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467 सड़कें बदहाल, हिचकोलों संग हो रहा सफर

Thu, 13 Oct 2022 11:28 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Oct 2022 11:28 PM IST
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467 roads are in bad condition, traveling with hiccups
गौरीगंज (अमेठी)। जिले में 607 किलोमीटर लंबी 467 सड़कें बदहाल पड़ी हैं। इन सड़कों में 265 सड़कों पर पैचिंग की आवश्यकता है तो 202 सड़कें बिना विशेष मरम्मत चलने लायक नहीं हैं। यह वे सड़कें हैं जिन पर विभाग की ओर से गत माह कराए गए सर्वे व डीपीआर के आधार पर शासन 16.06 करोड़ रुपये उपलब्ध करा चुका है। टेंडर होने के बावजूद बरसात इन सड़कों पर काम पूरा होने में बाधा बनी है।
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जिले की चारों तहसीलों में बड़ी संख्या में सड़कें बदहाल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा बड़ी संख्या में शहरी क्षेत्र की सड़कें भी चलने लायक नहीं हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी सड़कों की है जो बिना विशेष मरम्मत चलने लायक नहीं हैं। ऐसी सड़कों की संख्या भी सैकड़े में है जो मामूली मरम्मत (पैचिंग) के बाद चलने लायक हो जाएंगी।
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बदहाल सड़कों के कारण यातायात में होने वाली दिक्कतों से लोगों में आक्रोश है। बदहाल पड़ी सड़कों को चलने लायक बनाया जा सके इसके लिए सितंबर माह में लोक निर्माण विभाग की ओर से एक सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने प्रांतीय व निर्माण खंड की ओर से निर्मित इन सड़कों की पैचिंग व नवीनीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजकर धनावंटन की मांग की थी।
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मांग के सापेक्ष नहीं मिला बजट
विभाग ने शासन से प्रांतीय खंड की 163.23 किलोमीटर लंबी 148 सड़कों व निर्माण खंड की 126.61 किलोमीटर लंबी 117 सड़कों पर पैचिंग के लिए कुल एक करोड़ 71 लाख 37 हजार रुपये मांगे गए थे। हालांकि शासन ने उपरोक्त सभी सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए महज एक करोड़ पांच लाख पांच हजार रुपये ही आवंटित किया।
नवीनीकरण के लिए 13.94 करोड़ रुपये
विभाग ने प्रांतीय खंड की 195.96 किलोमीटर लंबी 139 सड़कों व निर्माण खंड की 121.61 किलोमीटर लंबी 63 सड़कों के लिए 13 करोड़ 94 लाख 79 हजार रुपये की डिमांड की थी। इस पर सरकार की ओर से पूरा बजट सितंबर में ही जारी कर दिया गया था।
150 सड़कों की विशेष मरम्मत का प्रस्ताव भेजा
अक्तूबर के पहले हफ्ते में पीडब्ल्यूडी ने प्रांतीय खंड की 142.61 किलोमीटर लंबी 78 सड़कों के लिए 20 करोड़ 29 लाख 12 हजार रुपये व निर्माण खंड के 139.63 किलोमीटर लंबे 72 मार्गों के लिए 25 करोड़ 20 लाख 83 हजार रुपये आवंटित करने की मांग शासन से की है। इसी तरह प्रांतीय खंड की 7.95 किलोमीटर लंबी नौ सड़कों व निर्माण खंड की 7.10 किलोमीटर लंबी पांच सड़कों के लिए चार करोड़ आठ लाख 70 हजार रुपये आवंटित करने का अनुरोध किया था। हालांकि अभी इसे शासन की स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
वास्तविक हालात और भी बदतर
उपरोक्त आंकड़े तो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। जिले में वास्तविक हालात और बदतर हैं। आलम यह है कि गांवों से होकर गुजरने वाली कोई भी सड़क ऐसी नहीं है जिस पर गड्ढे न हों। कई सड़कें तो इस कदर बदहाल हैं कि उन पर पैदल चलना दूभर है। सड़कों की बदहाली को लेकर लोगों का आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि सरकार आए दिन सड़क से लेकर सदन तक प्रदेश की सड़कों के गड्ढामुक्त होने या निर्धारित डेडलाइन में कर देने का दावा करती रहती है।

तैयार हो रही नई कार्ययोजना
प्रांतीय खंड के एक्सईएएन शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की नई समय सीमा (15 नवंबर) निर्धारित करने के बाद सभी जेई से नए सिरे से रिपोर्ट मांगी गई थी। तकरीबन सभी की रिपोर्ट मिल चुकी है। कार्ययोजना तैयार की जा रही है। देर रात तक यह कार्ययोजना शासन को प्रेषित कर दी जाएगी। धनावंटन होते ही सड़कों को गड्ढामुक्त करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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