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दो दशक से सांसद-विधायकों को नहीं आई तमसा पर पुल की सुध
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अंबेडकरनगर के जलालपुर में ग्रामीणों ने बना रखा है लकड़ी का यह कऽा पुल
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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जलालपुुर(अंबेडकरनगर)। करीब दो दशक से भी अधिक समय से तमसा नदी पर निर्मित होने वाले डड़ारी पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इस दौरान हुए प्राय: हर चुनाव में हिस्सेदारी करने वाले प्रत्याशियों ने इसे क्षेत्रीय स्तर पर चुनाव का अहम मुद्दा भी बनाया। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते ही पुल न बन पाने से क्षेत्रीय लोगों को अभी भी आवागमन के लिए लकड़ी के कच्चे व पुराने पुल का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
विकास के लंबे चौड़े वादों के बीच स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह पुल बड़ी उम्मीद का सबब बना हुआ है, लेकिन हर चुनाव के बाद भी लोगों को सिर्फ निराशा ही मिलती है। नदी पर पक्के पुल का निर्माण कब तक पूरा होगा, इसका जवाब ग्रामीणों को देने से हर नेता बचता है। ग्रामीणों के स्तर से तैयार लकड़ी के कच्चे पुल की मदद से ही वर्तमान में रामगढ़, जोल्हापुर, डड़ारी, लखमीपुर, शेषपट्टी, बिचला, सुकरौली, बंदीपुर, चैनपुर, आशापुर, मरहरा, व पर्वतपुर आदि गांव के ग्रामीणों का आवागमन होता है। स्थानीय निवासी राजेश, रामलाल, दिनेश आदि ने बताया कि लगभग 10 हजार की आबादी इस पुल का निर्माण कार्य पूरा न होने से परेशानहाल है।
वर्ष 2018 में तत्कालीन सांसद हरिओम पांडेय के प्रयास से इस पुल को बनाने का स्टीमेट तैयार हुआ था लेकिन शासन से इसे मंजूरी नहीं मिल पाई। मौजूदा विधायक के बतौर सांसद रितेश पांडेय ने भी विधानसभा में पुल निर्माण का मुद्दा उठाया था। इसके बावजूद इस पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां पुल बनने से जोल्हापुर, डड़ारी, रामगढ़ आदि गांव की दूरी ब्लाक मुख्यालय से सिर्फ सात किमी रह जाएगी, नहीं तो 12 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
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विकास के लंबे चौड़े वादों के बीच स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह पुल बड़ी उम्मीद का सबब बना हुआ है, लेकिन हर चुनाव के बाद भी लोगों को सिर्फ निराशा ही मिलती है। नदी पर पक्के पुल का निर्माण कब तक पूरा होगा, इसका जवाब ग्रामीणों को देने से हर नेता बचता है। ग्रामीणों के स्तर से तैयार लकड़ी के कच्चे पुल की मदद से ही वर्तमान में रामगढ़, जोल्हापुर, डड़ारी, लखमीपुर, शेषपट्टी, बिचला, सुकरौली, बंदीपुर, चैनपुर, आशापुर, मरहरा, व पर्वतपुर आदि गांव के ग्रामीणों का आवागमन होता है। स्थानीय निवासी राजेश, रामलाल, दिनेश आदि ने बताया कि लगभग 10 हजार की आबादी इस पुल का निर्माण कार्य पूरा न होने से परेशानहाल है।
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वर्ष 2018 में तत्कालीन सांसद हरिओम पांडेय के प्रयास से इस पुल को बनाने का स्टीमेट तैयार हुआ था लेकिन शासन से इसे मंजूरी नहीं मिल पाई। मौजूदा विधायक के बतौर सांसद रितेश पांडेय ने भी विधानसभा में पुल निर्माण का मुद्दा उठाया था। इसके बावजूद इस पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां पुल बनने से जोल्हापुर, डड़ारी, रामगढ़ आदि गांव की दूरी ब्लाक मुख्यालय से सिर्फ सात किमी रह जाएगी, नहीं तो 12 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
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