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Ambedkar Nagar News: एमआरआई सेवा ठप, मरीजों को लगानी पड़ रही है शहरों की दौड़
Wed, 14 May 2025 10:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 14 May 2025 10:49 PM IST
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में बंद पड़ा एमआरआई कक्ष।
अंबेडकरनगर। महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज सदरपुर में गत तीन माह से एमआरआई जांच सेवा पूरी तरह ठप है। अस्पताल आने वाले गंभीर रोगियों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में स्थापित एमआरआई मशीन तकनीकी खराबी के चलते गत तीन माह से बंद पड़ी है। इस दौरान कई बार मशीन की मरम्मत कराने की कवायद की गई, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। एमआरआई सेवा ठप होने से न्यूरो, आर्थो व मेडिसिन विभाग में उपचाराधीन मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के परिजन बताते हैं कि उन्हें यहां जांच के लिए आश्वासन तो मिलता है, लेकिन मशीन चालू न होने से अंत में निजी केंद्रों की राह पकड़नी पड़ती है। निजी लैबों में एमआरआई जांच की दरें काफी अधिक हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए यह सुविधा पहुंच से बाहर होती जा रही है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से बताया गया कि मशीन के पार्ट्स मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मरम्मत पूरी कर एमआरआई सेवा बहाल कर दी जाएगी। हालांकि यह प्रक्रिया बीते दो माह से चल रही है, लेकिन अब तक नतीजा नहीं निकल सका है।
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60 से 70 मरीजों को लिखी जाती है एमआरआई
सप्ताह में न्यूनतम 60 से 70 मरीजों को एमआरआई जांच की जरूरत होती है, लेकिन सेवा बंद होने से मरीजों की संख्या या तो घट रही है या वे अन्यत्र जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी व रेडियोलॉजी नोडल डॉ विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि रेडियोलाॅजिस्ट के न होने से यह समस्या है, लेकिन सीनियर रेजीडेंट के होने पर बराबर चलाई जाती है। रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती के लिए लगातार अधिकारियों से पत्राचार किया है जा रहा है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में स्थापित एमआरआई मशीन तकनीकी खराबी के चलते गत तीन माह से बंद पड़ी है। इस दौरान कई बार मशीन की मरम्मत कराने की कवायद की गई, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। एमआरआई सेवा ठप होने से न्यूरो, आर्थो व मेडिसिन विभाग में उपचाराधीन मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के परिजन बताते हैं कि उन्हें यहां जांच के लिए आश्वासन तो मिलता है, लेकिन मशीन चालू न होने से अंत में निजी केंद्रों की राह पकड़नी पड़ती है। निजी लैबों में एमआरआई जांच की दरें काफी अधिक हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए यह सुविधा पहुंच से बाहर होती जा रही है।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से बताया गया कि मशीन के पार्ट्स मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मरम्मत पूरी कर एमआरआई सेवा बहाल कर दी जाएगी। हालांकि यह प्रक्रिया बीते दो माह से चल रही है, लेकिन अब तक नतीजा नहीं निकल सका है।
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60 से 70 मरीजों को लिखी जाती है एमआरआई
सप्ताह में न्यूनतम 60 से 70 मरीजों को एमआरआई जांच की जरूरत होती है, लेकिन सेवा बंद होने से मरीजों की संख्या या तो घट रही है या वे अन्यत्र जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी व रेडियोलॉजी नोडल डॉ विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि रेडियोलाॅजिस्ट के न होने से यह समस्या है, लेकिन सीनियर रेजीडेंट के होने पर बराबर चलाई जाती है। रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती के लिए लगातार अधिकारियों से पत्राचार किया है जा रहा है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।