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नवरात्र के मौके पर मुहूर्त में कलश स्थापना का है विशेष महत्व

Fri, 16 Oct 2020 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2020 10:48 PM IST
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Navratra
आलापुर। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 17 अक्तूबर से हो रहा है। नवरात्र में विधिविधान से शुभ मुहूर्त में पूजन अर्चन करने का विशेष महत्व और लाभ है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 10 बजकर 16 मिनट तक है। अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक है। पूरे दिन श्रद्धालु माता के अलग-अलग नौ रूपों की आराधना करेंगे। घरों से लेकर मंदिरों तक नवरात्र की तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। पहले दिन शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रख कर मां की आराधना करेंगे।
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नवरात्र व्रत के बारे में विस्तृत जानकारी आचार्य आशुतोष शुक्ल ने दी।
बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 10 बजकर 16 मिनट तक है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 35 तक है। इस वर्ष 18 सितंबर से 16 अक्तूबर तक एक माह का अधिमास होने के कारण नवरात्र अक्तूबर माह में पड़ रहा है। इसका शुभारंभ 17 अक्तूबर शनिवार से हो रहा है। नौ दिवसीय नवरात्र में श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की आराधना करेंगे। पहले दिन प्रतिपदा घट स्थापना को शैलपुत्री, 18 को चंद्रघंटा, 19 को ब्रह्मचारिणी, 20 को कूष्मांडा, 21 को स्कंदमाता, 22 को कात्यायनी, 23 को कालरात्रि, 24 को महागौरी व 25 अक्तूबर को सिद्धिदात्री की उपासना होगी। इसी दिन नौ दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालु हवन करेंगे। 26 अक्तूबर को विजयदशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन होगा और श्रद्धालु अन्न ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगे।
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आचार्य आशुतोष ने घट स्थापना की विधि एवं महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश की स्थापना की जाती है। इसमें सृष्टि की समस्त शक्तियों के निवास के लिए आह्वान किया जाता है। धर्मशास्त्रों में कलश को सुख समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश के मुख्य में श्री विष्णु, कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह का प्रवास होता है। मध्य में देवी मातृ शक्तियों के साथ रहती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन अखंड ज्योति जलायी जाती है, जो पूरे नौ दिन तक जलती है। दीपक के नीचे चावल रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, और सप्तधान्य रखने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। नवरात्र व्रत की तैयारियां घरों से लेकर मंदिरों तक में पूरी कर ली गई। साफ सफाई के साथ ही देवी मंदिरों को सजा दिया गया है।
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