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हाईटेक होते माहौल में भी पहचान बनाए है फगुआ
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फोटो 34, अंबेडकरनगर के भगवानपट्टी गांव में फगुआ गायन करते युवा।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। फिल्मी गीतों के साथ ही हाईटेक होते माहौल के बीच फगुआ अपनी पहचान बनाए हुए है। शहरी क्षेत्रों में फगुआ बीते कुछ वर्षों से कम हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा अभी भी चल रही है। फगुआ के प्रति युवाओं का रुझान कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन जब बुजुर्गों द्वारा होली पर्व से पहले फगुआ का आयोजन किया जाता है तो वह ग्रामीणों के आकर्षक का केंद्र बन जाता है। होली पर्व से पहले जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति को मजबूत करता फगुआ शुरू हो गया है।
बगैर फगुआ के होली पर्व न मनाया जाए, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भारतीय संस्कृति को मजबूत करती यह परंपरा हाईटेक होते माहौल व फिल्मी गीत के चलते अब ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र तक ही सीमित रह गया है। शहरी क्षेत्रों में इसका स्थान डीजे पर बजते फिल्मी गीतों ने ले लिया है। गौरतलब है कि होली पर्व के कुछ दिन पहले से जगह जगह छोटी-छोटी टोली फगुआ कार्यक्रम का आयोजन करती है। इसके प्रति युवाओं का रूझान तो कुछ कम हुआ है, लेकिन जो लोग इससे पहले से जुड़े हुए हैं, वह इसमें बढ़ चढ़कर भागीदारी करते हैं। फगुआ के दौरान ढोल नगाड़े के बीच लोकगीत गाए जाते हैं और जमकर अबीर गुलाल का भी प्रयोग किया जाता है।
हाईटेक होते माहौल के बीच फगुआ की धमक अभी भी बनी हुई है। भगवानपट्टी गांव में दो दिन पहले से बैठी फगुआ टीम के विकास तिवारी, ओमप्रकाश, विजय, लवकुश, आनंद, उमेश, विवेक, ने कहा कि डीजे पर बजते फिल्मी गीतों की तरफ युवाओं का रूझान जरूर बढ़ा है, लेकिन फगुआ का जो क्रेज पहले था, वह अब भी बरकरार है। कहा कि प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी फगुआ कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। उकरा के कृष्णकुमार, जगदीश, संतराम, मनीराम, प्रदीप सिंह, उग्रसेन सिंह ने कहा कि फगुआ भारतीय संस्कृति की एक मजबूत परंपरा है। माहौल चाहे जितना हाईटेक हो जाए, लेकिन फगुआ का जो क्रेज है, वह न तो समाप्त होगा और न ही कम होगा। गोविंद गनेशपुर अटिका के सालिकराम यादव, आनंद तिवारी, मंशाराम यादव ने कहा कि फगुआ जैसी परंपरा लगातार जारी रहे, इसके लिए सभी को इसमें बढ़ चढ़कर भागीदारी करनी चाहिए। होली के दिन फगुआ टीम समूचे मोहल्ले का भ्रमण करती है।
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बगैर फगुआ के होली पर्व न मनाया जाए, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भारतीय संस्कृति को मजबूत करती यह परंपरा हाईटेक होते माहौल व फिल्मी गीत के चलते अब ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र तक ही सीमित रह गया है। शहरी क्षेत्रों में इसका स्थान डीजे पर बजते फिल्मी गीतों ने ले लिया है। गौरतलब है कि होली पर्व के कुछ दिन पहले से जगह जगह छोटी-छोटी टोली फगुआ कार्यक्रम का आयोजन करती है। इसके प्रति युवाओं का रूझान तो कुछ कम हुआ है, लेकिन जो लोग इससे पहले से जुड़े हुए हैं, वह इसमें बढ़ चढ़कर भागीदारी करते हैं। फगुआ के दौरान ढोल नगाड़े के बीच लोकगीत गाए जाते हैं और जमकर अबीर गुलाल का भी प्रयोग किया जाता है।
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हाईटेक होते माहौल के बीच फगुआ की धमक अभी भी बनी हुई है। भगवानपट्टी गांव में दो दिन पहले से बैठी फगुआ टीम के विकास तिवारी, ओमप्रकाश, विजय, लवकुश, आनंद, उमेश, विवेक, ने कहा कि डीजे पर बजते फिल्मी गीतों की तरफ युवाओं का रूझान जरूर बढ़ा है, लेकिन फगुआ का जो क्रेज पहले था, वह अब भी बरकरार है। कहा कि प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी फगुआ कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। उकरा के कृष्णकुमार, जगदीश, संतराम, मनीराम, प्रदीप सिंह, उग्रसेन सिंह ने कहा कि फगुआ भारतीय संस्कृति की एक मजबूत परंपरा है। माहौल चाहे जितना हाईटेक हो जाए, लेकिन फगुआ का जो क्रेज है, वह न तो समाप्त होगा और न ही कम होगा। गोविंद गनेशपुर अटिका के सालिकराम यादव, आनंद तिवारी, मंशाराम यादव ने कहा कि फगुआ जैसी परंपरा लगातार जारी रहे, इसके लिए सभी को इसमें बढ़ चढ़कर भागीदारी करनी चाहिए। होली के दिन फगुआ टीम समूचे मोहल्ले का भ्रमण करती है।
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