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फिटनेस में फेल स्कूली वाहन भर रहे फर्राटा
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अंबेडकरनगर। फिटनेस टेस्ट में फेल होने के बाद भी फर्राटा भर रहे स्कूली वाहनों से नौनिहालों की सुरक्षा दांव पर लगी है। परिवहन विभाग की चेतावनी भी अनफिट वाहन स्वामियों के साथ ही स्कूल संचालकों पर बेअसर साबित हो रही है। एआरटीओ कार्यालय द्वारा बीते दिनों फिटनेस फेल 644 स्कूल वाहनों के स्वामियों को नोटिस जारी कर जल्दी फिटनेस कराने का अल्टीमेटम दिया गया था। इसके बावजूद सिर्फ 6 वाहन ही फिटनेस कराने के लिए कार्यालय पहुंचे। इससे नाराज परिवहन विभाग अब शनिवार 30 अप्रैल से स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर विशेष अभियान शुरू करेगा। इस दौरान अनफिट मिलने वाले वाहनों को सीज करवाहन स्वामी व स्कूल संचालक के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी होगी।
स्कूल वाहनों को लेकर विद्यालय प्रबंधन एक बार फिर शासन प्रशासन के निर्देशों को ठेगा दिखा रहा है। इसके तहत न सिर्फ वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के साथ ही स्कूली वाहनों के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों को भी हाशिए पर रखा जा रहा है। परिवहन विभाग के अनुसार जिले में स्कूली बच्चों की आवाजाही में लगे छोटे बड़े 644 वाहनों का बीते लंबे समय से फिटनेस टेस्ट ही नहीं हुआ है और यह अनफिट होने के बाद भी सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
आरआई विपिन कुमार ने बताया कि इसमें 342 स्कूल वैन व 302 स्कूल बस हैं। परिवहन विभाग के तमाम निर्देश के बावजूद किसी विद्यालय प्रबंधन द्वारा वाहनों का फिटनेस कराने व सुरक्षा मानकों को वाहन में पूरा कराने की तरफ ध्यान नही है। बीते दिनों ही एआरटीओ ने स्कूल प्रबंधनों को नोटिस जारी कर चेताया था कि स्कूल में संचालित जिन वाहनों की फिटनेस फेल है अथवा अन्य कोई कमी है तो उसे 28 अप्रैल तक अवश्य दुरुस्त करा ले। इसके बाद 30 अप्रैल से शुरू होने वाले औचक निरीक्षण में बिना फिटनेस व सुरक्षा मानकों को पूरा किए सड़कों पर दौड़ रहे स्कूली वाहनों की धरपकड़ कर उन्हें सीज करते हुए वाहन स्वामी व स्कूल प्रबंधन पर केस दर्ज कराया जाएगा।
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एआरटीओ वीडी मिश्र के सख्त निर्देश के बावजूद स्कूल प्रबंधन पूरी तरह उदासीन नजर आ रहा है। एक सप्ताह का समय बीत जाने के बावजूद परिवहन विभाग ने जिन 644 वाहनों के फिटनेस फेल होने की सूची तैयार की थी, उसमें से महज 6 वाहन स्वामी फिटनेस के लिए कार्यालय पहुंचे। ऐसे में अब संबंधित बस व वाहन से जुड़े स्कूल प्रबंधनों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। परिवहन महकमा अब ऐसे प्रबंधनों के विरुद्घ केस दर्ज कराने की तैयारी में है।
विद्यालय सुरक्षा समिति उदासीन
बच्चों को परिवहन सेवा देने नाम पर उनकी जिंदगी के साथ हो रहे खिलवाड़ पर जिले की विद्यालय सुरक्षा समिति भी चुप्पी साधे है। विभाग के पास अनफिट वाहनों की सूची होने के बावजूद कड़ी कार्रवाई न होने के कारण ही विद्यालय संचालक पूरी तरह मनमानी पर उतारू हैं। बच्चों की सुरक्षा तय करने के लिए बनी विद्यालय सुरक्षा समिति भी इसकी निगरानी को लेकर पूरी तरह उदासीन बनी है। कटरिया निवासी सुनील शर्मा व शास्त्रीनगर रवीश शुक्ला का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी चिंताजनक है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर विद्यालय की मनमानी रोकने के लिए परिवहन विभाग के साथ ही सुरक्षा समिति के पदाधिकारियों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी सक्रिय होने की जरूरत है।
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स्कूल वाहनों को लेकर विद्यालय प्रबंधन एक बार फिर शासन प्रशासन के निर्देशों को ठेगा दिखा रहा है। इसके तहत न सिर्फ वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के साथ ही स्कूली वाहनों के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों को भी हाशिए पर रखा जा रहा है। परिवहन विभाग के अनुसार जिले में स्कूली बच्चों की आवाजाही में लगे छोटे बड़े 644 वाहनों का बीते लंबे समय से फिटनेस टेस्ट ही नहीं हुआ है और यह अनफिट होने के बाद भी सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
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आरआई विपिन कुमार ने बताया कि इसमें 342 स्कूल वैन व 302 स्कूल बस हैं। परिवहन विभाग के तमाम निर्देश के बावजूद किसी विद्यालय प्रबंधन द्वारा वाहनों का फिटनेस कराने व सुरक्षा मानकों को वाहन में पूरा कराने की तरफ ध्यान नही है। बीते दिनों ही एआरटीओ ने स्कूल प्रबंधनों को नोटिस जारी कर चेताया था कि स्कूल में संचालित जिन वाहनों की फिटनेस फेल है अथवा अन्य कोई कमी है तो उसे 28 अप्रैल तक अवश्य दुरुस्त करा ले। इसके बाद 30 अप्रैल से शुरू होने वाले औचक निरीक्षण में बिना फिटनेस व सुरक्षा मानकों को पूरा किए सड़कों पर दौड़ रहे स्कूली वाहनों की धरपकड़ कर उन्हें सीज करते हुए वाहन स्वामी व स्कूल प्रबंधन पर केस दर्ज कराया जाएगा।
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एआरटीओ वीडी मिश्र के सख्त निर्देश के बावजूद स्कूल प्रबंधन पूरी तरह उदासीन नजर आ रहा है। एक सप्ताह का समय बीत जाने के बावजूद परिवहन विभाग ने जिन 644 वाहनों के फिटनेस फेल होने की सूची तैयार की थी, उसमें से महज 6 वाहन स्वामी फिटनेस के लिए कार्यालय पहुंचे। ऐसे में अब संबंधित बस व वाहन से जुड़े स्कूल प्रबंधनों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। परिवहन महकमा अब ऐसे प्रबंधनों के विरुद्घ केस दर्ज कराने की तैयारी में है।
विद्यालय सुरक्षा समिति उदासीन
बच्चों को परिवहन सेवा देने नाम पर उनकी जिंदगी के साथ हो रहे खिलवाड़ पर जिले की विद्यालय सुरक्षा समिति भी चुप्पी साधे है। विभाग के पास अनफिट वाहनों की सूची होने के बावजूद कड़ी कार्रवाई न होने के कारण ही विद्यालय संचालक पूरी तरह मनमानी पर उतारू हैं। बच्चों की सुरक्षा तय करने के लिए बनी विद्यालय सुरक्षा समिति भी इसकी निगरानी को लेकर पूरी तरह उदासीन बनी है। कटरिया निवासी सुनील शर्मा व शास्त्रीनगर रवीश शुक्ला का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी चिंताजनक है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर विद्यालय की मनमानी रोकने के लिए परिवहन विभाग के साथ ही सुरक्षा समिति के पदाधिकारियों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी सक्रिय होने की जरूरत है।