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विक्रेता मौज में, अफसर मस्त किसान पस्त
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Wed, 29 Jul 2015 11:43 PM IST
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मालूम हो कि जिले में मिलावटी व नकली खाद, पेस्टीसाइड व बीज की बिक्री लंबे समय से की जा रही है। इस पर अंकुश लगाने के लिए बीते पांच वर्षों में कोई बड़ा अभियान तक नहीं चलाया जा सका है। नतीजतन इसका कारोबार धड़ल्ले से पनप रहा है।
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विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में खाद के 658 व पेस्टीसाइड की 472 लाइसेंसी दुकानें हैं। बावजूद इसके तमाम ऐसी दुकानें भी हैं जहां इनकी बिक्री की जा रही है। इनके पास किसी प्रकार का लाइसेंस तक नहीं है।
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इन दुकानों पर असली खाद, बीज व कीटनाशक रसायनों के साथ साथ मिलावटी व नकली खाद, बीज व पेस्टीसाइड की बिक्री भी गुपचुप तौर पर की जाती है। इसका खामियाजा भुगत चुके तमाम किसानों ने संबंधित अधिकारियों से भी शिकायतें की, लेकिन कभी कोई कोई कदम नहीं उठाया जा सका।
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नकली खाद व कीटनाशक रसायनों की बिक्री रबी व खरीफ की फसलों के दौरान और भी बढ़ जाती है। कारण यह कि इस दौरान खाद की अधिक जरूरत पड़ती है। ऐसे में जिले में खाद की उपलब्धता कम होने का लाभ नकली खाद की बिक्री कर दुकानदार उठाते हैं।
कृषि संबंधित नकली सामग्रियों पर अंकुश लगाने एवं संबंधित पर कार्रवाई को लेकर विभाग बढ़ चढ़कर दावे तो करता है, लेकिन सबकुछ महज खाना पूरी के लिए ही किया जाता है। बताते हैं कि अधिकांश दुकानों से विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को सुविधा शुल्क मिलता रहता है।
इस लिए पुलिस व प्रशासन के अशपर भी मौन बने रहते हैं। एक दो मामलों में केस दर्ज भी हुए, तो पुलिस ने लीपापोती कर आज तक किसी का चालान तक नहीं किया।