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बसपा की सधी चाल ने अन्य दलों की बढ़ाई बेचैनी
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अंबेडकरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी की जंग में बसपा की सधी चाल ने अन्य दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। प्रतिद्वंद्वी दलों सपा और भाजपा की तरह हालांकि बसपा भी अंतर्विरोध से जूझ रही है, लेकिन इसके बावजूद वह हर मोड़ पर अन्य दलों और मतदाताओं को यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश में है कि उसकी तैयारियां व्यवस्थित, संगठित और अग्रणी हैं। बसपा ने इसी कड़ी में अब अपने सभी 41 प्रत्याशियों की जीत की अपील एक साथ करते हुए यह जताया है कि एक-एक प्रत्याशी की जीत के लिए पार्टी पूरी ताकत लगाने को तैयार है।
अंबेडकरनगर में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बसपा का सबसे ज्यादा राज रहा है। जनपद गठन के बाद से बीते चुनाव में सपा समर्थित प्रत्याशी के तौर पर अध्यक्ष रहे सुधीर सिंह बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस बार ऐसे में अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर जंग शुरू से ही रोचक मानी जा रही थी, लेकिन गत चुनाव में अध्यक्ष पद पर पराजित हुईं पूर्व मंत्री वरिष्ठ बसपा नेता लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा ने टिकट मिलने के बावजूद जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव न लड़ने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। वे पहले भी अध्यक्ष रह चुकी थीं। इस बार उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा था ,लेकिन उनके इंकार ने बसपा के अंतर्विरोध को सामने ला दिया। इससे दूसरे दलों में न सिर्फ खुशी की लहर दौड़ गई, वरन जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर नई उम्मीद जागती दिखी।
हालांकि बसपा ने राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए अंतर्विरोध को लेकर कोई चर्चा नहीं की और न ही सफाई में समय बर्बाद किया। जब बाकी राजनीतिक दल बसपा की टूटन पर निगाह जमाए थे, तब बसपा के रणनीतिकार अपने खेमे को मजबूत करने और प्रत्याशियों के पक्ष में जनता को लामबंद करने की योजना में जुटे थे। बसपा यह संदेश देने की कोशिश में है कि वह हर मोड़ पर अन्य दलों से काफी आगे है। इसी रणनीति के तहत बसपा ने सबसे पहले अन्य दलों की अपेक्षा अपने सभी जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशियों की घोषणा कर दी।
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नामांकन कराने में भी बसपा ने ही ज्यादा तेजी दिखाई। चुनाव चिह्न मिलने के बाद बसपा ने अब फिर से अपने कुशल प्रबंधन का परिचय देते हुए सबसे पहले अपने सभी 41 प्रत्याशियों की जीत की अपील एक साथ कर दी है। सभी 41 प्रत्याशियों की जीत का पोस्टर एक साथ जारी कर बसपा ने न सिर्फ अपनी एकजुटता जाहिर की है, वरन यह भी बता दिया है कि एक-एक प्रत्याशियों की जीत के लिए वह पूरी ताकत लगा देने को तैयार है। बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर पूर्व सांसद घनश्याम चंद्र खरवार कहते हैं कि बसपा का प्रत्येक मतदाता बहन मायावती का सिपाही है। हम सब मिलकर यहां जीत दर्ज करेंगे। हम सिर्फ अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
इस बीच बसपा ने एक साथ सभी प्रत्याशियों की जीत का पोस्टर जारी कर उन लोगों की उम्मीदों पर करारा प्रहार किया है जिन्होंने सिर्फ बसपा में टूटन के जरिए कोई उम्मीद लगा रखी है। जाहिर तौर पर अन्य दलों को अब जीत के लिए अपनी रणनीति में नए सिरे से बदलाव लाना होगा
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अंबेडकरनगर में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बसपा का सबसे ज्यादा राज रहा है। जनपद गठन के बाद से बीते चुनाव में सपा समर्थित प्रत्याशी के तौर पर अध्यक्ष रहे सुधीर सिंह बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस बार ऐसे में अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर जंग शुरू से ही रोचक मानी जा रही थी, लेकिन गत चुनाव में अध्यक्ष पद पर पराजित हुईं पूर्व मंत्री वरिष्ठ बसपा नेता लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा ने टिकट मिलने के बावजूद जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव न लड़ने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। वे पहले भी अध्यक्ष रह चुकी थीं। इस बार उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा था ,लेकिन उनके इंकार ने बसपा के अंतर्विरोध को सामने ला दिया। इससे दूसरे दलों में न सिर्फ खुशी की लहर दौड़ गई, वरन जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर नई उम्मीद जागती दिखी।
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हालांकि बसपा ने राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए अंतर्विरोध को लेकर कोई चर्चा नहीं की और न ही सफाई में समय बर्बाद किया। जब बाकी राजनीतिक दल बसपा की टूटन पर निगाह जमाए थे, तब बसपा के रणनीतिकार अपने खेमे को मजबूत करने और प्रत्याशियों के पक्ष में जनता को लामबंद करने की योजना में जुटे थे। बसपा यह संदेश देने की कोशिश में है कि वह हर मोड़ पर अन्य दलों से काफी आगे है। इसी रणनीति के तहत बसपा ने सबसे पहले अन्य दलों की अपेक्षा अपने सभी जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशियों की घोषणा कर दी।
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नामांकन कराने में भी बसपा ने ही ज्यादा तेजी दिखाई। चुनाव चिह्न मिलने के बाद बसपा ने अब फिर से अपने कुशल प्रबंधन का परिचय देते हुए सबसे पहले अपने सभी 41 प्रत्याशियों की जीत की अपील एक साथ कर दी है। सभी 41 प्रत्याशियों की जीत का पोस्टर एक साथ जारी कर बसपा ने न सिर्फ अपनी एकजुटता जाहिर की है, वरन यह भी बता दिया है कि एक-एक प्रत्याशियों की जीत के लिए वह पूरी ताकत लगा देने को तैयार है। बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर पूर्व सांसद घनश्याम चंद्र खरवार कहते हैं कि बसपा का प्रत्येक मतदाता बहन मायावती का सिपाही है। हम सब मिलकर यहां जीत दर्ज करेंगे। हम सिर्फ अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
इस बीच बसपा ने एक साथ सभी प्रत्याशियों की जीत का पोस्टर जारी कर उन लोगों की उम्मीदों पर करारा प्रहार किया है जिन्होंने सिर्फ बसपा में टूटन के जरिए कोई उम्मीद लगा रखी है। जाहिर तौर पर अन्य दलों को अब जीत के लिए अपनी रणनीति में नए सिरे से बदलाव लाना होगा