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धान खरीद में बदलाव, टूटेगा बिचौलियों का काकस
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अंबेडकरनगर। धान खरीद में बिचौलियों का काकस तोड़ने के लिए शासन ने नई पहल शुरू की है। इसके लिए किसानों को जरूरी है कि वह जल्द से जल्द अपने बैंक खाते व मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करा लें। शासन की नई क्रय नीति के तहत अब ऑनलाइन के समय किसानों को अपना बैंक विवरण देने की जरूरत नहीं है। बल्कि धान खरीद एजेंसियां आधार नंबर से लिंक संबंधित बैंक खाते में धनराशि स्थानांतरित करेंगी। खास बात यह कि अब पंजीयन की ओटीपी व धान खरीद का विवरण उसी मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए पहुंचेगा, जो मोबाइल नंबर आधार से लिंक होगा। शासन की मंशा है कि इससे धान खरीद में बिचौलियों की दखल काफी हद तक रुकेगी।
धान उत्पादन के लिए प्रदेश में जिले का प्रमुख स्थान है। यहां किसान बड़े पैमाने पर धान का उत्पादन व बिक्री करते हैं। जिले में लगभग साढ़े 4 लाख किसान हैं और वह 1 लाख 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती करते हैं। शासन की ओर से एक नवंबर से धान की खरीद की तिथि घोषित कर दी गई है। अधिकाधिक किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री कर सकें, इसके लिए बीती 16 अगस्त से जिले में ऑनलाइन पंजीयन भी शुरू कर दी गई थी। हालांकि इस बीच शासन ने धान खरीद नीति को और पारदर्शी बनाने के लिए पंजीयन प्रक्रिया में संशोधन कर दिया।
ऐसे में अब किसानों को जरूरत है कि वह अविलंब अपने बैंक खाते व मोबाइल नंबर को आधार नंबर से लिंक करा लें। कारण यह कि अब धान बिक्री के लिए पंजीयन कराते समय आने वाली ओटीपी उसी मोबाइल नंबर पर जाएगी, जो नंबर आधार कार्ड में लिंक होगा। इतना ही नहीं आवेदन के दौरान किसान को किसी प्रकार का बैंक डिटेल देने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि भुगतान आधार से लिंक बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि किसान अपने बैंक खाते को अनिवार्य रूप से आधारकार्ड से लिंक कराएं।
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शासन का मानना है कि इस प्रक्रिया के शुरू होने से धान खरीद में काफी हद तक पारदर्शिता आएगी। कई बार बिचौलिए किसानों की खतौनी का प्रयोग करके धान व गेहूं की बिक्री सरकारी क्रय केंद्रों पर कर लेते थे और किसानों को इसकी भनक भी नही लग पाती थी। कारण यह कि ऑनलाइन के समय खतौनी किसानों का लगाया जाता था और बैंक खाता व अन्य विवरण बिचौलिसे अपना लगा देते थे। बिचौलियों की इस मनमानी को रोकने के लिए शासन ने अब नई पहल शुरू की है। किसान संतराम वर्मा व अंगद जायसवाल का भी मानना है कि शासन की इस नई क्रय नीति से बिचौलियों की मनमानी सरकारी क्रय केन्द्रों पर काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे अधिकाधिक किसान अपनी उपज बेच सकेंगे।
किसानों को किया जा रहा जागरूक
शासन की नई क्रय नीति के बारे में किसानों को लगातार जागरूक किया रहा है। किसान ऑनलाइन पंजीयन कराने से पहले अपने बैंक खाते व मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक करा लें। अब पंजीयन ओटीपी व भुगतान आधार लिंक खाते में ही भेजा जाएगा।
-राजेश कुमार, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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धान उत्पादन के लिए प्रदेश में जिले का प्रमुख स्थान है। यहां किसान बड़े पैमाने पर धान का उत्पादन व बिक्री करते हैं। जिले में लगभग साढ़े 4 लाख किसान हैं और वह 1 लाख 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती करते हैं। शासन की ओर से एक नवंबर से धान की खरीद की तिथि घोषित कर दी गई है। अधिकाधिक किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री कर सकें, इसके लिए बीती 16 अगस्त से जिले में ऑनलाइन पंजीयन भी शुरू कर दी गई थी। हालांकि इस बीच शासन ने धान खरीद नीति को और पारदर्शी बनाने के लिए पंजीयन प्रक्रिया में संशोधन कर दिया।
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ऐसे में अब किसानों को जरूरत है कि वह अविलंब अपने बैंक खाते व मोबाइल नंबर को आधार नंबर से लिंक करा लें। कारण यह कि अब धान बिक्री के लिए पंजीयन कराते समय आने वाली ओटीपी उसी मोबाइल नंबर पर जाएगी, जो नंबर आधार कार्ड में लिंक होगा। इतना ही नहीं आवेदन के दौरान किसान को किसी प्रकार का बैंक डिटेल देने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि भुगतान आधार से लिंक बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि किसान अपने बैंक खाते को अनिवार्य रूप से आधारकार्ड से लिंक कराएं।
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शासन का मानना है कि इस प्रक्रिया के शुरू होने से धान खरीद में काफी हद तक पारदर्शिता आएगी। कई बार बिचौलिए किसानों की खतौनी का प्रयोग करके धान व गेहूं की बिक्री सरकारी क्रय केंद्रों पर कर लेते थे और किसानों को इसकी भनक भी नही लग पाती थी। कारण यह कि ऑनलाइन के समय खतौनी किसानों का लगाया जाता था और बैंक खाता व अन्य विवरण बिचौलिसे अपना लगा देते थे। बिचौलियों की इस मनमानी को रोकने के लिए शासन ने अब नई पहल शुरू की है। किसान संतराम वर्मा व अंगद जायसवाल का भी मानना है कि शासन की इस नई क्रय नीति से बिचौलियों की मनमानी सरकारी क्रय केन्द्रों पर काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे अधिकाधिक किसान अपनी उपज बेच सकेंगे।
किसानों को किया जा रहा जागरूक
शासन की नई क्रय नीति के बारे में किसानों को लगातार जागरूक किया रहा है। किसान ऑनलाइन पंजीयन कराने से पहले अपने बैंक खाते व मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक करा लें। अब पंजीयन ओटीपी व भुगतान आधार लिंक खाते में ही भेजा जाएगा।
-राजेश कुमार, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी