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सुहागिनों ने पुत्र की दीर्घायु की कामना के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:02 AM IST
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जहांगीरगंज के तमसा तट पर रविवार को सूर्य को अर्घ्य देती सुहागिन।
- फोटो : अमर उजाला
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‘कोपि-कोपि बोलेलीं छठि मइया सुना महादेव। मोरा घाटे दुबिया उपरजि गइले, मकड़ी बसेढ़ लेले’ व ‘रखियो हम छठ के बरतिया दीनानाथ होइहैं सहाय, रोवै सुगा के सुगनिया सुगा काहे मारल जाय...’ आदि छठ गीतों से रविवार को जिले के नदी तट गूंज उठे। छठ पर्व के तीसरे दिन महिलाओं ने व्रत रखकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
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साथ ही पुत्र की दीर्घायु की कामना की। सोमवार सुबह उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करेंगी। गौरतलब है कि शुक्रवार से छठ पर्व की शुरुआत हुई थी। पहले दिन महिलाओं ने जहां नहाय-खाय परंपरा का निर्वहन किया था वहीं शनिवार को खरना की रस्म अदायगी विधि-विधान से हुई। महिलाओं ने शुक्रवार शाम लौकी की सब्जी व रोटी ग्रहण किया तो शनिवार शाम गुड़ की बनी खीर खाई गई।
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इस बीच छठ पर्व के मुख्य दिन रविवार को महिलाओं ने सुबह से ही व्रत रखा। शाम चार बजे के बाद से ही महिलाएं पूजा गीत गाते हुए नदी व पोखरों की तरफ जाने लगीं। पुरुष आगे-आगे पूजन सामग्री लेकर चल रहे थे। अकबरपुर नगर में तमसा तट पर विशेष आयोजन हुआ। पुरानी तहसील तिराहे के निकट महिलाओं ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। महिलाओं ने विशेष शृंगार कर रखा था।
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नदी तट पर सामूहिक रूप से विशेष पूजा-अर्चना तथा गीत-संगीत में भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। अकबरपुर नगर के ही शिवालय घाट स्थित तमसा नदी के तट पर महिलाओं ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। टांडा प्रतिनिधि के अनुसार सरयू तट पर महिलाओं का भारी समूह छठ पूजा के लिए जुटा।
महिलाओं ने यहां भी डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की। आलापुर प्रतिनिधि के अनुसार बावलिया घाट पर महिलाओं की भीड़ बाउली पोखरे के निकट एकत्र हुई। गन्ने की बेड़ी लगाकर यहां महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु व तरक्की के लिए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के आयोजन हुए। महिलाएं सोमवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन करेंगी।