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हरिओम ने खत्म किया बीजेपी की जीत का सूखा
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अंबेडकरनगर। विधान परिषद चुनाव में पूर्व सांसद हरिओम पांडेय की जीत ने जिले में पिछले कई चुनाव से भाजपा की जीत के सूखे को खत्म कर दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद जलालपुर विधानसभा चुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था। उम्मीद थी कि इसके बाद विधानसभा के चुनाव में 2017 के प्रदर्शन को दोहराने या उससे बेहतर करने की सफलता मिल जाएगी। हालांकि सभी पांच सीटों पर बीजेपी को अप्रत्याशित रूप से पराजय का सामना करना पड़ा था। इससे भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं में मायूसी का माहौल था। इन सबके बीच सपा के कब्जे वाली एमएलसी सीट पर हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर हरिओम पांडेय की जीत ने जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार किया है। इस जीत से आम नागरिकों को भी तमाम उम्मीदें हैं। कारण यह कि सत्तादल के जनप्रतिनिधि के तौर पर हरिओम की आवाज शासन सत्ता के गलियारे में ज्यादा प्रभावी ढंग से सुनाई पड़ेगी, जिसका फायदा आने वाले दिनों में जिले के विकास के तौर पर सामने आ सकता है।
बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी पराजय के बाद एमएलसी चुनाव पार्टी के लिए बड़ी राहत लेकर आया। विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए बड़ा सबक साबित हुआ था। बहुुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाने वाली भाजपा को अंबेडकरनगर की सभी पांच विधानसभा सीटों पर पराजय का सामना करना पड़ा था। चार सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी सीधे तौर पर उतरे थे, जबकि एक सीट पर भाजपा व निषाद पार्टी के गठबंधन ने प्रत्याशी उतारा था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को टांडा व आलापुर विधानसभा सीट पर जीत मिली थी।
कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि इस विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को कम से कम दो सीट जरूर हासिल हो जाएंगी या फिर अधिकतम तीन सीट तक जीत दर्ज हो सकती है। कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत लगाई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के तमाम दौरे भी हुए। हालांकि नतीजा घोषित हुआ, तो पार्टी कार्यकर्ता से लेकर नेता तक सन्न रह गए। सभी पांच सीटों पर भाजपा व गठबंधन दल की करारी पराजय हुई थी। भाजपा कार्यकर्ताओं को झटका इसलिए भी लगा था क्योंकि इससे पहले जलालपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था। दरअसल 2017 के चुनाव में जलालपुर सीट पर बसपा प्रत्याशी रितेश पांडेय की जीत हुई थी। उनके त्यागपत्र के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि यह सीट कब्जे में कर ली जाएगी। हालांकि उपचुनाव में बाजी सपा के हाथ लग गई थी।
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इससे पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को तब मायूसी हाथ लगी थी, जब लोकसभा के चुनाव में भाजपा जीत नहीं दर्ज कर पाई थी। उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर प्रदेश के तत्कालीन सहकारिता मंत्री मुकुटबिहारी वर्मा चुनाव मैदान में थे। पार्टी की तरफ से मंत्री के चुनाव लड़ने के चलते बड़े पैमाने पर मोर्चेबंदी की गई, लेकिन जीत बसपा प्रत्याशी रितेश पांडेय को नसीब हुई थी। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव, उसके बाद हुए जलालपुर विधानसभा उपचुनाव तथा बीते दिनों हुए विधानसभा चुनाव में मिली पराजय ने भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को मुश्किल में डाल दिया था। उनकी उम्मीद एमएलसी चुनाव पर टिकी थी। मंगलवार को दोपहर जब एमएलसी चुनाव के नतीजे सामने आए, तो न सिर्फ कार्यकर्ताओं की बांछें खिल गईं, वरन कई चुनाव से चला आ रहा बीजेपी की जीत का सूखा भी समाप्त हो गया।
