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Ambedkarnagar: ...तो इस बार खाली रह जाएगा धान का कटोरा, उपज बढ़ाने का लक्ष्य था पर बारिश ने पानी फेरा
Thu, 15 Sep 2022 02:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
अश्विनी मिश्र, अमर उजाला, अंबेडकरनगर
अश्विनी मिश्र, अमर उजाला, अंबेडकरनगर
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Sep 2022 02:07 PM IST
सार
अंबेडकरनगर में इस बार सामान्य से कम बारिश होने का असर चावल उत्पादन पर दिखेगा। 31 प्रतिशत लक्ष्य की तुलना में उत्पादन 27 प्रतिशत पर सिमट सकता है।
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तेज हवा व बारिश के बीच खेत में गिरी धान की फसल।
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विस्तार
धान का कटोरा कहे जाने वाले अंबेडकरनगर जनपद में औसत से कम बारिश होने होने के चलते धान उत्पादन में वृद्धि की उम्मीदों को करारा झटका लगना तय माना जा रहा है। गत वर्ष प्रत्येक हेक्टेअर 27.48 क्विंतल चावल का उत्पादन हुआ था। इस बार इसे बढ़ाकर लगभग 31 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। हालांकि अब तक जिले में सामान्य की तुलना में 55 प्रतिशत बारिश होने से यही माना जा रहा है कि धान उत्पादन में गत वर्ष का ही आंकड़ा पूरा कर लिया जाए तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।
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अंबेडकरनगर जनपद को पूर्वांचल में धान के कटोरा वाले जिले के तौर पर पहचान मिली है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां लगभग सभी किसान बढ़ चढ़कर धान की खेती करते आ रहे हैं। बीते वर्षों में चीनी मिल लग जाने के बाद कुछ किसान जरूर गन्ने की खेती की तरफ बढ़े लेकिन अभी भी धान की खेती को लेकर मोहभंग नहीं हुआ है। धान की खेती में किसानों की रुचि तथा बेहतर पैदावार के चलते ही जिले में रिकॉर्ड 75 राइस मिले स्थापित हैं। धान के उत्पादन को लेकर किसानों के साथ ही राइस मिल मालिकों व आढ़तियों की भी तमाम उम्मीदें जुड़ी रहती हैं। हालांकि इस बार परिस्थितियां धान उत्पादन को लेकर ठीक नहीं है।
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ऐसा इसलिए क्योंकि सामान्य से काफी कम बारिश अब तक हुई है। जैसे-तैसे किसानों को पानी की उपलब्धता करना पड़ा, लेकिन तमाम क्षेत्रों में या तो विलंब हो गया या फिर पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। नतीजा यह है कि इस बार धान की पैदावार की बढ़ाने की जो कोशिशें थीं उन्हें गहरा धक्का लगा है। कुल एक लाख 16 हजार 236 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस बार धान की रोपाई हुई थी। सामान्य या उससे अधिक बारिश होने की उम्मीद सभी को थी। ऐसा हो नहीं पाया। इसके चलते गत वर्ष के सापेक्ष तीन प्रतिशत से अधिक उत्पादन की कोशिश पूरी होती नहीं दिख रही है।
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गत वर्ष प्रत्येक हेक्टेयर में धान उत्पादन के बाद 27.48 प्रतिशत चावल का उत्पादन हुआ था। सरकार की तरफ से इस बार उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 30.82 प्रतिशत कर दिया गया था। हालांकि अवर्षण की स्थिति ने इन उम्मीदों पर वज्रपात कर दिया है। अब अधिकारियों का भी मानना है कि गत वर्ष का ही उत्पादन मिल जाए तो यह कम बड़ी उपलब्धि नहीं होगी।
उन्नति बीजों से संभली स्थिति
जिले में इस बार कई निजी कंपनियों ने काफी उन्नति किस्म के धान बीजों का वितरण किया था। ऐसे तमाम बीज गत वर्ष नहीं थे। अब इस बार इन धान बीजों के चलते चावल का ज्यादा उत्पादन होने की संभावना है। कृषि विभाग के अधिकारी भी यह मान रहे कि कई कंपनियों की तरफ से बेहतर धान बीज का वितरण पूर्व में होने का लाभ आगामी उत्पादन पर दिखेगा। ऐसा न होता तो चावल उत्पादन में गत वर्ष का लक्ष्य भी पूरा हो पाना कठिन हो जाता।
अब तक हुई 55 फीसदी बारिश
जिले में अब तक सामान्य बारिश की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत ही बारिश हो पाई है। मंगलवार को 18 मिलीमीटर तो बुधवार को 20 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। जिले में बारिश अब तक 60 प्रतिशत नहीं हो पाई है। आपदा विभाग के पास दो दिन पहले का जो आंकड़ा उपलब्ध हुआ है। उसके अनुसार 52.04 प्रतिशत बारिश हुई है। यह सामान्य बारिश 747 मिलीमीटर के सापेक्ष 391 मिलीमीटर के करीब है।
गत वर्ष के बराबर रह सकता उत्पादन
उपकृषि निदेशक पीयूष राय कहते हैं कि जिले में धान की उपज के बाद चावल का उत्पादन गत वर्ष के बराबर रह सकता है। इस बार 30 प्रतिशत से अधिक उत्पादन का लक्ष्य था लेकिन बारिश के साथ न देने के कारण 27 प्रतिशत से कुछ अधिक उत्पादन होने की उम्मीद की जा रही है।