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Amethi News: सेल फैक्टरी में सीबीआई का छापा, खंगाला रिकॉर्ड
Fri, 23 Jun 2023 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 23 Jun 2023 11:47 PM IST
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सेल का वेयर हाउस
जगदीशपुर(अमेठी)। औद्योगिक क्षेत्र स्थित सेल फैक्ट्री में शुक्रवार को सीबीआई ने छापेमारी की। दोपहर बाद पहुंची सीबीआई टीम ने अभिलेखों को खंगाला। इस छापा मारकर से फैक्ट्री के अधिकारियों व कर्मचारियों में खलबली मची हुई है। इधर, देरशाम एसओ कमरौली अभिनेष कुमार ने बताया कि सीबीआई की एंटी करप्शन टीम आई थी। कंपनी से रिकार्ड लेकर गई है। कोई भी जानकारी से इंकार किया है।
स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की इकाई में शुक्रवार को दोपहर बाद एकाएक हलचल तेज हो गई। केन्द्रीय जांच एजेंसी की आठ सदस्यीय टीम यहां पर दो गाड़ियों के साथ पहुंची। टीम ने वेयर हाउस के प्रशासनिक भवन में कई घंटों तक रिकॉर्ड खंगाला। बताया जाता है कि सीबीआई टीम ने सेल के जीएम अतुल कुमार गुप्ता और एजीएम केसी विशनोई से भी जानकारी ली। खबर लिखे जाने तक सीबीआई की टीम जांच पड़ताल में जुटी है। यहां पर किसी के आने जाने पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है।
इसके लिए सीआईएसएफ की टीम को लगाया गया है। सीआईएसएफ के इंस्पेक्टर का कहना है कि कुछ लोग आए हैं, कौन हैं हमें नहीं पता। वेयर हाउस हमारे क्षेत्र में भी नहीं है। एसपी डॉ. इलामारन जी का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
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कंपनी ने देखे हैं कई उतार चढ़ाव
ऊषा ग्रुप के डायरेक्टर अनिल राय व विनय राय ने जिले के कमरौली स्थित इंडस्ट्रियल एरिया जगदीशपुर में वर्ष 1989 में 740 एकड़ के बड़े भू-भाग पर स्टील प्लांट की स्थापना की थी। मालविका के नाम से कंपनी की स्थापना के लिए ग्रुप ने यूपीएसआईडीसी से 740 एकड़ भूमि 99 साल की लीज पर ली थी। इस भूमि पर कंपनी स्थापित करने में उस समय 9,447 करोड़ रुपये खर्च हुए। कंपनी वर्ष 2000 में बनकर तैयार हुई। कंपनी का संचालन शुरू हुआ तो इसमें 600 को लोगों को स्थाई व करीब 2000 लोगों को अस्थायी रोजगार मिला। हालांकि कुछ ही दिनों बाद ग्रुप ने इस कारखाने को बीमार करार देते हुए बंद कर दिया।
कंपनी बंद होने से लोगों की उम्मीदें टूट गई। कारखाने में लगे तमाम हाथ बेकार हो गए। कई घरों के निवाले छिन गए। फाइनेंसर बैंक ने कारखाने पर अपने गार्ड तैनात कर दिए। वर्ष 2006 से 2008 के दौरान इस फैक्ट्री की बागडोर जेपी ग्रुप के जीएम कर्नल हिमालयन और एजीएम कपिल सूत के हाथों में थी। दो वर्ष के बाद 27 फरवरी 2009 को स्टील आथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के हाथ में फैक्ट्री की बागडोर आ गई।
इकाई से निकलने वाली सरिया स्टोर के लिए सेल ने एक वेयर हाउस की स्थापना की, परन्तु कुछ दिनों बाद उसे भी बन्द कर दिया गया। वर्तमान में फैक्ट्री के पास वेयर हाउस के नाम पर प्रशासनिक भवन और कैम्पस के बाहर बाउंड्री वॉल बचा है। फैक्टरी में लगे पुराने संयंत्र के लगभग 50 टन स्क्रैप को 61 लाख रुपये में एक कंपनी को बेच दिया गया।
