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बजट को लेकर कोई मायूस तो कोई खुश

Wed, 02 Feb 2022 12:15 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 12:15 AM IST
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Some are sad about the budget and some are happy.
अंबेडकरनगर। केंद्र सरकार के बजट को लेकर जिले में मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। टैक्स स्लैब में परिवर्तन न किए जाने से जहां लोगों में मायूसी रही, वहीं कपड़े, मोबाइल व स्टील के बर्तन आदि सस्ते किए जाने को लेकर राहत मिलती दिखी। शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही 400 नई वंदेमातरम ट्रेनें चलाए जाने, आर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिए जाने, किसानों को डिजिटल सर्विस दिए जाने का स्वागत किया गया।
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60 लाख युवाओं को नौकरी दिए जाने, लगभग डेढ़ करोड़ रुपये एमएसएमई को दिए जाने तथा स्किल गैप को कम करने की कोशिशों की सराहना की गई। महंगाई पर अंकुश पाने के लिए कोई खास इंतजाम न करने को लेकर आमतौर पर लोगों में मायूसी देखने को मिली, लेकिन इस बात की सराहना भी हुई कि 75 जिलों मेें डिजिटल बैंक स्थापित करने, महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने तथा 80 लाख नए मकान तैयार करनेे की सराहना भी की गई। अमर उजाला टीम ने समाज के अलग-अलग वर्ग से बजट को लेकर बातचीत की तो उनकी प्रतिक्रिया इस तरह सामने आई।
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बजट अत्यंत सराहनीय
सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम वर्मा ने कहा कि बजट अत्यंत सराहनीय है। इसमें प्रत्येक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ध्यान रखा गया है। 60 लाख युवाओं को जहां नौकरी दिए जाने की घोषणा की गई है, तो वहीं शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है। व्यापारी शुभम नेे कहा कि मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को बढ़ावा दिया गया है। साथ ही दो लाख आंगनबाड़ी कर्मियों को अपग्रेड किए जाने तथा 75 जिलों में डिजिटल बैंक खोले जाने की घोषणा भी अत्यंत सराहनीय है। पांच वर्षों में किसानों का 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त उत्पादन करने का लाभ मिलना भी बेहतर है।
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महिलाओं को और सुविधाएं देने की जरूरत
सूर्यमुखी ने कहा कि उम्मीद थी कि बजट में रसोई गैस के साथ-साथ खाद्य सामग्रियों के दाम में कमी की घोषणा की जाएगी, लेकिन इस तरह की घोषणा बजट में नहीं की गई। इससे घर के बजट पर सीधा असर पड़ेगा। बजट से बहुत उम्मीद थी, लेकिन मायूसी ही हाथ लगी है। साधना ने कहा कि कपड़ों को सस्ता, स्टील बर्तन, मोबाइल, रत्न, पत्थर व हीरा सस्ता किया जाना सराहनीय है। हालांकि महिलाओं के लिए और भी सुविधाएं दिए जाने की जरूरत है।
शिक्षा की गुणवत्ता में होगी वृद्धि
छात्रा तान्या सिंह ने कहा कि बजट में शिक्षा क्षेत्र को बेहतर बनाए जाने के लिए जो घोषणा की गई है, उससेे शिक्षा के स्तर की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री ई विद्या योजना के तहत एक चैनल, एक क्लास योजना प्रारंभ किया जाना अत्यंत सराहनीय है। इसका व्यापक लाभ छात्र-छात्राओं को मिलेगा। छात्र राहुल ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को डिजिटल किए जाने का प्राविधान बजट मेें रखा गया है। इससे छात्र-छात्राएं हाईटेक हो सकेंगे। डिजिटल यूनिवर्सिटी की घोषणा भी बेहतर कदम है। ऐसा होने से छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन शिक्षा हासिल करने में व्यापक मदद मिलेगी।
जैविक खेती को बढ़ावा देना अच्छा कदम
किसान भागीरथी ने कहा कि बजट में किसानों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राशि 6 हजार से बढ़ाकर 8 हजार किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान नेता हजारी ने कहा कि जीरो बजट व जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में विशेष स्थान देना सराहनीय कदम है। वर्ष 2023 को मोटा अनाज वर्ष घोषित किए जाने से किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा। गंगा किनारे पांच किमी. चौड़े क्षेत्रफल में रासायनिक मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ाए जाने की घोषणा लाभप्रद होगी। दलहन, तिलहन, गेहूं, धान, बाजरा, चना, अरहर, मूंग, नाइजर काला तिल कुमकुम, गन्ना, कपास, जूट, नारियल, सोयाबीन, सरसों पर एमएसपी दिए जाने की घोषणा से किसानों को काफी राहत मिलेगी। किसान मनीराम ने कहा कि किसानों को लोन पर ब्याज सब्सिडी दिए जान का प्राविधान बजट में रखा गया है, जो सराहनीय है।
टैक्स स्लैब में बदलाव न होने से मायूसी
शिक्षक राकेश त्रिपाठी ने कहा कि टैक्स स्लैब में परिवर्तन होनेे की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे टैक्स देने वालों को तगड़ा झटका लगा है। कहा कि जिस प्रकार से महंगाई में वृद्धि हो रही है, उसे देखते हुए टैक्स स्लैब में बदलाव करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिक्षक अनुराग ने कहा कि बीते बजट में भी टैक्स स्लैब में परिवर्तन नहीं हुआ था। इस बार उम्मीद थी कि सरकारी कर्मचारियों व टैक्स देने वालों को सरकार बड़ी राहत देगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि लंबे समय से टैक्स स्लैब में बदलाव किए जाने की मांग को देखते हुए कुछ बदलाव किया जाना चाहिए था।

मदरसा शिक्षकों को लगा झटका
केंद्र सरकार के आम बजट ने मदरसा शिक्षकों को तगड़ा झटका दिया है। न तो बकाया मानदेय भुगतान को लेकर कोई घोषणा की गई है और न ही पूरा बजट ही दिया गया है। मॉडर्न मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद जमाल अहमद अंसारी ने कहा कि बजट में मदरसा शिक्षकों के लिए मात्र 160 करोड़ रुपये ही बजट दिया गया है, जो कि विगत वर्ष की तुलना मेें 14 करोड़ कम है। पिछले बजट मेें 174 करोड़ रुपये को मंजूरी प्रदान की गई थी। मात्र उत्तर प्रदेश के लिए ही 120 करोड़ रुपये की जरूरत है। बकाया मानदेय को लेकर भी बजट में कोई घोषणा नहीं की गई है।
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