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Ambedkar Nagar News: रामलीला में दिखी त्रेतायुग की छाया, दर्शकों ने सराहा

Thu, 25 Sep 2025 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Thu, 25 Sep 2025 11:28 PM IST
सार

अंबेडकरनगर में विभिन्न स्थानों पर पारंपरिक रामलीला मंचनों ने धार्मिक माहौल बना दिया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों और जीवंत झांकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालुओं ने तालियों और पुष्पवर्षा से कलाकारों का स्वागत किया।

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Shadow of Tretayug seen in Ramlila, audience appreciated it

विस्तार

अंबेडकरनगर। रामलीला के मंच पर शुक्रवार रात जैसे त्रेतायुग सजीव हो उठा। जब भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता का अद्भुत मंचन हुआ, तो पूरा वातावरण भक्तिभाव में डूब गया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और जय श्रीराम के जयघोष के साथ भावपूर्ण प्रस्तुति का स्वागत किया।
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अकबरपुर के इल्तिफातगंज मार्ग पर हनुमान मंदिर के निकट बुधवार को रामलीला मंचन में प्रभु श्रीराम के जन्म का जीवंत चित्रण किया गया। राजा दशरथ की तपस्या, रानी कौशल्या की आराधना और फिर ब्रह्मा-विष्णु-महेश की सम्मिलित कृपा से भगवान श्रीराम का जन्म इस पूरे दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।कलाकारों ने पारंपरिक परिधानों में अपनी सजीव प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु राम का बाल रूप जब मंच पर प्रकट हुआ, तो हर आंख श्रद्धा और प्रेम से भर उठी। दर्शकों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया।
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अकबरपुर के शहजादपुर कस्बे की 121 वर्ष पुरानी रामलीला में भी भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का मंचन हुआ। दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा में अपने कुलगुरु वशिष्ठ से मार्गदर्शन मांगा। गुरू वशिष्ठ की सलाह पर महाराज दशरथ ने पटना नरेश के यहां दूत भेजकर ऋषि श्रृंगी को आमंत्रित किया, जिन्होंने अयोध्या पहुंचकर पुत्रेष्टि यज्ञ संपन्न कराया। यज्ञ की पूर्णाहुति पर अग्निदेव स्वयं प्रकट हुए और खीर रूपी हव्य प्रदान किया। इस प्रसाद के प्रभाव से महाराज दशरथ को चार पुत्रों श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की प्राप्ति हुई। भगवान श्रीराम के जन्म की सूचना पाकर कैलाश पर्वत पर स्थित बाबा भोलेनाथ भावविभोर हो उठे।
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सीता जन्म से शुरू हुई कथा


विद्युतनगर।
टांडा चौक में चल रही रामलीला के दूसरे दिन बुधवार को लीला की शुरुआत सीता जन्म से हुई। जैसे ही धरती से जनकनंदिनी प्रकट हुईं, पूरा पंडाल सीता माता की जय के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद भगवान शिव के बालरूप राम के दर्शन का भावुक दृश्य प्रस्तुत हुआ। तत्पश्चात विश्वामित्र का आगमन हुआ और उन्होंने दशरथ से राम-लक्ष्मण को वन चलने का अनुरोध किया। राम-लक्ष्मण के धनुषबाण साधकर ताड़का का संहार देख दर्शकों तालियां बजाने लगे।

अहिल्या उद्धार की भावपूर्ण प्रस्तुति

जलालपुर। क्षेत्र के रामलीला मैदान में बुधवार को अहिल्या उद्धार का दृश्य प्रस्तुत किया गया। वहीं फुलवारी में राम-सीता का प्रथम मिलन दृश्य मार्मिक रहा। राम-सीता विवाह की तैयारियों को जीवंत रूप से मंचित किया गया। पारंपरिक परिधान, रंग-बिरंगे वस्त्र और भव्य मंच सज्जा ने त्रेतायुग का आभास कराया। कलाकारों की सजीव झांकियों और अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
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