{"_id":"646d00657c464afc84068b9d","slug":"husband-sentenced-to-six-years-for-abetting-suicide-ambedkar-nagar-news-c-13-1-251850-2023-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: आत्महत्या के लिए उकसाने में पति को छह वर्ष की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: आत्महत्या के लिए उकसाने में पति को छह वर्ष की सजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबेडकरनगर। आत्महत्या के लिए विवाहिता को उकसाने में पति को अपर जनपद न्यायाधीश चतुर्थ अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने छह वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उस पर अलग-अलग धाराओं में 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
बेवाना थाना क्षेत्र के अहेथा निवासी रामलौट गुप्त ने तीन वर्ष पहले अकबरपुर कोतवाली में दर्ज कराए केस में कहा था कि उसने अपनी पुत्री रागिनी की शादी सात मार्च 2018 को कोड़रा निवासी चंद्रभान के पुत्र शशिकांत से की थी। विवाह के कुछ दिनों के बाद से ही ढाई लाख रुपये दहेज की मांग को लेकर उत्पीड़न किया जाने लगा। उसकी पुत्री गर्भवती हो गई तो भी उत्पीड़न जारी रहा। तहरीर में कहा गया कि 12 दिसंबर 2019 को ससुरालीजनों ने उसकी पुत्री को जहर देकर मार डाला।
पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए। इस बीच यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। सहायक अधिवक्ता फौजदारी दिलीप कुमार सिंह तथा वरिष्ठ अधिवक्ता नरसिंह नारायण सिंह ने मजबूती से कोर्ट के समक्ष साक्ष्य व तर्क रखे। पूरी परिस्थितियों पर गौर करते हुए अपर जनपद न्यायाधीश अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने पति को हत्या, गैर इरादतन हत्या तथा धमकी आदि की धाराओं से दोष मुक्त कर दिया लेकिन आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया।
विज्ञापन
एडीजे ने इस पर पति को छह वर्ष के सश्रम कारावास एवं दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। दहेज अधिनियम की दो अलग-अलग धाराओं में उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। आदेश में कहा गया कि अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
विज्ञापन
बेवाना थाना क्षेत्र के अहेथा निवासी रामलौट गुप्त ने तीन वर्ष पहले अकबरपुर कोतवाली में दर्ज कराए केस में कहा था कि उसने अपनी पुत्री रागिनी की शादी सात मार्च 2018 को कोड़रा निवासी चंद्रभान के पुत्र शशिकांत से की थी। विवाह के कुछ दिनों के बाद से ही ढाई लाख रुपये दहेज की मांग को लेकर उत्पीड़न किया जाने लगा। उसकी पुत्री गर्भवती हो गई तो भी उत्पीड़न जारी रहा। तहरीर में कहा गया कि 12 दिसंबर 2019 को ससुरालीजनों ने उसकी पुत्री को जहर देकर मार डाला।
विज्ञापन
पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए। इस बीच यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। सहायक अधिवक्ता फौजदारी दिलीप कुमार सिंह तथा वरिष्ठ अधिवक्ता नरसिंह नारायण सिंह ने मजबूती से कोर्ट के समक्ष साक्ष्य व तर्क रखे। पूरी परिस्थितियों पर गौर करते हुए अपर जनपद न्यायाधीश अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने पति को हत्या, गैर इरादतन हत्या तथा धमकी आदि की धाराओं से दोष मुक्त कर दिया लेकिन आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया।
विज्ञापन
एडीजे ने इस पर पति को छह वर्ष के सश्रम कारावास एवं दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। दहेज अधिनियम की दो अलग-अलग धाराओं में उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। आदेश में कहा गया कि अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।