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Amethi News: नैनो यूरिया व डीएपी का प्रयोग करने की दी सलाह
Sat, 12 Aug 2023 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 12 Aug 2023 12:25 AM IST
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अमेठी। बहादुरपुर विकास खंड सभागार में शुक्रवार को इफ्को एवं सहकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि ब्लाॅक प्रमुख चंद्रकली, पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश कुमार सिंह रहे। इस दौरान मौजूद किसानों को नैनो यूरिया व नैनो डीएपी के प्रयोग की सलाह दी गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए इफको क्षेत्राधिकारी शिशुपाल ने कहाकि परंपरागत तरीके से उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है। लगातार खेती में अपनी लागत को बढ़ाना पड़ रहा है। अधिक मात्रा में उर्वरकों के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण व फसलों की गुणवत्ता घट रही है। उन्होंने किसानों को स्वदेशी नैनो तकनीक पर आधारित नैनो यूरिया व नैनो डीएपी का प्रयोग करने की सलाह दी।
नैनो यूरिया व डीएपी के महत्व व विभिन्न फसलों में प्रयोग की विधि के बारे में बताया गया। इफ्को क्षेत्राधिकारी ने बताया कि नैनो यूरिया दलहनी फसलों में दो मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर उपयोग किया जाता है, जबकि खाद्यान्न फसलों में चार मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल की पत्तियों पर बुआई के 30 - 34 दिन बाद दस से पंद्रह दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव किया जाता है।
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सहायक आयुक्त सह निबंधक सहकारिता मित्र सेन वर्मा ने सभी समितियों के सचिवों को निर्देशित किया कि नैनो उर्वरक के बारे में किसानों को समझाए व प्रयोग करने की सलाह दी जाए। बीडीओ ने नैनो उर्वरकों के प्रयोग के बारे में किसानों को प्रेरित किया।
कृषि तकनीकी सहायक अनिल कुमार गुप्ता ने खेती में नैनो उर्वरक प्रयोग करने की किसानों को सलाह दी। कार्यक्रम के अध्यक्ष जयंत कुमार सिंह, संतलाल, एडीओ सुखदेव प्रसाद, अनिल कुमार गुप्ता के साथ ही समिति अध्यक्ष, सचिवों सहित 78 प्रगतिशील किसानों ने प्रतिभाग किया।
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कार्यशाला को संबोधित करते हुए इफको क्षेत्राधिकारी शिशुपाल ने कहाकि परंपरागत तरीके से उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है। लगातार खेती में अपनी लागत को बढ़ाना पड़ रहा है। अधिक मात्रा में उर्वरकों के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण व फसलों की गुणवत्ता घट रही है। उन्होंने किसानों को स्वदेशी नैनो तकनीक पर आधारित नैनो यूरिया व नैनो डीएपी का प्रयोग करने की सलाह दी।
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नैनो यूरिया व डीएपी के महत्व व विभिन्न फसलों में प्रयोग की विधि के बारे में बताया गया। इफ्को क्षेत्राधिकारी ने बताया कि नैनो यूरिया दलहनी फसलों में दो मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर उपयोग किया जाता है, जबकि खाद्यान्न फसलों में चार मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल की पत्तियों पर बुआई के 30 - 34 दिन बाद दस से पंद्रह दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव किया जाता है।
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सहायक आयुक्त सह निबंधक सहकारिता मित्र सेन वर्मा ने सभी समितियों के सचिवों को निर्देशित किया कि नैनो उर्वरक के बारे में किसानों को समझाए व प्रयोग करने की सलाह दी जाए। बीडीओ ने नैनो उर्वरकों के प्रयोग के बारे में किसानों को प्रेरित किया।
कृषि तकनीकी सहायक अनिल कुमार गुप्ता ने खेती में नैनो उर्वरक प्रयोग करने की किसानों को सलाह दी। कार्यक्रम के अध्यक्ष जयंत कुमार सिंह, संतलाल, एडीओ सुखदेव प्रसाद, अनिल कुमार गुप्ता के साथ ही समिति अध्यक्ष, सचिवों सहित 78 प्रगतिशील किसानों ने प्रतिभाग किया।