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Ambedkar Nagar News: जाली नोट के मामले में 17 साल बाद आरोपी बरी
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अंबेडकरनगर। बसखारी इलाके के नकली नोट के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामविलास सिंह 17 वर्ष चचली सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए आरोपी अवधेश कुमार वर्मा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। मामला वर्ष 2006 का है, जिसमें पुलिस ने आरोपी को 50-50 रुपये के जाली नोटों के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया था।
अभियोजन के अनुसार 3 मई 2006 को थाना बसखारी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सरदार नगर तिराहे पर दो व्यक्ति जाली नोट लेकर बाजार में चलाने की फिराक में हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर अवधेश कुमार वर्मा और एक अन्य व्यक्ति को पकड़ लिया था। तलाशी के दौरान अवधेश के पास से 50 रुपये के 19 कथित जाली नोट बरामद होने की बात कही गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस कर्मियों को गवाह के रूप में पेश किया, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए फर्जी बरामदगी का दावा किया। बचाव पक्ष के गवाह ने यह भी कहा कि आरोपी को घटनास्थल से नहीं बल्कि एक दिन पहले अन्य स्थान से गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि किसी स्वतंत्र गवाह को पेश नहीं किया गया। बरामदगी की प्रक्रिया में कई विरोधाभास हैं। पुलिस गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण असंगतियां हैं। जांच में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
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अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। इसी आधार पर आरोपी अवधेश कुमार वर्मा को आरोपों से बरी कर दिया गया।
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अभियोजन के अनुसार 3 मई 2006 को थाना बसखारी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सरदार नगर तिराहे पर दो व्यक्ति जाली नोट लेकर बाजार में चलाने की फिराक में हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर अवधेश कुमार वर्मा और एक अन्य व्यक्ति को पकड़ लिया था। तलाशी के दौरान अवधेश के पास से 50 रुपये के 19 कथित जाली नोट बरामद होने की बात कही गई थी।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस कर्मियों को गवाह के रूप में पेश किया, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए फर्जी बरामदगी का दावा किया। बचाव पक्ष के गवाह ने यह भी कहा कि आरोपी को घटनास्थल से नहीं बल्कि एक दिन पहले अन्य स्थान से गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि किसी स्वतंत्र गवाह को पेश नहीं किया गया। बरामदगी की प्रक्रिया में कई विरोधाभास हैं। पुलिस गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण असंगतियां हैं। जांच में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
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अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। इसी आधार पर आरोपी अवधेश कुमार वर्मा को आरोपों से बरी कर दिया गया।