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Amethi News: बच्चों के लिए चलाई जा रहीं जर्जर बसें
Fri, 28 Feb 2025 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 28 Feb 2025 12:44 AM IST
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संग्रामपुर (अमेठी)। क्षेत्र के जरौटा गांव में बृहस्पतिवार की सुबह एक निजी विद्यालय की बस के पीछे के दाहिने तरफ लगे दोनों टायर पंचर हो गए, जिससे काफी देर तक बच्चे रास्ते में फंसे रहे। करीब आधे घंटे बाद सुबह नौ बजे विद्यालय की दूसरी बस में बच्चों को ठूंसकर ले जाया गया। इस दौरान पंचर हुई विद्यालय वाहन की हालत लोगों को हैरान कर देने वाली नजर आई, जिससे स्थानीय लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए।
बस की बॉडी कई जगह से जर्जर है, सीटें टूटी हुईं और साइड का शीशा तक नहीं लगा था। सुरक्षा मानकों की बात करें तो बस में प्राथमिक उपचार किट भी नहीं थी। अग्निशमन यंत्र जरूर था, लेकिन उसमें गैस नहीं थी और न ही उस पर कोई एक्सपायरी डेट का स्टीकर लगा था। बच्चों ने बताया कि बस की सीटें टूटी हुई हैं और उन्हें किसी तरह बैठकर स्कूल आना-जाना पड़ता है।
एक छात्र ने बताया कि परसों बस का एक टायर पंचर हुआ था और आज दूसरा हो गया। स्टेपनी भी पंचर है, इसलिए कोई और विकल्प नहीं बचा। सुबह नौ बजे तक कोई दूसरा वाहन लेने नहीं पहुंचा। जरौटा निवासी पंकज, अजीत मिश्रा, रिंकू, अंबुज, राजकुमार, लालजी ने बताया कि आए दिन बस खराब हो जाती है।
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घर और गांव के बच्चे इसी बस से पढ़ने जाते हैं। लोगों ने बस की हालत देखने के बाद कहा कि इस लापरवाही से यह स्पष्ट है कि विद्यालय प्रशासन और परिवहन विभाग बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। जर्जर और मानकविहीन बसों का संचालन न सिर्फ बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ है, बल्कि प्रशासन की अनदेखी भी दर्शाता है।
जुगाड़ से चला रहे बस
बस का बोनट वेल्डिंग के सहारे टिका हुआ था। टायरों में गोटियां नहीं थीं। कई जगह रस्सियों और तार के सहारे बस को बांधकर चलाया जा रहा था। बस पर चढ़ने के लिए बने पायदान की चादर जंग लगने से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अमेठी काशी प्रसाद ने बताया कि स्कूल की बसों की जिम्मेदारी एआरटीओ विभाग की है।
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बस की बॉडी कई जगह से जर्जर है, सीटें टूटी हुईं और साइड का शीशा तक नहीं लगा था। सुरक्षा मानकों की बात करें तो बस में प्राथमिक उपचार किट भी नहीं थी। अग्निशमन यंत्र जरूर था, लेकिन उसमें गैस नहीं थी और न ही उस पर कोई एक्सपायरी डेट का स्टीकर लगा था। बच्चों ने बताया कि बस की सीटें टूटी हुई हैं और उन्हें किसी तरह बैठकर स्कूल आना-जाना पड़ता है।
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एक छात्र ने बताया कि परसों बस का एक टायर पंचर हुआ था और आज दूसरा हो गया। स्टेपनी भी पंचर है, इसलिए कोई और विकल्प नहीं बचा। सुबह नौ बजे तक कोई दूसरा वाहन लेने नहीं पहुंचा। जरौटा निवासी पंकज, अजीत मिश्रा, रिंकू, अंबुज, राजकुमार, लालजी ने बताया कि आए दिन बस खराब हो जाती है।
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घर और गांव के बच्चे इसी बस से पढ़ने जाते हैं। लोगों ने बस की हालत देखने के बाद कहा कि इस लापरवाही से यह स्पष्ट है कि विद्यालय प्रशासन और परिवहन विभाग बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। जर्जर और मानकविहीन बसों का संचालन न सिर्फ बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ है, बल्कि प्रशासन की अनदेखी भी दर्शाता है।
जुगाड़ से चला रहे बस
बस का बोनट वेल्डिंग के सहारे टिका हुआ था। टायरों में गोटियां नहीं थीं। कई जगह रस्सियों और तार के सहारे बस को बांधकर चलाया जा रहा था। बस पर चढ़ने के लिए बने पायदान की चादर जंग लगने से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अमेठी काशी प्रसाद ने बताया कि स्कूल की बसों की जिम्मेदारी एआरटीओ विभाग की है।