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मेधावी फेल, प्रयोगात्मक परीक्षा में कमजोरों पर बरसे अंक

Thu, 31 Mar 2022 10:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Mar 2022 10:54 PM IST
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Meritorious fail, marks rained on weak in practical examination
अंबेडकरनगर। महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस थर्ड प्रोफेशनल के 18 छात्रों को जान बूझकर प्रैक्टिकल में फेल कर देने का गंभीर मामला सामने आया है। अभिभावकों और छात्रों ने इसकी शिकायत आला अधिकारियों के साथ ही मीडिया को भेजे पत्र में की है। इसमें परीक्षा के दौरान महाविद्यालय प्रशासन पर मनमानी बरतने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि प्रयोगात्मक परीक्षा के दौरान मेधावी विद्यार्थी तो फेल हो गए जबकि पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को खूब अंक मिले। इसके चलते ही लिखित परीक्षा में बमुश्किल पास हो पाने वाले छात्रों को प्रयोगात्मक परीक्षा में काफी अच्छे नंबर दे दिए गए। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की गयी है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे कई छात्र-छात्राओं ने परीक्षा के दौरान दोहरा मापदंड अपनाने व मनमानी बरतने का आरोप लगाया है। इसके चलते ही एमबीबीएस थर्ड प्रोफेशनल पार्ट टू की प्रयोगात्मक परीक्षा में कई छात्रों को जानबूझकर फेल कर दिया गया। नाम उजागर न करते हुए मेडिकल छात्रों ने बताया कि थर्ड प्रोफेशनल के पार्ट टू की प्रयोगात्मक परीक्षा में कुल 76 छात्र छात्राओं में से 18 को फेल कर दिया गया। आरोप है कि इन सभी को जानबूझकर फेल किया गया जबकि इनमें से कई मेधावियों ने लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर अच्छे अंक हासिल किए थे। विद्यार्थियों का कहना है कि यह पूरा खेल मेडिकल कालेज के ही एक विभागाध्यक्ष के इशारे पर हुआ है। उनके दबाव के चलते ही प्रयोगात्मक परीक्षा में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
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बताया गया कि लिखित परीक्षा के दौरान जो छात्र किसी तरह ग्रेस अंक देकर पास हुए थे, उन्हें आश्चर्यजनक ढंग से प्रयोगात्मक परीक्षा में काफी अच्छे अंक दे दिए गए। सभी ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है ताकि मेधावियों के साथ न्याय हो सके।
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नहीं मिली है कोई शिकायत
छात्रों या उनके अभिभावकों की तरफ से प्रयोगात्मक परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई शिकायत नहीं मिली है। प्रयोगात्मक परीक्षा में 3 आंतरिक और 3 बाहरी परीक्षक शामिल होते हैं। इस दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी करना संभावना नहीं है। यदि फिर भी कोई समस्या है तो बच्चों या अभिभावकों को मुझे बताना चाहिए। जरूरत हुई तो पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई होगी।
डॉक्टर संदीप कौशिक, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर
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