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Ambedkar Nagar News: ब्लड बैंक में सेपरेटर मशीन लगाने की कवायद फिर शुरू
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जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक। संवाद
अंबेडकरनगर। डेंगू और मलेरिया के मरीजों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) के लिए अब भी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे मरीजों को मेडिकल कॉलेज या निजी केंद्रों का रुख करना पड़ता है। इससे इलाज पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को विस्तारित कर ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने का प्रस्ताव कई वर्षों से लंबित है। अब सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार की पहल से इस दिशा में कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2014 में ब्लड बैंक की शुरुआत हुई थी। इसके बाद ब्लड बैंक का विस्तार कर सेपरेटर मशीन लगाने के लिए दो बार प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया। जिला अस्पताल प्रशासन ने भी सुविधा शुरू कराने के लिए पत्राचार किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। हर साल डेंगू के सीजन में इस मुद्दे पर पत्राचार होता है, लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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जिला अस्पताल में हर माह औसतन 40 से 50 ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। सेपरेटर मशीन न होने से इन मरीजों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाती। मजबूरी में उन्हें दूसरे अस्पतालों या निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। शनिवार को सीएमओ ने ब्लड बैंक पहुंचकर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और लंबित प्रस्ताव के संबंध में शासन को दोबारा रिमाइंडर भेजने के निर्देश दिए।
एक यूनिट रक्त से मिल सकते हैं अलग-अलग कंपोनेंट : ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की मदद से रक्त को अलग-अलग घटकों में विभाजित किया जा सकता है। इससे जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और लाल रक्त कोशिकाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को जरूरत के मुताबिक रक्त के घटक मिल सकेंगे और इसके लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को विस्तारित कर ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने का प्रस्ताव कई वर्षों से लंबित है। अब सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार की पहल से इस दिशा में कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
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जिला अस्पताल में वर्ष 2014 में ब्लड बैंक की शुरुआत हुई थी। इसके बाद ब्लड बैंक का विस्तार कर सेपरेटर मशीन लगाने के लिए दो बार प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया। जिला अस्पताल प्रशासन ने भी सुविधा शुरू कराने के लिए पत्राचार किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। हर साल डेंगू के सीजन में इस मुद्दे पर पत्राचार होता है, लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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जिला अस्पताल में हर माह औसतन 40 से 50 ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। सेपरेटर मशीन न होने से इन मरीजों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाती। मजबूरी में उन्हें दूसरे अस्पतालों या निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। शनिवार को सीएमओ ने ब्लड बैंक पहुंचकर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और लंबित प्रस्ताव के संबंध में शासन को दोबारा रिमाइंडर भेजने के निर्देश दिए।
एक यूनिट रक्त से मिल सकते हैं अलग-अलग कंपोनेंट : ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की मदद से रक्त को अलग-अलग घटकों में विभाजित किया जा सकता है। इससे जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और लाल रक्त कोशिकाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को जरूरत के मुताबिक रक्त के घटक मिल सकेंगे और इसके लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी।