{"_id":"5d261a4a8ebc3e6d243bb4a3","slug":"child-ambedkar-nagar-news-lko469961561","type":"story","status":"publish","title_hn":"जून माह में मिले जिलेभर में 15 हजार 426 बच्चे अतिकुपोषित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जून माह में मिले जिलेभर में 15 हजार 426 बच्चे अतिकुपोषित
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अंबेडकरनगर। जिले को कुपोषण मुक्त करने का अभियान औंधे मुंह गिरता लग रहा है। बच्चों को कुपोषणमुक्त कराने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं पर प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च किए जा रहे, लेकिन अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं आ रही। जून माह में ही चले अभियान में कुल 1 लाख 88 हजार 948 बच्चों का वजन किया गया। 15 हजार 426 बच्चे अतिकुपोषित, जबकि 38 हजार 216 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में चिह्नित किए गए। अतिकुपोषित बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड के बने पोषण पुनर्वास केंद्र में 14-14 दिन के लिए भर्ती किए जाने, जबकि कुपोषित बच्चों का पुष्टाहार दोगुना किए जाने का निर्देश दिया गया है। बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाने व एक स्वस्थ समाज की स्थापना के लिए शासन द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। योजनाओं का बच्चों को अधिक से अधिक लाभ मिले, इसके लिए प्रतिमाह बाल विकास विभाग द्वारा 50 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च होती है। इन सबके बावजूद जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गत जून माह में अभियान चलाकर 1 लाख 88 हजार 948 बच्चों का वजन किया गया। जो परिणाम सामने आया, वह अत्यंत चौंकाने वाला था। 15 हजार 426 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए, जबकि 38 हजार 216 बच्चे कुपोषित मिले।
बड़ी संख्या में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के सामने आने पर योजनाओं के सुचारु संचालन पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। नागरिकों का मानना है कि योजना का समुचित लाभ दिलाने को लेकर जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी गंभीर नहीं हो रहे। ज्यादातर अभियान कागजों तक ही सीमित रहता है। यही कारण है कि जिले को कुपोषण मुक्त करने के लक्ष्य को तगड़ा झटका लग रहा है।
जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे लगातार सामने जरूर आ रहे हैं, लेकिन बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार इनकी संख्या में कमी आई है। विभाग के लिपिक एके मिश्र ने बताया कि मई माह में चले अभियान में 1 लाख 88 हजार 266 बच्चों का वजन हुआ था। 16 हजार 96 बच्चे अतिकुपोषित, जबकि 40 हजार 843 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में चिह्ति किए गए थे। जून माह में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 15 हजार 426 है जो मई माह के सापेक्ष 670 कम है। इसी प्रकार जून में 38216 कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे जो मई के सापेक्ष 2627 कम हैं।
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जिले को कुपोषणमुक्त करने के लिए लगातार अभियान चल रहा है। इसका समुचित लाभ बच्चों को मिले, इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अतिकुपोषित गंभीर बच्चों को श्रेणी से बाहर करने के लिए जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में 14-14 दिन के लिए भेजे जाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा कुपोषित बच्चों को पुष्टाहार दोगुना बढ़ाए जाने का भी निर्देश दिया गया है।
विनोद कुमार, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी
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बड़ी संख्या में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के सामने आने पर योजनाओं के सुचारु संचालन पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। नागरिकों का मानना है कि योजना का समुचित लाभ दिलाने को लेकर जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी गंभीर नहीं हो रहे। ज्यादातर अभियान कागजों तक ही सीमित रहता है। यही कारण है कि जिले को कुपोषण मुक्त करने के लक्ष्य को तगड़ा झटका लग रहा है।
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जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे लगातार सामने जरूर आ रहे हैं, लेकिन बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार इनकी संख्या में कमी आई है। विभाग के लिपिक एके मिश्र ने बताया कि मई माह में चले अभियान में 1 लाख 88 हजार 266 बच्चों का वजन हुआ था। 16 हजार 96 बच्चे अतिकुपोषित, जबकि 40 हजार 843 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में चिह्ति किए गए थे। जून माह में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 15 हजार 426 है जो मई माह के सापेक्ष 670 कम है। इसी प्रकार जून में 38216 कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे जो मई के सापेक्ष 2627 कम हैं।
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जिले को कुपोषणमुक्त करने के लिए लगातार अभियान चल रहा है। इसका समुचित लाभ बच्चों को मिले, इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अतिकुपोषित गंभीर बच्चों को श्रेणी से बाहर करने के लिए जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में 14-14 दिन के लिए भेजे जाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा कुपोषित बच्चों को पुष्टाहार दोगुना बढ़ाए जाने का भी निर्देश दिया गया है।
विनोद कुमार, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी