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कोविड अस्पताल में अव्यवस्थाओं से मरीज परेशान
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टांडा। सीएम योगी के तमाम निर्देशों के बाद भी जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। मरीज व परिजन लगातार लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि संक्रमितों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
टांडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए गए अत्याधुनिक महिला एवं बाल कल्याण अस्पताल को प्रशासन ने कोविड-19 सेंटर बनाया है। यहां 100 कोरोना पीड़ित मरीजों के भर्ती होने का इंतजाम है। हालांकि भर्ती होने के बाद अंदर मरीजों की क्या तीमारदारी हो रही है, इसकी समुचित जानकारी परिवारीजनों तक को नहीं हो पा रही है।
एक सप्ताह पूर्व पटेलनगर अकबरपुर निवासी हिमांशु सिंह के माता-पिता दोनों कोरोना पॉजिटिव हो गए थे, जिन्हें जिला अस्पताल से रेफर कर टांडा के कोविड सेंटर एल-2 में भर्ती किया गया। हिमांशु ने बताया कि उनके पिता का देहांत लगभग 5 दिन पहले हो गया। माता अभी भी भर्ती हैं।
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हिमांशु का कहना है कि इस सेंटर पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। मरीज के परिवारीजनों को मरीज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती है। इसके अलावा मरीज को कौन से दवा दी जा रही, ऑक्सीजन लेवल कैसा है, इसके बारे में भी कुछ नहीं बताया जाता है। आरोप है कि सेंटर के जिम्मेदार इस पांच मंजिला अस्पताल में चौथे मंजिल पर भर्ती मरीजों तक नहीं जाते हैं। मरीजों तक जाने वालों में केवल वार्ड ब्वाय व अन्य कर्मी ही प्राय: सारी देखभाल करते हैं।
बसखारी क्षेत्र की माधुरी चौबे पत्नी त्रिवेणी चौबे के सारे लक्षण कोरोना पॉजिटिव हैं। उन्हें जिला अस्पताल से रेफर करते हुए टांडा सीएचसी के महिला एवं बाल रोग शाखा भेज तो दिया गया, लेकिन सांस की तकलीफ होने के बाद भी काफी देर तक सेंटर का दरवाजा नहीं खोल गया। मरीज फर्श पर तड़पती रही। हालांकि बाद में पीपीई किट पहन कर दो वार्ड ब्वॉय आकर मरीज को स्ट्रेचर से अंदर ले गए। इस संबंध में प्रभारी डॉ. अतीक आलम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मौके पर 100 बेड की व्यवस्था ऑक्सीजन के साथ है। 40 बेड अलग से बढ़ाये जा रहे हैं। व्यवस्था करने में थोड़ी बहुत देर भले कभी हो जाए, लेकिन उपचार में कोई कमी नहीं रखी जा रही है।
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टांडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए गए अत्याधुनिक महिला एवं बाल कल्याण अस्पताल को प्रशासन ने कोविड-19 सेंटर बनाया है। यहां 100 कोरोना पीड़ित मरीजों के भर्ती होने का इंतजाम है। हालांकि भर्ती होने के बाद अंदर मरीजों की क्या तीमारदारी हो रही है, इसकी समुचित जानकारी परिवारीजनों तक को नहीं हो पा रही है।
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एक सप्ताह पूर्व पटेलनगर अकबरपुर निवासी हिमांशु सिंह के माता-पिता दोनों कोरोना पॉजिटिव हो गए थे, जिन्हें जिला अस्पताल से रेफर कर टांडा के कोविड सेंटर एल-2 में भर्ती किया गया। हिमांशु ने बताया कि उनके पिता का देहांत लगभग 5 दिन पहले हो गया। माता अभी भी भर्ती हैं।
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हिमांशु का कहना है कि इस सेंटर पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। मरीज के परिवारीजनों को मरीज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती है। इसके अलावा मरीज को कौन से दवा दी जा रही, ऑक्सीजन लेवल कैसा है, इसके बारे में भी कुछ नहीं बताया जाता है। आरोप है कि सेंटर के जिम्मेदार इस पांच मंजिला अस्पताल में चौथे मंजिल पर भर्ती मरीजों तक नहीं जाते हैं। मरीजों तक जाने वालों में केवल वार्ड ब्वाय व अन्य कर्मी ही प्राय: सारी देखभाल करते हैं।
बसखारी क्षेत्र की माधुरी चौबे पत्नी त्रिवेणी चौबे के सारे लक्षण कोरोना पॉजिटिव हैं। उन्हें जिला अस्पताल से रेफर करते हुए टांडा सीएचसी के महिला एवं बाल रोग शाखा भेज तो दिया गया, लेकिन सांस की तकलीफ होने के बाद भी काफी देर तक सेंटर का दरवाजा नहीं खोल गया। मरीज फर्श पर तड़पती रही। हालांकि बाद में पीपीई किट पहन कर दो वार्ड ब्वॉय आकर मरीज को स्ट्रेचर से अंदर ले गए। इस संबंध में प्रभारी डॉ. अतीक आलम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मौके पर 100 बेड की व्यवस्था ऑक्सीजन के साथ है। 40 बेड अलग से बढ़ाये जा रहे हैं। व्यवस्था करने में थोड़ी बहुत देर भले कभी हो जाए, लेकिन उपचार में कोई कमी नहीं रखी जा रही है।