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पांच वर्ष में भी पूरा नहीं हो सका जिला जेल का निर्माण
अंबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2015 10:46 PM IST
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कभी धनाभाव, तो कभी निर्माण में लापरवाही के चलते निर्माण अभी भी सुस्त रफ्तारी का शिकार है। निर्माण कार्य में भी अक्सर मानक की अनदेखी किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रहीं। लगभग एक वर्ष पूर्व गैरेज की छत के निर्माण के दौरान बिम लटक गई थी।
गौरतलब है कि जनपद का गठन 29 सितंबर 1995 को हुआ था। समय के साथ ही यहां अन्य कार्यालय व जनपद न्यायालय की स्थापना हुई। विभिन्न मामलों में यहां के केस में विचाराधीन बंदियों या फिर कैदियों को अभी भी फैजाबाद जेल में ही रखना पड़ रहा है।
फैजाबाद से प्रतिदिन पेशी पर बंदियों को अंबेडकरनगर तक लाने ले जाने में आर्थिक व्यय के साथ ही सुरक्षा का भी संकट बना रहता है। इन्हीं सबके मद्देनजर बीते दिनों मालीपुर रोड स्थित मरैलामिल के निष्प्रयोज्य पड़े परिसर में जेल निर्माण का निर्णय लिया गया। लगभग पांच वर्ष पूर्व यहां जेल का निर्माण शुरू हुआ और इसकी जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई।
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इसका निर्माण डेढ़ वर्ष पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। लगभग 101 करोड़ की लागत वाले जिला जेल का निर्माण न सिर्फ सुस्त रफ्तारी का शिकार है, वरन मानकों की अनदेखी भी हो रही है। अमर उजाला ने पूर्व में मानक का मामला उठाया था, तो इसे गंभीरता से लिया गया था।
इन सबके बाद भी अभी तक निर्माण पूरा कराने को लेकर तेजी नहीं आ पाई है। सुस्त रफ्तारी से ही वहां काम चल रहा है। अभियंता सतीशचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि निर्माण पूरा हो गया है। सिर्फ फिनिशिंग का काम बाकी है। उसे भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
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गौरतलब है कि जनपद का गठन 29 सितंबर 1995 को हुआ था। समय के साथ ही यहां अन्य कार्यालय व जनपद न्यायालय की स्थापना हुई। विभिन्न मामलों में यहां के केस में विचाराधीन बंदियों या फिर कैदियों को अभी भी फैजाबाद जेल में ही रखना पड़ रहा है।
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फैजाबाद से प्रतिदिन पेशी पर बंदियों को अंबेडकरनगर तक लाने ले जाने में आर्थिक व्यय के साथ ही सुरक्षा का भी संकट बना रहता है। इन्हीं सबके मद्देनजर बीते दिनों मालीपुर रोड स्थित मरैलामिल के निष्प्रयोज्य पड़े परिसर में जेल निर्माण का निर्णय लिया गया। लगभग पांच वर्ष पूर्व यहां जेल का निर्माण शुरू हुआ और इसकी जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई।
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इसका निर्माण डेढ़ वर्ष पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। लगभग 101 करोड़ की लागत वाले जिला जेल का निर्माण न सिर्फ सुस्त रफ्तारी का शिकार है, वरन मानकों की अनदेखी भी हो रही है। अमर उजाला ने पूर्व में मानक का मामला उठाया था, तो इसे गंभीरता से लिया गया था।
इन सबके बाद भी अभी तक निर्माण पूरा कराने को लेकर तेजी नहीं आ पाई है। सुस्त रफ्तारी से ही वहां काम चल रहा है। अभियंता सतीशचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि निर्माण पूरा हो गया है। सिर्फ फिनिशिंग का काम बाकी है। उसे भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।