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बिना पानी सूख रही मेंथा की फसल
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जमुनीपुर। क्षेत्र से होकर गुजरने वाली शारदा सहायक नहर में पानी न छोड़े जाने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नहर में पानी न होने से मेंथा, चरी व सब्जी आदि की फसलों को पानी नहीं मिल पा रहा। परेशान किसानों का कहना है कि पूर्व में गर्मी के मौसम में नहर में समय समय पर पानी छोड़ा जाता था, जिससे किसानों को सिंचाई में काफी हद तक राहत मिलती थी। अब पानी के अभाव में उन्हें महंगे दाम पर डीजल खरीद कर खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही।
अकबरपुर विकासखंड क्षेत्र अन्तर्गत जमुनीपुर, रसूलपुर, सैदापुर, तिघरा, शुक्लहिया, रम्मनपुर, चंदनपारा, कैथोलिया, जगदीशपुर व हरीपुर समेत अन्य दर्जनों गांव के किसानों के लिए क्षेत्र से होकर गुजरी शारदा सहायक नहर सिंचाई का मुख्य साधन हैै। समस्या की बात यह है कि मौजूदा समय में नहर में पानी न होने से क्षेत्र के तमाम किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल मौजूदा समय में तमाम किसानों ने खेतों में मेंथा लगा रखा है, जिससे नियमित सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन नहर में पानी न होने से कई किसानों की फसलें या तो सूख रहीं या फिर उन्हें महंगे दाम पर डीजल खरीद कर सिंचाई करना पड़ रहा है।
इसके अलावा चरी व सब्जी की भी फसल पानी के अभाव में सूख रही। किसानों के अनुसार एक माह पहले नहर से पानी चल गया, तब से दोबारा पानी छोड़ने की सुध महसूस नहीं की गई। किसान ललित, कमला प्रसाद, बालमुकुन्द, रोहित, राजितराम, अमित व संतकुमार आदि का कहना है कि नहर में पानी न छोड़े जाने से काफी मुश्किल हो रही है।
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अकबरपुर विकासखंड क्षेत्र अन्तर्गत जमुनीपुर, रसूलपुर, सैदापुर, तिघरा, शुक्लहिया, रम्मनपुर, चंदनपारा, कैथोलिया, जगदीशपुर व हरीपुर समेत अन्य दर्जनों गांव के किसानों के लिए क्षेत्र से होकर गुजरी शारदा सहायक नहर सिंचाई का मुख्य साधन हैै। समस्या की बात यह है कि मौजूदा समय में नहर में पानी न होने से क्षेत्र के तमाम किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल मौजूदा समय में तमाम किसानों ने खेतों में मेंथा लगा रखा है, जिससे नियमित सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन नहर में पानी न होने से कई किसानों की फसलें या तो सूख रहीं या फिर उन्हें महंगे दाम पर डीजल खरीद कर सिंचाई करना पड़ रहा है।
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इसके अलावा चरी व सब्जी की भी फसल पानी के अभाव में सूख रही। किसानों के अनुसार एक माह पहले नहर से पानी चल गया, तब से दोबारा पानी छोड़ने की सुध महसूस नहीं की गई। किसान ललित, कमला प्रसाद, बालमुकुन्द, रोहित, राजितराम, अमित व संतकुमार आदि का कहना है कि नहर में पानी न छोड़े जाने से काफी मुश्किल हो रही है।
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