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पुरवों तक फैला चिटफंड कंपनी का कारोबार
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गौरीगंज (अमेठी)। निवेशकों का भुगतान न करने वाली चिटफंड कंपनी का कारोबार जिले के कई छोटे पुरवों (विशेषकर भादर ब्लॉक) तक फैला है। मेच्योरिटी न दे पाने के बावजूद कंपनी के स्थानीय अधिकारी व अभिकर्ता गांवों के कम पढ़े लिखे लोगों को वरगला कर अब भी उनका धन जमा कराने में जुटे हैं। कंपनी के ज्यादातर निवेशक किसान व दिहाड़ी मजदूर हैं।
वर्ष 2013 में अमेठी शहर में शाखा खोलकर कामकाज शुरू करने वाली चिटफंड कंपनी ने प्रेस्टीज इंफ्रा डेवलपर लिमिटेड के नाम से बैंकिंग व्यवसाय शुरू किया। हालांकि बाद में किन्हीं कारणों से कुछ वर्ष तक कंपनी का कारोबार प्रतिष्ठा प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड व मौजूद समय प्रेस्टीजियस सहकारी आवासीय समिति लिमिटेड के नाम से चल रहा है।
इस कंपनी की जड़ें जिले में बहुत गहरी हैं। कंपनी ने शुरुआत में भादर ब्लॉक के रतापुर गांव निवासी राजेंद्र कुमार को अपना शाखा प्रबंधक बनाया। इस व्यक्ति ने अमटाही गांव में क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप कामता यादव को आपना अभिकर्ता बनाया।
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कामता ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर अमटाही, तिवारी का पुरवा, पूरे बसाऊ दुबे, बील्हापुर, ओबरिहन का पुरवा जैसे छोटे-बड़े कई गांवों के लोगों का धन कंपनी में जमा कराने के साथ उन्हें अभिकर्ता बनाकर उनके परिवार, परिचित व रिश्तेदारों तक का पैसा जमा कराया।
कामता का भाई गगन यादव कंपनी की अमेठी शाखा का कैशियर है। निवेशकों की मानें तो मेच्योरिटी नहीं दे पाने के बावजूद कामता यादव, उसका भाई हरकेश यादव व गगन यादव तथा शाखा का चपरासी प्रभाकर अब भी लोगों को वरगला कर धन जमा करा रहे हैं। राजेंद्र के बाद रतापुर का ही रामकुमार यादव कंपनी का मौजूदा शाखा प्रबंधक है।
राजगीर रघुनाथ ने जमा किए 1.26 लाख
बील्हापुर के रहने वाले राजगीर रघुनाथ प्रजापति ने बताया कि उसके साथ काम करने वाले गांव के ही एक अन्य राजगीर ने कंपनी में उसका निवेश कराया। उसने पांच-पांच सौ रुपये प्रति माह का तीन आरडी अकाउंट खोलकर 42-42 हजार (कुल 1.26 लाख रुपये) रुपये जमा किए। अब मेच्योरिटी मांगने पर उसे आजकल कहकर दौड़ाया जा रहा है।
अफसरों को भेजी 57 पेज की शिकायत
कंपनी में निवेश के बाद मेच्योरिटी नहीं पाने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अमेठी सांसद स्मृति ईरानी, मुख्य सचिव, डीजीपी, निबंधक चिटफंड, संयुक्त निदेशक प्रवर्तन निदेशालय के अलावा कमिश्नर अयोध्या व डीएम-एसपी अमेठी को 57 पेज की शिकायत भेजी है। शिकायती पत्र में कंपनी पर मुरादाबाद में अपना कारोबार समेट कर फरार होने का आरोप भी लगाया गया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायती पत्र मिलने के बाद पुलिस ने चिटफंड कंपनी की हकीकत खंगालनी शुरू कर दी है। रविवार को संग्रामपुर एसएचओ के निर्देश पर टीकरमाफी चौकी इंचार्ज धीरेंद्र कुमार वर्मा ने कामता यादव को बुलाकर पूछताछ की। धीरेंद्र ने कामता से कंपनी के सभी अफसरों को वैध कागजात के साथ बुलाने व निवेशकों के पूरे मेच्योरिटी अमाउंट का भुगतान कराने को कहा है।
