए। राम समाज के विकास के लिए होने चाहिए। राम विश्व के कल्याण के लिए होने चाहिए, न कि राजनीति के लिए।
सवाल - आप जहां कथा कह रहे हैं यह लंबे समय तक गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ रहा है। राहुल व मोदी के हिंदुत्व में क्या अंतर मानते हैं। किसे बेहतर मानते हैं?
जवाब - जहां बताना पड़ता है हम हैं। वहां होता नहीं है। पुष्प में सुगंध होगी तो पास से गुजरने पर पता चलेगा। यदि उसे तोड़कर नाक को सुंघाना पड़े तो समझ लीजिए कि वह नकली है। आज कुछ लोगों को कहना पड़ रहा है कि हम भी हिंदू हैं। यज्ञोपवीत दिखाने का नहीं धारण करने का विषय है।

सवाल - अमर उजाला के पाठक वर्ग को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब - अमर उजाला विश्वसनीय समाचार पत्र है। मैं चाहूंगा कि अमर उजाला का पाठक वर्ग इस विश्वास पर कायम रहे। सभी मन से अपना कर्म करें। मन से ईश्वर की शरण में रहें। यही संदेश है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed