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आपराधिक घटनाओं पर नहीं लग पा रहा अंकुश

Thu, 27 Aug 2015 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Thu, 27 Aug 2015 10:59 PM IST
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खास यह कि शांत माना जाने वाला यह जिला अब संगठित गिरोहों के लिए खासा चर्चित हो चुका है। रंगदारी जैसे मामले यहां बीते लगभग 6 वर्षों में इतनी तेजी से बढ़े हैं कि लोगों के बीच इसे लेकर दहशत का माहौल साफ दिखाई पड़ता है।

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पुलिस ने कई शातिर बदमाशों व माफियाओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई इस बीच जरूर की है, लेकिन सफेद पोशों के संरक्षण के चलते तमाम बदमाश अभी भी बेखौफ वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में अपराधों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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एनसीआरबी ने बीते दिनों अपराध का जो आंकड़ा सामने प्रस्तुत किया, उसमें देश में 1962 से लेकर अब तक हत्या व अन्य संगीन अपराधों की दर में कमी आने की बात कही गई है। कुछ क्षेत्रों के हालात भले ही इस तथ्य का समर्थन करते हों, लेकिन जिले के हालात तो ऐसे कतई नहीं हैं।
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फैजाबाद जनपद को बांटकर अंबेडकरनगर जिले का गठन 29 सितंबर 1995 को किया गया था। उस समय यहां कोई खास संगठित गिरोह सक्रिय नहीं था लेकिन हत्या, लूट व दुष्कर्म जैसी घटनाएं होती रहती थीं। जिले में अपराध की प्रवृत्ति बीते पांच छह वर्षों के भीतर तेजी से बदली है।

पूर्व में अलग अलग थाना क्षेत्रों में दुष्कर्म की कई घटनाएं सामने आती थीं। हत्या व लूट की घटनाएं भी होती रहती थीं। इन घटनाओं से ही जिले में सनसनी मचती थी। अब अपराध का तरीका यहां बदल चुका है। दिलीप वर्मा, अजय सिंह सिपाही व खान मुबारक जैसे बदमाशों के संगठित गिरोह पनप चुके हैं। इनके द्वारा रंगदारी से लेकर ठेके पट्टी पर कब्जे के लिए धमकाने व आतंकित करने का काम किया जा रहा है।

रंगदारी के कई बड़े मामले इन तीनों गिरोहों द्वारा किए जा चुके हैं। दिलीप वर्मा व खान मुबारक तो जेल में होने के बाद भी आपराधिक गतिविधियां करते रहे। इसी के चलते माफिया खान को बीते दिनों ही बरेली जेल भेजा गया है। माफिया दिलीप वर्मा को भी फैजाबाद जेल से हटाया जा चुका है।

अपराधों के बढ़ते क्रम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2013 में जहां 20 हत्याएं जिले में हुई थीं, वहीं वर्ष 2015 में अब तक ही 22 हत्याएं हो चुकी हैं। वर्ष 2013 में कुल 14 दहेज हत्याएं हुई थीं तो 2014 में सिर्फ ऐसी 7 घटनाएं हुईं। इस बार अब तक की 15 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं।


बलबा के 40 मामले 2013 में हुए थे तो 2014 में इनकी संख्या एक रही। इस वर्ष अब तक की बलबे के 52 मामले हो चुके हैं। गैर इरादतन हत्या के वर्ष 2013 में पांच मामलों के सापेक्ष कमी जरूर दिख रही है। इस बार अब तक तीन मामले ही सामने आए हैं।  जानलेवा हमले के 30 मामले 2013 में हुए थे। इस वर्ष बढ़कर 32 हो गए। हालांकि 2014 में ऐसे 44 मामले सामने आए थे। गंभीर मारपीट के 117 मामले वर्ष 2013 -14 में हुए थे, जबकि इस वर्ष अब तक 199 मामले सामने आ चुके हैं।

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