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वर्ष 2013 में अमेठी शहर में शाखा खोलकर कामकाज शुरू करने वाली चिटफंड कंपनी ने प्रेस्टीज इंफ्रा डेवलपर लिमिटेड के नाम से बैंकिंग व्यवसाय शुरू किया। हालांकि बाद में किन्हीं कारणों से कुछ वर्ष तक कंपनी का कारोबार प्रतिष्ठा प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड व मौजूद समय प्रेस्टीजियस सहकारी आवासीय समिति लिमिटेड के नाम से चल रहा है।
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इस कंपनी की जड़ें जिले में बहुत गहरी हैं। कंपनी ने शुरुआत में भादर ब्लॉक के रतापुर गांव निवासी राजेंद्र कुमार को अपना शाखा प्रबंधक बनाया। इस व्यक्ति ने अमटाही गांव में क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप कामता यादव को आपना अभिकर्ता बनाया।
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कामता ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर अमटाही, तिवारी का पुरवा, पूरे बसाऊ दुबे, बील्हापुर, ओबरिहन का पुरवा जैसे छोटे-बड़े कई गांवों के लोगों का धन कंपनी में जमा कराने के साथ उन्हें अभिकर्ता बनाकर उनके परिवार, परिचित व रिश्तेदारों तक का पैसा जमा कराया।
कामता का भाई गगन यादव कंपनी की अमेठी शाखा का कैशियर है। निवेशकों की मानें तो मेच्योरिटी नहीं दे पाने के बावजूद कामता यादव, उसका भाई हरकेश यादव व गगन यादव तथा शाखा का चपरासी प्रभाकर अब भी लोगों को वरगला कर धन जमा करा रहे हैं। राजेंद्र के बाद रतापुर का ही रामकुमार यादव कंपनी का मौजूदा शाखा प्रबंधक है।
राजगीर रघुनाथ ने जमा किए 1.26 लाख
बील्हापुर के रहने वाले राजगीर रघुनाथ प्रजापति ने बताया कि उसके साथ काम करने वाले गांव के ही एक अन्य राजगीर ने कंपनी में उसका निवेश कराया। उसने पांच-पांच सौ रुपये प्रति माह का तीन आरडी अकाउंट खोलकर 42-42 हजार (कुल 1.26 लाख रुपये) रुपये जमा किए। अब मेच्योरिटी मांगने पर उसे आजकल कहकर दौड़ाया जा रहा है।
अफसरों को भेजी 57 पेज की शिकायत
कंपनी में निवेश के बाद मेच्योरिटी नहीं पाने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अमेठी सांसद स्मृति ईरानी, मुख्य सचिव, डीजीपी, निबंधक चिटफंड, संयुक्त निदेशक प्रवर्तन निदेशालय के अलावा कमिश्नर अयोध्या व डीएम-एसपी अमेठी को 57 पेज की शिकायत भेजी है। शिकायती पत्र में कंपनी पर मुरादाबाद में अपना कारोबार समेट कर फरार होने का आरोप भी लगाया गया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायती पत्र मिलने के बाद पुलिस ने चिटफंड कंपनी की हकीकत खंगालनी शुरू कर दी है। रविवार को संग्रामपुर एसएचओ के निर्देश पर टीकरमाफी चौकी इंचार्ज धीरेंद्र कुमार वर्मा ने कामता यादव को बुलाकर पूछताछ की। धीरेंद्र ने कामता से कंपनी के सभी अफसरों को वैध कागजात के साथ बुलाने व निवेशकों के पूरे मेच्योरिटी अमाउंट का भुगतान कराने को कहा है।