जिसमें से 2150 टन के करीब स्क्रैप को यहां से निकाला जा चुका है। जानकारों की मानें तो कोविड काल के दौरान दूसरे राउंड में लगे लॉक डाउन के दौरान से टीएमटी बार मिल का प्रोडक्शन ठप है। वर्तमान में फैक्ट्री में जीएम, एजीएम सहित सेल के 10 कर्मचारियों व सीआईएसएफ के 83 लोगों की एक टुकड़ी कार्यरत हैं।
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स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की इकाई में शुक्रवार को दोपहर बाद एकाएक हलचल तेज हो गई। केन्द्रीय जांच एजेंसी की आठ सदस्यीय टीम यहां पर दो गाड़ियों के साथ पहुंची। टीम ने वेयर हाउस के प्रशासनिक भवन में कई घंटों तक रिकॉर्ड खंगाला। बताया जाता है कि सीबीआई टीम ने सेल के जीएम अतुल कुमार गुप्ता और एजीएम केसी विशनोई से भी जानकारी ली। खबर लिखे जाने तक सीबीआई की टीम जांच पड़ताल में जुटी है। यहां पर किसी के आने जाने पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है।
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इसके लिए सीआईएसएफ की टीम को लगाया गया है। सीआईएसएफ के इंस्पेक्टर का कहना है कि कुछ लोग आए हैं, कौन हैं हमें नहीं पता। वेयर हाउस हमारे क्षेत्र में भी नहीं है। एसपी डॉ. इलामारन जी का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
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कंपनी ने देखे हैं कई उतार चढ़ाव
ऊषा ग्रुप के डायरेक्टर अनिल राय व विनय राय ने जिले के कमरौली स्थित इंडस्ट्रियल एरिया जगदीशपुर में वर्ष 1989 में 740 एकड़ के बड़े भू-भाग पर स्टील प्लांट की स्थापना की थी। मालविका के नाम से कंपनी की स्थापना के लिए ग्रुप ने यूपीएसआईडीसी से 740 एकड़ भूमि 99 साल की लीज पर ली थी। इस भूमि पर कंपनी स्थापित करने में उस समय 9,447 करोड़ रुपये खर्च हुए। कंपनी वर्ष 2000 में बनकर तैयार हुई। कंपनी का संचालन शुरू हुआ तो इसमें 600 को लोगों को स्थाई व करीब 2000 लोगों को अस्थायी रोजगार मिला। हालांकि कुछ ही दिनों बाद ग्रुप ने इस कारखाने को बीमार करार देते हुए बंद कर दिया।
कंपनी बंद होने से लोगों की उम्मीदें टूट गई। कारखाने में लगे तमाम हाथ बेकार हो गए। कई घरों के निवाले छिन गए। फाइनेंसर बैंक ने कारखाने पर अपने गार्ड तैनात कर दिए। वर्ष 2006 से 2008 के दौरान इस फैक्ट्री की बागडोर जेपी ग्रुप के जीएम कर्नल हिमालयन और एजीएम कपिल सूत के हाथों में थी। दो वर्ष के बाद 27 फरवरी 2009 को स्टील आथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के हाथ में फैक्ट्री की बागडोर आ गई।
इकाई से निकलने वाली सरिया स्टोर के लिए सेल ने एक वेयर हाउस की स्थापना की, परन्तु कुछ दिनों बाद उसे भी बन्द कर दिया गया। वर्तमान में फैक्ट्री के पास वेयर हाउस के नाम पर प्रशासनिक भवन और कैम्पस के बाहर बाउंड्री वॉल बचा है। फैक्टरी में लगे पुराने संयंत्र के लगभग 50 टन स्क्रैप को 61 लाख रुपये में एक कंपनी को बेच दिया गया।
जिसमें से 2150 टन के करीब स्क्रैप को यहां से निकाला जा चुका है। जानकारों की मानें तो कोविड काल के दौरान दूसरे राउंड में लगे लॉक डाउन के दौरान से टीएमटी बार मिल का प्रोडक्शन ठप है। वर्तमान में फैक्ट्री में जीएम, एजीएम सहित सेल के 10 कर्मचारियों व सीआईएसएफ के 83 लोगों की एक टुकड़ी कार्यरत हैं।