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यहां पर्यटक स्थलों को है बड़े पैकेज की दरकार

Fri, 05 Feb 2016 11:33 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 05 Feb 2016 11:33 PM IST
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large package needs to ambedkarnagar

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न धार्मिक  एवं अन्य विशेष प्रकार के स्थलों को पर्यटनस्थल घोषित किया गया था। योजना के तहत जिले के पवित्र शिवबाबा, श्रवणक्षेक्ष धाम, शिवालय घाट, गोविंदसाहब व विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह को पर्यटकस्थल घोषित किया जा चुका है।

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इन स्थलों को लगभग एक दशक पूर्व पर्यटकस्थल घोषित किया गया, लेकिन अब तक इन स्थलों के विकास व सौंदर्यीकरण की सुध नहीं ली जा सकी है। उपेक्षा के शिकार इन धार्मिकस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें आमतौर पर पेयजल, प्रकाश व आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
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अकबरपुर तहसील अन्तर्गत पवित्र श्रवणक्षेत्र धाम में वर्ष में दो बार मेला लगता है। आस्था के केंद्र धार्मिकस्थल की उपेक्षा का आलम यह है कि चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। पवित्र घाट की लंबे समय से साफ सफाई नहीं की गई है। आवागमन की समस्या भी लगातार बनी हुई है।
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कुछ ऐसा ही हाल जिला मुख्यालय के शहजादपुर स्थित पवित्र शिवालय का भी है। देखरेख के अभाव एवं उपेक्षा के चलते घाट पूरी तरह सूख चुका है। न तो पेयजल की समुचित व्यवस्था है और न ही प्रकाश की। ऐसा तब है, जब यहां लगभग प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन अर्चन के लिए पहुंचते हैं।

पवित्र गोविंदसाहब भी पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है। वर्ष में एक बार यहां एक माह तक मेले का आयोजन होता है। न सिर्फ अंबेडकरनगर, बल्कि इर्दगिर्द के अन्य जनपद से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्थित सरोवर में स्नान करते हैं और मठ पर पहुंचकर माथा टेकते हैं।

इसके बाद भी उपेक्षा का आलम यह कि न तो समुचित साफ सफाई की व्यवस्था है और न ही पेयजल व प्रकाश की। विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह का भी कुछ ऐसा ही हाल है। बीते दिनों शासन ने यहां 24 घंटे विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराए जाने की घोषणा की थी, लेकिन उसे जमीनी हकीकत देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया। यहां होने वाले सालाना उर्स में देश विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन माथा टेकने पहुंचते हैं।


शिवबाबा धाम को भी पर्यटक स्थल तो घोषित किया गया, लेकिन चहारदीवारी बनवाए जाने के सिवा यहां और कोई सुविधा नहीं दी जा सकी। प्रत्येक शुक्रवार व सोमवार को यहां श्रद्धालुओं का बड़ा मेला लगता है। हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जिन्हें विभिन्न प्रकार की अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ता है।

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