अमेठी हत्याकांड: छेड़खानी के आरोपी पर शक, पुलिस ने घर पर दी दबिश, गांवो में लगा पुलिस का पहरा
सुनील व उनके परिवार की हत्या से गांव के लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का कहना है कि हत्या में शामिल लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाए।
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सुदामापुर निवासी शिक्षक सुनील, उनकी पत्नी व दो बेटियों की अमेठी में हत्या किए जाने के बाद रायबरेली पुलिस ने जिले के तिलियाकोट गांव में दबिश दी। दरअसल, सुनील की पत्नी ने कुछ समय पहले तिलियाकोट निवासी चंदन वर्मा के खिलाफ छेड़खानी का मुकदमा सदर कोतवाली में दर्ज कराया था। अमेठी पुलिस को शक है कि हत्या में चंदन का हाथ हो सकता है। इसी वजह से रायबरेली पुलिस देर रात उसके घर पहुंची, लेकिन वह नहीं मिला। अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि चंदन समेत जिन आरोपियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी तलाश की जा रही है।
गांव में आक्रोश, पुलिस का पहरा
सुनील व उनके परिवार की हत्या से गांव के लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का कहना है कि हत्या में शामिल लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए सीओ डलमऊ अरुण कुमार नौहवार पुलिस टीम के साथ सुदामापुर पहुंच गए। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही।
दिवाली की खुशियों के पहले परिवार पर टूटा गमों का पहाड़
जिले के गदागंज थाना क्षेत्र का सुदामापुर गांव। रात का वक्त था। घड़ी की सुई में करीब 7:30 बज रहे थे। चारों तरफ सन्नाटा था। इसी बीच एक घर में अचानक चीख पुकार मच जाती है। यह सुनकर पड़ोसी घर से बाहर निकल कर पता करते हैं तो यह जानकर हतप्रभ रह जाते हैं कि अमेठी में रह रहे गांव के सुनील, उनकी पत्नी व दो बेटियों की हत्या कर दी गई है। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि 15 दिन पहले पत्नी व बच्चों के साथ गांव आए सुनील व उनका परिवार अब इस दुनिया में नहीं है। दिवाली की खुशियों के पहले गमों का ऐसा पहाड़ टूटने से सुनील के परिजनों के साथ ही पूरा गांव गमगीन हो गया।
सुदामापुर निवासी सुनील कुमार का वर्ष 2018 में शिक्षक के पद पर चयन हुआ था। उनकी शादी जिले के ही भदोखर थाना क्षेत्र के उतरपारा गांव की रहने वाली पूनम भारती के साथ हुई थी। शादी के बाद दो बेटियां सृष्टि (5), समीक्षा (1) हुईं। शिक्षक बनने के बाद सुनील परिवार के साथ अमेठी में ही रहते थे और समय-समय पर गांव आते रहते थे। पड़ोसी सज्जन शुक्ल बताते हैं कि रात के साढ़े सात बजे के करीब सुनील के घर के परिजनों के रोने की आवाज सुनाई पड़ी। बाहर निकल कर देखा तो उनके पिता रामगोपाल, माता राजवती दहाड़े मारकर रो रही थीं। पूछने पर कहा, भइया सब कुछ खत्म हो गया है। सुनील और उनके परिवार को किसी ने मार दिया। कुछ देर बाद गांव के अन्य लोगों का जमावड़ा लग गया। नाते-रिश्तेदारी के लोगों का भी घर आना जाना शुरू हो गया।
पड़ोसी सज्जन शुक्ल बताते हैं कि सुनील उनके बहुत अच्छे दोस्त थे। अभी 15 दिन पहले घर आए थे। सबकुछ ठीकठाक था। पता नहीं यह सब कैसे हो गया। गमगीन माता-पिता की जुबां पर यही शब्द थे कि बेटवा ने कहा था कि हम अमेठी जा रहे हैं। दिवाली के त्योहार पर परिवार समेत आएंगे और मिलकर पर्व मनाएंगे। हमरे बेटवा का बुलाई दियो, एक बार देखि लई। बेटवा ठीक है। तुम लोग झूठ बोलत हो। जो बतावा जा रहा है, वह सब झूठ है।
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