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Ambedkar Nagar News: पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित होगा श्रवणक्षेत्र धाम
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अंबेडकरनगर। मातृ- पितृभक्ति के लिए श्रवण कुमार का नाम अमर है। अपने माता-पिता से अतुलनीय प्रेम के लिए उनका उदाहरण दिया जाता है। अकबपुर तहसील क्षेत्र स्थित श्रवणक्षेत्र धाम अयोध्या से 55 किलोमीटर पर स्थित है। यहां पर वार्षिक मेले का आयोजन होता है। अयोध्या में राम मंदिर बन जाने से अब यहां भी पर्यटक आने लगे हैं। अब इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 165.15 लाख रुपये की कार्ययोजना तैयार हुई है।
रामायण के अनुसार श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता की इच्छा पर उनको कांवड़ में बिठाकर तीर्थ यात्रा पर ले जा रहे थे। उसी समय राजा दशरथ ने शिकार करते हुए श्रवण कुमार पर तीर चला दिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। श्रवण कुमार के माता-पिता को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने राजा दशरथ को श्राप दिया था कि जैसे पुत्र वियोग में उनकी मृत्यु हो रही है, वैसे ही राजा दशरथ की मृत्यु भी पुत्र वियोग में होगी। इसी श्राप के कारण बाद में राजा दशरथ को राम को वनवास भेजना पड़ा और राम के वियोग में ही राजा दशरथ का देहांत हो गया था। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक यही घटना भगवान श्रीराम के अवतरण की नींव तथा मातृ-पितृ भक्ति के आस्था का केंद्र बनी थी। पौराणिक श्रवण धाम पर मड़हा और बिसुही नदी के मिलन से तमसा नदी के उद्गम का पौराणिक संगम स्थल भी है। अब इसी श्रवणक्षेत्र स्थल के दिन बहुरने वाले हैं।
कराए जाएंगे यह काम
रामायण सर्किट से जोड़ने व पर्यटक मानचित्र पर लाने के लिए शासन का प्रयास रंग लाने लगा है। यहां पर 165.15 लाख रुपये से शेड, अतिथि गृह, शौचालय, सेप्प्टिक टैंक, सड़क, बेंच व बिजली आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी। इससे पूर्व यहां भव्य प्रतिमाओं की स्थापना की जा चुकी है।
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बोले स्थानीय लोग
श्रवणक्षेत्र के बाबा आनंद सिंह ने कहा कि जिस प्रकार इस स्थान की महत्ता है उस प्रकार से यहां पर्यटक नहीं आते हैं। अगर इसे विकसित कर दिया जाए तो पर्यटकों का आना-जाना बढ़ेगा। रमेश ने कहा कि यह क्षेत्र अयोध्या से सटा है। अकबरपुर -अयोध्या मार्ग पर इस स्थल का कोई बोर्ड तक नहीं लगा है। फूलमती ने कहा कि इसका विस्तार हो जाए तो स्थानीय लोगों को राेजगार के साथ यहां का विकास भी हो जाएगा।
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रामायण के अनुसार श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता की इच्छा पर उनको कांवड़ में बिठाकर तीर्थ यात्रा पर ले जा रहे थे। उसी समय राजा दशरथ ने शिकार करते हुए श्रवण कुमार पर तीर चला दिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। श्रवण कुमार के माता-पिता को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने राजा दशरथ को श्राप दिया था कि जैसे पुत्र वियोग में उनकी मृत्यु हो रही है, वैसे ही राजा दशरथ की मृत्यु भी पुत्र वियोग में होगी। इसी श्राप के कारण बाद में राजा दशरथ को राम को वनवास भेजना पड़ा और राम के वियोग में ही राजा दशरथ का देहांत हो गया था। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक यही घटना भगवान श्रीराम के अवतरण की नींव तथा मातृ-पितृ भक्ति के आस्था का केंद्र बनी थी। पौराणिक श्रवण धाम पर मड़हा और बिसुही नदी के मिलन से तमसा नदी के उद्गम का पौराणिक संगम स्थल भी है। अब इसी श्रवणक्षेत्र स्थल के दिन बहुरने वाले हैं।
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कराए जाएंगे यह काम
रामायण सर्किट से जोड़ने व पर्यटक मानचित्र पर लाने के लिए शासन का प्रयास रंग लाने लगा है। यहां पर 165.15 लाख रुपये से शेड, अतिथि गृह, शौचालय, सेप्प्टिक टैंक, सड़क, बेंच व बिजली आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी। इससे पूर्व यहां भव्य प्रतिमाओं की स्थापना की जा चुकी है।
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बोले स्थानीय लोग
श्रवणक्षेत्र के बाबा आनंद सिंह ने कहा कि जिस प्रकार इस स्थान की महत्ता है उस प्रकार से यहां पर्यटक नहीं आते हैं। अगर इसे विकसित कर दिया जाए तो पर्यटकों का आना-जाना बढ़ेगा। रमेश ने कहा कि यह क्षेत्र अयोध्या से सटा है। अकबरपुर -अयोध्या मार्ग पर इस स्थल का कोई बोर्ड तक नहीं लगा है। फूलमती ने कहा कि इसका विस्तार हो जाए तो स्थानीय लोगों को राेजगार के साथ यहां का विकास भी हो जाएगा।