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मानदेय भुगतान को लेकर बुलंद की आवाज
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अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट पर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी सहायता सखी।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। तीन वर्ष से बकाया मानदेय भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को टांडा विकास खंड की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना से जुड़ीं स्वयं सहायता सखी ने कलेक्ट्रेट के निकट धरना देकर आवाज बुलंद की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी तैनाती तीन वर्ष पूर्व ग्राम पंचायतों में देखरेख के लिए की गई थी। एक हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय भी मिलना था, लेकिन तीन वर्ष से वह नहीं मिल सका है। न सिर्फ अविलंब मानदेय का भुगतान किया जाए, बल्कि एक हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये किया जाए। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ, तो कलेक्ट्रेट के निकट बेमियादी धरना दिया जाएगा।
टांडा विकास खंड की स्वयं सहायता सखी शुक्रवार को दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। यहां प्रदर्शन करते हुए सावित्री, गिरिजा, बीनू, अनीता, गायत्री, संगीता, मंजू, पुनीता, दुर्गावती, शशिबाला, वंदना, जया वर्मा, निशा आदि ने कहा कि लगभग तीन वर्ष पूर्व ग्राम पंचायतों में स्वयं समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की देखरेख के लिए उनकी तैनाती की गई थी। इसके लिए प्रति माह एक हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाना सुनिश्चित किया गया था। वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी के साथ कर रही हैं, लेकिन बीते तीन वर्ष से अब तक मानदेय नहीं मिल सका है। इसके लिए कई बार जिम्मेदारों से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया ।
वक्ताओं ने कहा कि सखी मेट के पद पर भी वरीयता के आधार पर स्वयं सहायता सखी की तैनाती की गई थी। अब इस पद को ही समाप्त किया जा रहा है। ऐसा होने से सखी मेट के समक्ष मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। मांग करते हुए कहा गया कि न सिर्फ तीन वर्ष का बकाया मानदेय भुगतान किया जाए, बल्कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये की जाए। इसके अलावा सीख मेट को पद को समाप्त न किया जाए।
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टांडा विकास खंड की स्वयं सहायता सखी शुक्रवार को दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। यहां प्रदर्शन करते हुए सावित्री, गिरिजा, बीनू, अनीता, गायत्री, संगीता, मंजू, पुनीता, दुर्गावती, शशिबाला, वंदना, जया वर्मा, निशा आदि ने कहा कि लगभग तीन वर्ष पूर्व ग्राम पंचायतों में स्वयं समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की देखरेख के लिए उनकी तैनाती की गई थी। इसके लिए प्रति माह एक हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाना सुनिश्चित किया गया था। वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी के साथ कर रही हैं, लेकिन बीते तीन वर्ष से अब तक मानदेय नहीं मिल सका है। इसके लिए कई बार जिम्मेदारों से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया ।
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वक्ताओं ने कहा कि सखी मेट के पद पर भी वरीयता के आधार पर स्वयं सहायता सखी की तैनाती की गई थी। अब इस पद को ही समाप्त किया जा रहा है। ऐसा होने से सखी मेट के समक्ष मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। मांग करते हुए कहा गया कि न सिर्फ तीन वर्ष का बकाया मानदेय भुगतान किया जाए, बल्कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये की जाए। इसके अलावा सीख मेट को पद को समाप्त न किया जाए।
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