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बने भवन न हुई शिक्षकों की तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Fri, 19 Jun 2015 10:55 PM IST
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अप्रैल माह से ही इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रारंभ होना था। इसी प्रकार 16 उच्चीकृत विद्यालयों में शिक्षण कार्य तो चल रहा है, लेकिन इनमें मात्र 15 शिक्षकों की ही तैनाती की जा सकी है। 97 पद अब तक रिक्त चल रहे हैं। जो शिक्षक हैं भी उन्हें चार माह से वेतन नहीं मिल सका है।
मालूम हो कि ग्रामीण क्षेत्रों में छात्र छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में 16 जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों को उच्चीकृत किया गया था। इनमें वर्ष 2009-10 में दो, वर्ष 2010-11 में चार व 2011-12 में दस उच्चीकृत किए गए विद्यालय शामिल हैं।
इनमें कत्र निर्माण के लिए 51 लाख 98 हजार रुपये की धनराशि भी कार्यदायी संस्थाओं को उपलब्ध करा दी गई। इसके बाद भी अब तक मात्र दो विद्यालयों पहितीपुर व बसियां का ही निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है। कहरा सुलेमपुर व फरीदपुर कुतुब में विवाद के चलते कार्य ठप है। जूनियर हाईस्कूल भवन में ही शिक्षण कार्य हो रहा है।
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इन 16 विद्यालयों में सुचारु शिक्षण कार्य के लिए 112 अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र 15 पर ही तैनाती की जा सकी है। 97 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा 16 प्रधानाचार्यों के पद के सापेक्ष मात्र चार पर ही तैनाती की जा सकी है। 12 रिक्त चल रहे हैं। और तो और जो 15 अध्यापक शिक्षण कार्य में लगे हैं, उन्हें विगत 4 माह से वेतन ही नहीं मिल सका है।
इसके अलावा जिले के पहितीपुर, जाफरगंज, रामनगर व इधना में माडल स्कूल निर्माण की स्वीकृति शासन ने प्रदान की थी। दो करोड़ 75 लाख की लागत से बनने वाले तीन विद्यालय भवन के निर्माण की जिम्मेदारी पैक्सफेड व इधना माडल स्कूल की जिम्मेदारी सी एण्ड डीएस को दी गई।
भवन निर्माण में लापरवाही का आलम यह कि अब तक एक का भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है, जबकि इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य विगत अप्रैल माह से ही प्रारंभ होना था। इन विद्यालयों में सुचारु शिक्षण कार्य के लिए विगत मार्च माह में ही शासन ने 4 प्रधानाध्यापक, 28 सहायक अध्यापक, 16 चतुर्थ श्रेणी व 8 वरिष्ठ एवं कनिष्ठ लिपिक के पद स्वीकृति प्रदान की थी, लेकिन तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। इसके चलते इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
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मालूम हो कि ग्रामीण क्षेत्रों में छात्र छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में 16 जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों को उच्चीकृत किया गया था। इनमें वर्ष 2009-10 में दो, वर्ष 2010-11 में चार व 2011-12 में दस उच्चीकृत किए गए विद्यालय शामिल हैं।
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इनमें कत्र निर्माण के लिए 51 लाख 98 हजार रुपये की धनराशि भी कार्यदायी संस्थाओं को उपलब्ध करा दी गई। इसके बाद भी अब तक मात्र दो विद्यालयों पहितीपुर व बसियां का ही निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है। कहरा सुलेमपुर व फरीदपुर कुतुब में विवाद के चलते कार्य ठप है। जूनियर हाईस्कूल भवन में ही शिक्षण कार्य हो रहा है।
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इन 16 विद्यालयों में सुचारु शिक्षण कार्य के लिए 112 अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र 15 पर ही तैनाती की जा सकी है। 97 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा 16 प्रधानाचार्यों के पद के सापेक्ष मात्र चार पर ही तैनाती की जा सकी है। 12 रिक्त चल रहे हैं। और तो और जो 15 अध्यापक शिक्षण कार्य में लगे हैं, उन्हें विगत 4 माह से वेतन ही नहीं मिल सका है।
इसके अलावा जिले के पहितीपुर, जाफरगंज, रामनगर व इधना में माडल स्कूल निर्माण की स्वीकृति शासन ने प्रदान की थी। दो करोड़ 75 लाख की लागत से बनने वाले तीन विद्यालय भवन के निर्माण की जिम्मेदारी पैक्सफेड व इधना माडल स्कूल की जिम्मेदारी सी एण्ड डीएस को दी गई।
भवन निर्माण में लापरवाही का आलम यह कि अब तक एक का भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है, जबकि इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य विगत अप्रैल माह से ही प्रारंभ होना था। इन विद्यालयों में सुचारु शिक्षण कार्य के लिए विगत मार्च माह में ही शासन ने 4 प्रधानाध्यापक, 28 सहायक अध्यापक, 16 चतुर्थ श्रेणी व 8 वरिष्ठ एवं कनिष्ठ लिपिक के पद स्वीकृति प्रदान की थी, लेकिन तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। इसके चलते इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।