{"_id":"68c07210e6a9f09ac90fcdb3","slug":"firaq-gorakhpuri-is-the-pride-of-urdu-language-ambedkar-nagar-news-c-91-1-abn1014-141679-2025-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: उर्दू जबान की आबरू हैं फिराक गोरखपुरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: उर्दू जबान की आबरू हैं फिराक गोरखपुरी
Tue, 09 Sep 2025 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 09 Sep 2025 11:59 PM IST
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। प्रगतिशील लेखक संघ के तत्वावधान में सोमवार को रामनगर स्थित ओरांव में उर्दू के महान शायर रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी की 129वीं जयंती पर साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य हरीश कोशलपुरी ने की।
इस अवसर पर कवियों और शायरों ने उनके साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। सितारे उर्दू अवार्ड से सम्मानित मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि फिराक गोरखपुरी को उर्दू जबान की आबरू कहा जाता है। उनकी शायरी को मांग का सिंदूर कहा गया है। गजलों और शेरों के माध्यम से उन्होंने इंसान को अनूठे ढंग से अभिव्यक्त किया, जिस कारण वे हमेशा याद किए जाएंगे। कार्यक्रम के अध्यक्ष आर्य हरीश कोशलपुरी ने कहा कि फिराक ने उर्दू शायरी को एक नई संगीतात्मकता प्रदान की। फिराक ने अपनी लेखनी से साहित्य को नए पहलू दिए और समकालीन लेखकों को प्रभावित किया।
संचालक जमालुद्दीन सफर ने कहा कि फिराक गोरखपुरी आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के संस्थापकों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। फिराक ने उर्दू को केवल भाषा ही नहीं बल्कि समाज और संस्कृति का दर्पण बनाया। इस अवसर पर नंदकिशोर बेचैन, रामआशीष विभोर, दस्तगीर फैसल, राशिद अनवर और सुनील गुलजार ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस अवसर पर कवियों और शायरों ने उनके साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। सितारे उर्दू अवार्ड से सम्मानित मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि फिराक गोरखपुरी को उर्दू जबान की आबरू कहा जाता है। उनकी शायरी को मांग का सिंदूर कहा गया है। गजलों और शेरों के माध्यम से उन्होंने इंसान को अनूठे ढंग से अभिव्यक्त किया, जिस कारण वे हमेशा याद किए जाएंगे। कार्यक्रम के अध्यक्ष आर्य हरीश कोशलपुरी ने कहा कि फिराक ने उर्दू शायरी को एक नई संगीतात्मकता प्रदान की। फिराक ने अपनी लेखनी से साहित्य को नए पहलू दिए और समकालीन लेखकों को प्रभावित किया।
विज्ञापन
संचालक जमालुद्दीन सफर ने कहा कि फिराक गोरखपुरी आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के संस्थापकों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। फिराक ने उर्दू को केवल भाषा ही नहीं बल्कि समाज और संस्कृति का दर्पण बनाया। इस अवसर पर नंदकिशोर बेचैन, रामआशीष विभोर, दस्तगीर फैसल, राशिद अनवर और सुनील गुलजार ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।
विज्ञापन