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Amethi News: बच्चों को शिक्षा के साथ सिखाएं सेवा का भाव
Sun, 04 Oct 2026 12:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:45 AM IST
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. तिलोई स्थित राजा विश्वनाथ शरण सिंह इंटर कॉलेज के प्रांगण श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत:
तिलोई। आरबीएस इंटर कॉलेज के प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन शनिवार को प्रवाचक आचार्य शांतनु महाराज ने शिक्षा और संस्कार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पढ़ाई का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी पाना नहीं, बल्कि व्यक्ति को ऐसा बनाना भी है जो अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी समझे। बच्चों को शिक्षा के साथ बड़ों का सम्मान, अनुशासन, सत्य और सेवा का भाव भी सिखाना चाहिए।
भगवान राम और उनके भाइयों के गुरुकुल जाने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि गुरुकुल में ज्ञान के साथ व्यवहार और जीवन जीने की कला भी सिखाई जाती थी। आज के परिवार भी बच्चों को सुविधाओं के साथ जिम्मेदारियां सौंपे। उन्हें अपनी जरूरतों के साथ दूसरों की जरूरत समझने और समाज के लिए कुछ करने की आदत डालनी चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी केवल सफल नहीं, बल्कि संस्कारवान भी बनेगी।
उन्होंने भगवान राम के प्राकट्य और बाल लीलाओं का वर्णन किया। अयोध्यावासियों के भगवान के दर्शन के लिए दौड़ पड़ने का प्रसंग सुनाकर कहा कि सच्ची भक्ति में दिखावे की आवश्यकता नहीं होती। व्यक्ति को अपने आचरण से ईश्वर के प्रति श्रद्धा प्रकट करनी चाहिए। नामकरण संस्कार के प्रसंग में उन्होंने कहा कि बच्चों के नाम के साथ उनके आचरण पर भी ध्यान देना चाहिए।
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विश्वामित्र यज्ञ रक्षा प्रसंग में राम को सत्य और लक्ष्मण को त्याग व समर्पण का प्रतीक बताया। अहिल्या उद्धार प्रसंग से सीख देते हुए कहा कि गलती छिपाने के बजाय उसे स्वीकार कर सुधार की राह अपनानी चाहिए। यजमान अंकिता सिंह और बबलू सिंह ने पूजन किया। राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने अतिथियों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर रानी उपासना सिंह, ब्लॉक प्रमुख अर्चना सिंह, मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, एसडीएम श्रद्धा सिंह आदि मौजूद रहे।
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भगवान राम और उनके भाइयों के गुरुकुल जाने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि गुरुकुल में ज्ञान के साथ व्यवहार और जीवन जीने की कला भी सिखाई जाती थी। आज के परिवार भी बच्चों को सुविधाओं के साथ जिम्मेदारियां सौंपे। उन्हें अपनी जरूरतों के साथ दूसरों की जरूरत समझने और समाज के लिए कुछ करने की आदत डालनी चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी केवल सफल नहीं, बल्कि संस्कारवान भी बनेगी।
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उन्होंने भगवान राम के प्राकट्य और बाल लीलाओं का वर्णन किया। अयोध्यावासियों के भगवान के दर्शन के लिए दौड़ पड़ने का प्रसंग सुनाकर कहा कि सच्ची भक्ति में दिखावे की आवश्यकता नहीं होती। व्यक्ति को अपने आचरण से ईश्वर के प्रति श्रद्धा प्रकट करनी चाहिए। नामकरण संस्कार के प्रसंग में उन्होंने कहा कि बच्चों के नाम के साथ उनके आचरण पर भी ध्यान देना चाहिए।
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विश्वामित्र यज्ञ रक्षा प्रसंग में राम को सत्य और लक्ष्मण को त्याग व समर्पण का प्रतीक बताया। अहिल्या उद्धार प्रसंग से सीख देते हुए कहा कि गलती छिपाने के बजाय उसे स्वीकार कर सुधार की राह अपनानी चाहिए। यजमान अंकिता सिंह और बबलू सिंह ने पूजन किया। राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने अतिथियों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर रानी उपासना सिंह, ब्लॉक प्रमुख अर्चना सिंह, मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, एसडीएम श्रद्धा सिंह आदि मौजूद रहे।