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नहीं दूर हो रहा कुपोषण का संकट
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Fri, 11 Sep 2015 10:57 PM IST
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हालत यह है कि दिसंबर माह में हुई सामान्य जांच में जहां कुल 1519 अतिकुपोषित बच्चे पाए गए थे, वहीं 7 व 10 सितंबर को चले विशेष अभियान में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ कर 6 हजार 312 हो गई।
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अलग अलग योजनाओं में बजट का पर्याप्त आवंटन किए जाने के बावजूद जिले में बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रख पाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम साबित हो रहा है। अफसरों की लापरवाही से जमीनी स्तर पर कई योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
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बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत बच्चों का विधिवत परीक्षण करने, दवाएं देने व आवश्यकता पड़ने पर भर्ती कराए जाने का प्राविधान है। पर यह योजना स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते मजाक बनकर रह गई है।
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आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों की देखरेख की जो योजना चल रही उसमें पुष्टाहार की कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी है। हॉट कुक्ड योजना भी सिर्फ कागजों पर ही चल रही है। बच्चों के टीकाकरण के लिए एएनएम व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को न तो घर जाने की सुध रहती है, और न ही ये कर्मचारी नियमित तौर पर गांवों में जाते ही हैं।
इन्हीं सब का खामियाजा जिले में बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। योजनाओं को लेकर पसरी लापरवाही का ही परिणाम है कि जिले में बच्चों के बीच कुपोषण घटने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है।
बीते दिसंबर माह में हुई सामान्य जांच के दौरान कुल 1519 अतिकुपोषित बच्चे मिले थे। इसी माह 7 व 10 सितंबर को हुए वजन दिवस अभियान में 3 लाख 2 हजार 830 बच्चों की जांच में यह संख्या चार गुना बढ गई। कुल 6 हजार 312 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए, जबकि 28 हजार 413 कुपोषित बच्चे मिले।
सामाजिक कार्यकर्ता धर्मवीर सिंह बग्गा ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही के जिम्मेदारी कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। अभियान की नियमित समीक्षा हो, और यह तय हो कि बच्चों को संबंधित योजनाओं का लाभ मिल भी पा रहा है या नहीं।
व्यापार मंच के पूर्व जिलाध्यक्ष जयराम संगवानी ने कहा कि योजनाएं कम ही हों, लेकिन उनका संचालन बेहतर ढंग से हो, तभी उसका लाभ सभी को मिल सकेगा। कागजों पर ही पर्यवेक्षण संभव नहीं। आकस्मिक चेकिंग कर गांवों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी कराई जाए। इसमें जिसकी लापरवाही मिले उसके पूरे एक माह के वेतन की कटौती या फिर वेतनवृद्घि रोकने जैसी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी अजय गुप्ता ने बताया कि कुपोषण से बचने के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। लोगों से कहा जाता है कि वे समय समय पर बच्चे का वजन अवश्य कराएं। योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सभी ब्लॉकों में मेडिकल अफसरों की टीम बनाई गई है। यह टीम कुपोषत बच्चों का चिह्नित कर उन्हें इस श्रेणी से बाहर निकालने के लिए कदम उठाएगी।