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गोभी की खेती से तरक्की कर रहे दिनेश
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अंबेडकरनगर के भारीडीहा में दिनेश तिवारी के खेतों में तैयार हो रही गोभी की फसल।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
केदारनगर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के भारीडीहा गांव में प्रगतिशील किसान दिनेश तिवारी गोभी की खेती व बीज उत्पादन से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल गढ़ रहे हैं। उनके यहां गोभी की खेती व बीज उत्पादन का काम पुश्तैनी तौर पर होता आ रहा है। दिनेश अपनी तीसरी पीढ़ी में यह काम कर खूब तरक्की कर रहे हैं। पेशे से शिक्षामित्र दिनेश कहते हैं कि अपनी नौकरी में भी उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फिलहाल उन्होंने बीच में सहायक अध्यापक बनने के बावजूद गोभी की खेती को नहीं छोड़ा। गोभी की खेती उनके लिए एक बेहतर व्यवसाय बन चुकी है और उससे उन्हें बेहतर लाभ भी मिलता है।
गोभी की खेती के प्रति दिनेश की लगन को इसी से समझा जा सकता है कि उन्होंने इस बार पांच बीघा में गोभी की खेती की है। उनके खेतों में गोभी तैयार भी हो चुकी है। जल्द ही इसकी कटाई शुरू होगी। दिनेश ने बताया कि वह अपने तैयार गोभी के बीज को कंपनियों को देने के बजाय सीधे किसानों तक पहुंचाते हैं। उनके पास गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों तक के किसान बीज के लिए संपर्क करते हैं। दिनेश ने बताया कि किसान प्राय: बीज उधार ले जाते हैं। फसल तैयार होने के बाद भुगतान करते हैं। बावजूद इसके उन्हें खेती में कभी कोई नुकसान नहीं लगा।
दिनेश बताते हैं कि जुलाई में नर्सरी डाल कर पौधों को अगस्त तक रोपित कर दिया जाता है। नर्सरी डालने से लेकर अप्रैल में कटिंग तक प्रति बीघा औसत खर्च 60 से 70 हजार रुपये खर्च आता है। मौसम सही हो तो प्रति बीघा एक क्विंटल से सवा क्विंटल उत्पादन हो जाता है। बाजार में 20 हजार रुपये प्रति किलो इसकी बिक्री है। ऐसे में लगभग दो से तीन लाख रुपये की बिक्री होती है। खर्च निकालने के बाद डेढ़ से दो लाख रुपये की बचत हो जाती है।
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बताया कि कम समय में बेहतर लाभ मिल जाता है। समय से खेत खाली होने के चलते किसान इसमें दूसरी फसल का भी लाभ ले सकते हैं। गोभी की खेती में वे तकनीक का भी पूरा प्रयोग करते हैं। कहा कि गोभी की खेती ही उनके मुख्य आय का साधन है। इस खेती से वे संतुष्ट भी हैं, और अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही तरक्की के पथ पर अग्रसर हैं। कहा कि किसानों को सब्जी की खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे किसान बेहतर लाभ कमा सकते हैं।
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गोभी की खेती के प्रति दिनेश की लगन को इसी से समझा जा सकता है कि उन्होंने इस बार पांच बीघा में गोभी की खेती की है। उनके खेतों में गोभी तैयार भी हो चुकी है। जल्द ही इसकी कटाई शुरू होगी। दिनेश ने बताया कि वह अपने तैयार गोभी के बीज को कंपनियों को देने के बजाय सीधे किसानों तक पहुंचाते हैं। उनके पास गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों तक के किसान बीज के लिए संपर्क करते हैं। दिनेश ने बताया कि किसान प्राय: बीज उधार ले जाते हैं। फसल तैयार होने के बाद भुगतान करते हैं। बावजूद इसके उन्हें खेती में कभी कोई नुकसान नहीं लगा।
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दिनेश बताते हैं कि जुलाई में नर्सरी डाल कर पौधों को अगस्त तक रोपित कर दिया जाता है। नर्सरी डालने से लेकर अप्रैल में कटिंग तक प्रति बीघा औसत खर्च 60 से 70 हजार रुपये खर्च आता है। मौसम सही हो तो प्रति बीघा एक क्विंटल से सवा क्विंटल उत्पादन हो जाता है। बाजार में 20 हजार रुपये प्रति किलो इसकी बिक्री है। ऐसे में लगभग दो से तीन लाख रुपये की बिक्री होती है। खर्च निकालने के बाद डेढ़ से दो लाख रुपये की बचत हो जाती है।
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बताया कि कम समय में बेहतर लाभ मिल जाता है। समय से खेत खाली होने के चलते किसान इसमें दूसरी फसल का भी लाभ ले सकते हैं। गोभी की खेती में वे तकनीक का भी पूरा प्रयोग करते हैं। कहा कि गोभी की खेती ही उनके मुख्य आय का साधन है। इस खेती से वे संतुष्ट भी हैं, और अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही तरक्की के पथ पर अग्रसर हैं। कहा कि किसानों को सब्जी की खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे किसान बेहतर लाभ कमा सकते हैं।