सिटिंग सांसद के तौर पर टिकट कटने का इनाम
अकबरपुर सुरक्षित संसदीय सीट जब परिसीमन के बाद अंबेडकरनगर नाम से सामान्य सीट हुई, तो पहले चुनाव में बसपा प्रत्याशी के तौर पर राकेश पांडेय को जीत मिली थी। उससे पहले सुरक्षित सीट पर भी सपा व बसपा का कब्जा होता रहा था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में हरिओम पांडेय को भाजपा ने टिकट की घोषणा की, तो उन्हें मजबूत प्रत्याशी नहीं माना गया था। हालांकि चुनाव आगे बढ़ने पर वे मजबूती से लड़ते दिखे। नतीजा आया, तो उन्होंने एक लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया था। लोकसभा चुनाव में वे बीजेपी की बड़ी सफलता के पर्याय बने। हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट सिटिंग सांसद होने के बावजूद काट दिया। इस पर हरिओम की नाराजगी सामने आई थी। उनके एक दो विवादित बयान भी चर्चा में रहे, लेकिन वे पार्टी के प्रति वफादार बने रहे। जलालपुर विधानसभा उपचुनाव में उन्हें टिकट दिए जाने की चर्चा चली, लेकिन वे स्वयं आगे नहीं आए। अब विधान परिषद चुनाव में भाजपा की तरफ से अंबेडकरनगर व अयोध्या जनपद के कई वरिष्ठ नेता टिकट के लिए लाइन में थे। पार्टी नेतृत्व ने उन सभी में प्राथमिकता हरिओम पांडेय को दी। इसे उनके सिटिंग सांसद के तौर पर टिकट कटने के इनाम के तौर पर देखा गया। इसके साथ ही पार्टी की रणनीति यह भी थी कि हरिओम की जीत से अंबेडकरनगर को सीधे तौर पर पार्टी की तरफ से एक जनप्रतिनिधि मिल जाएगा।
विकास को नए आयाम मिलने की उम्मीद
हरिओम पांडेय के एमएलसी बनने से जिले के विकास को नए आयाम मिलने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए क्यों कि सत्तारूढ़ दल के प्रतिनिधि के तौर पर वे शासन सत्ता के गलियारे में जिले की आवाज ज्यादा मजबूती से रख सकेंगे। नागरिकों का मानना है कि हरिओम के एमएलसी बनने से सत्तारूढ़ दल के बीच अंबेडकरनगर जिले को लेकर कोई नकारात्मक छवि नहीं बन सकेगी। इसका लाभ निश्चित रूप से विकास कार्यों में देखने को मिल सकता है। कई बड़ी परियोजनाओं का लाभ अगले कुछ दिनों में जिले को मिले, तो यह स्वागत योग्य होगा।
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बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी पराजय के बाद एमएलसी चुनाव पार्टी के लिए बड़ी राहत लेकर आया। विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए बड़ा सबक साबित हुआ था। बहुुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाने वाली भाजपा को अंबेडकरनगर की सभी पांच विधानसभा सीटों पर पराजय का सामना करना पड़ा था। चार सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी सीधे तौर पर उतरे थे, जबकि एक सीट पर भाजपा व निषाद पार्टी के गठबंधन ने प्रत्याशी उतारा था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को टांडा व आलापुर विधानसभा सीट पर जीत मिली थी।
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कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि इस विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को कम से कम दो सीट जरूर हासिल हो जाएंगी या फिर अधिकतम तीन सीट तक जीत दर्ज हो सकती है। कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत लगाई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के तमाम दौरे भी हुए। हालांकि नतीजा घोषित हुआ, तो पार्टी कार्यकर्ता से लेकर नेता तक सन्न रह गए। सभी पांच सीटों पर भाजपा व गठबंधन दल की करारी पराजय हुई थी। भाजपा कार्यकर्ताओं को झटका इसलिए भी लगा था क्योंकि इससे पहले जलालपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था। दरअसल 2017 के चुनाव में जलालपुर सीट पर बसपा प्रत्याशी रितेश पांडेय की जीत हुई थी। उनके त्यागपत्र के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि यह सीट कब्जे में कर ली जाएगी। हालांकि उपचुनाव में बाजी सपा के हाथ लग गई थी।
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इससे पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को तब मायूसी हाथ लगी थी, जब लोकसभा के चुनाव में भाजपा जीत नहीं दर्ज कर पाई थी। उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर प्रदेश के तत्कालीन सहकारिता मंत्री मुकुटबिहारी वर्मा चुनाव मैदान में थे। पार्टी की तरफ से मंत्री के चुनाव लड़ने के चलते बड़े पैमाने पर मोर्चेबंदी की गई, लेकिन जीत बसपा प्रत्याशी रितेश पांडेय को नसीब हुई थी। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव, उसके बाद हुए जलालपुर विधानसभा उपचुनाव तथा बीते दिनों हुए विधानसभा चुनाव में मिली पराजय ने भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को मुश्किल में डाल दिया था। उनकी उम्मीद एमएलसी चुनाव पर टिकी थी। मंगलवार को दोपहर जब एमएलसी चुनाव के नतीजे सामने आए, तो न सिर्फ कार्यकर्ताओं की बांछें खिल गईं, वरन कई चुनाव से चला आ रहा बीजेपी की जीत का सूखा भी समाप्त हो गया।
सिटिंग सांसद के तौर पर टिकट कटने का इनाम
अकबरपुर सुरक्षित संसदीय सीट जब परिसीमन के बाद अंबेडकरनगर नाम से सामान्य सीट हुई, तो पहले चुनाव में बसपा प्रत्याशी के तौर पर राकेश पांडेय को जीत मिली थी। उससे पहले सुरक्षित सीट पर भी सपा व बसपा का कब्जा होता रहा था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में हरिओम पांडेय को भाजपा ने टिकट की घोषणा की, तो उन्हें मजबूत प्रत्याशी नहीं माना गया था। हालांकि चुनाव आगे बढ़ने पर वे मजबूती से लड़ते दिखे। नतीजा आया, तो उन्होंने एक लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया था। लोकसभा चुनाव में वे बीजेपी की बड़ी सफलता के पर्याय बने। हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट सिटिंग सांसद होने के बावजूद काट दिया। इस पर हरिओम की नाराजगी सामने आई थी। उनके एक दो विवादित बयान भी चर्चा में रहे, लेकिन वे पार्टी के प्रति वफादार बने रहे। जलालपुर विधानसभा उपचुनाव में उन्हें टिकट दिए जाने की चर्चा चली, लेकिन वे स्वयं आगे नहीं आए। अब विधान परिषद चुनाव में भाजपा की तरफ से अंबेडकरनगर व अयोध्या जनपद के कई वरिष्ठ नेता टिकट के लिए लाइन में थे। पार्टी नेतृत्व ने उन सभी में प्राथमिकता हरिओम पांडेय को दी। इसे उनके सिटिंग सांसद के तौर पर टिकट कटने के इनाम के तौर पर देखा गया। इसके साथ ही पार्टी की रणनीति यह भी थी कि हरिओम की जीत से अंबेडकरनगर को सीधे तौर पर पार्टी की तरफ से एक जनप्रतिनिधि मिल जाएगा।
विकास को नए आयाम मिलने की उम्मीद
हरिओम पांडेय के एमएलसी बनने से जिले के विकास को नए आयाम मिलने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए क्यों कि सत्तारूढ़ दल के प्रतिनिधि के तौर पर वे शासन सत्ता के गलियारे में जिले की आवाज ज्यादा मजबूती से रख सकेंगे। नागरिकों का मानना है कि हरिओम के एमएलसी बनने से सत्तारूढ़ दल के बीच अंबेडकरनगर जिले को लेकर कोई नकारात्मक छवि नहीं बन सकेगी। इसका लाभ निश्चित रूप से विकास कार्यों में देखने को मिल सकता है। कई बड़ी परियोजनाओं का लाभ अगले कुछ दिनों में जिले को मिले, तो यह स्वागत योग्य होगा।