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Amethi News: लू से बचाव के लिए जिला अस्पताल में बना कूल रूम
Sat, 13 Apr 2024 01:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 13 Apr 2024 01:03 AM IST
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ओपीड में बैठे मरीज
अमेठी सिटी। गर्मी बढ़ने के साथ लू से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। असैदापुर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में छह बेड का कूल रूम लू से बचाव के लिए बनाया गया है। इसके साथ ही ट्राॅमा सेंटर और सीएचसी पर चार बेड व पीएचसी में दो बेड का कूल कक्ष तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही अस्पतालों में ओआरएस कार्नर बनाए गए हैं।गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही तापमान बढ़ने लगा है। लोगों को लू से बचाने की कवायद शुरू हो गई है। हीटवेव, जिसे लू भी कहा जाता है, तब चलती है जब तापमान लगातार कई दिनों तक सामान्य से अधिक रहता है। ह्यूमिडिटी यानी उमस के कारण ज्यादा गर्मी महसूस हो सकती है। गर्म हवा के वायुमंडल में फंसने के कारण हीट वेव उत्पन्न होती है।
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि जगदीशपुर स्थित ट्राॅमा सेंटर व 13 सामुदायिक तथा 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कूल कक्ष बनाए जा रहे हैं। ओआरएस कार्नर की स्थापना कर दी गई है। साथ ही लोगों को बीमारी के प्रति सतर्क किया जा रहा है।
डॉक्टरों की तैनाती की गई
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल ने बताया कि छह बेड का अलग से कूल कक्ष बना दिया गया है। चिकित्सकों की तैनाती भी कर दी गई है।
ओपीडी में मरीजों की बढ़ी भीड़
जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज गर्मी से डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से लेकर उल्टी, सिरदर्द, तेज बुखार, पेट दर्द, डायरिया की परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं।
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शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी 865 रही। इनमें पेट दर्द के करीब 67 मरीज शामिल रहे। फिजीशियन डॉ शुभम पांडेय ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) से परेशानी होने लगी है। ओपीडी में हर दिन 30-40 मरीज ऐसे ही आ रहे हैं। ऐसे मरीजों में डिहाइड्रेशन की वजह से हाथ-पैर में ऐंठन व दर्द की परेशानी है। यह स्थिति पिछले एक सप्ताह से है। बताया कि गर्मी आते ही अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। बताया कि घर से खाली पेट न निकलें। धूप के सीधे संपर्क में आने से बचें। साथ ही शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाए, इसलिए कुछ देर में तरल पदार्थ जरूर लेते रहें।
इनसेट
लू से बचाव के लिए ये करें
- गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके।
- जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। - संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें। मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें।
- घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें।
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सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि जगदीशपुर स्थित ट्राॅमा सेंटर व 13 सामुदायिक तथा 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कूल कक्ष बनाए जा रहे हैं। ओआरएस कार्नर की स्थापना कर दी गई है। साथ ही लोगों को बीमारी के प्रति सतर्क किया जा रहा है।
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डॉक्टरों की तैनाती की गई
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल ने बताया कि छह बेड का अलग से कूल कक्ष बना दिया गया है। चिकित्सकों की तैनाती भी कर दी गई है।
ओपीडी में मरीजों की बढ़ी भीड़
जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज गर्मी से डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से लेकर उल्टी, सिरदर्द, तेज बुखार, पेट दर्द, डायरिया की परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं।
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शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी 865 रही। इनमें पेट दर्द के करीब 67 मरीज शामिल रहे। फिजीशियन डॉ शुभम पांडेय ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) से परेशानी होने लगी है। ओपीडी में हर दिन 30-40 मरीज ऐसे ही आ रहे हैं। ऐसे मरीजों में डिहाइड्रेशन की वजह से हाथ-पैर में ऐंठन व दर्द की परेशानी है। यह स्थिति पिछले एक सप्ताह से है। बताया कि गर्मी आते ही अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। बताया कि घर से खाली पेट न निकलें। धूप के सीधे संपर्क में आने से बचें। साथ ही शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाए, इसलिए कुछ देर में तरल पदार्थ जरूर लेते रहें।
इनसेट
लू से बचाव के लिए ये करें
- गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके।
- जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। - संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें। मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें।
- घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें।