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कंबलों ने ठंडा किया रजाई का कारोबार

Fri, 28 Jan 2022 11:15 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jan 2022 11:15 PM IST
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Blankets cooled the quilting business
संग्रामपुर : ग्राहक को कंबल दिखाता दुकानदार। -संवाद - फोटो : AMETHI
संग्रामपुर (अमेठी)। आधुनिक युग की भागमभाग भरी जिंदगी ने लोगों की पूरी दिनचर्या भी बदलकर रख दी है। एक जमाना था जब सर्दी की दस्तक होने पर रजाई भराई का काम जोर पकड़ता था। गर्म वस्त्रों की तरह रजाई की बिक्री भी सीजन पर टिकी होती थी। वहीं सर्दी से पहले ही ऊन के स्वेटर आदि बुने जाने लगते थे। लेकिन बदलते दौर में अब गर्म कपड़ों का ट्रेंड बदल गया है। अब पहनने वाले रेडीमेड गर्म कपड़े और ओढ़ने वाले फैंसी कंबल और रजाइयों आदि की खरीद का चलन बढ़ गया है। जनवरी माह में पड़ रही गलन भरी सर्दी में रात के अलावा दिन के समय भी ठिठुरन बढ़ गई है। इसको देखते हुए लोग बाजार में गर्म कपड़ों की खरीद करते नजर आ रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच गर्म कपड़ों के बदलते ट्रेंड ने ऊन कारोबार और रजाई-गद्दों की भराई का काम करने वालों के चेहरे की मुस्कान छीन ली है।
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अब नहीं बिकते ऊन
ऊन विक्रेता विजय बरनवाल ने बताया कि आधुनिकता के दौर में ऊन की बिक्री समाप्त प्राय हो गई है। इसकी जगह लोग रेडीमेड स्वेटर, जॉकेट, कोट, सदरी, आदि को अधिक पसंद कर रहे हैं। पहले सर्दी की दस्तक होते ही ऊन और सलाई की बिक्री होने लगती थी लेकिन अब ऐसा नहीं रहा है। अब पूरे सीजन में गिने चुने लोग ही ऊन खरीदते हैं और इसके स्वेटर बनवाते हैं।
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लगातार कमजोर हो रहा कारोबार
रजाई-गद्दे बनाने वाले सीताराम ने बताया कि हम ग्राहक की मांग के अनुसार रजाई की साइज एवं डिजाइन के मुताबिक कुछ देर में ही रजाई-गद्दे तैयार कर देते हैं। साल के एक ही सीजन में काम रहता है। पर बदलते दौर में साल दर साल काम मंदा होता जा रहा है। ऐसे ही रहा तो रोजगार बदलना पड़ेगा। दुकान पर आने वाले ग्राहक गर्म कंबल की मांग करते है पर उनको कौन बताए जो बात रजाई में है वो बात कंबल में नहीं है। सर्दियों में काम बढ़ने पर परिवार के सभी सदस्य इस काम में लग जाते हैं। इस समय हमारे पास 400 से लेकर 2100 रुपये तक के रजाई-गद्दे तैयार मिल जाएंगे। ग्राहक द्वारा अपनी पसंद के अनुसार रजाई भरवाने के लिए कवर एवं रुई लेकर आने पर 100 रुपये भराई और 90 रुपये धागे का लेते हैं। पहले ठंड के सीजन प्रतिदिन 10 से 12 रजाई बिक जाती थीं पर मौजूदा समय मे हप्ते भर में मात्र तीन से चार रजाई ही बिक पाती है।
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कंबल की मांग ज्यादा
कंबल व्यवसायी सिप्पू बरनवाल ने कहा मौजूदा समय में गर्म कंबल की मांग बढ़ गई है। दुकान पर तरह-तरह के कंबल ग्राहकों की डिमांग पर मंगा कर रखे हैं। अधिकांश ग्राहक कश्मीरी कंबल की मांग करते हैं। कंबल का रेट भी कम होता है। ऐसे में कंबल ग्राहकों की पहली पसंद हो गया है।
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