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3900 तालाब सूखे

Sat, 09 Apr 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Sat, 09 Apr 2016 11:23 PM IST
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3900 Ponds are Dried
टांडा तहसील अंतर्गत केदारनगर में सूखा पड़ा तालाब। - फोटो : अमर उजाला

तेजी से बढ़ती गर्मी के बीच लाखों रुपये खर्च कर जिले में बने आदर्श तालाबों की पोल खुलने लगी है। कुल 3900 तालाबों में से ज्यादातर में पानी नहीं है। पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने व जलस्तर में आ रही गिरावट को रोकने के उद्देश्य से बनाए गए आदर्श तालाबों की हलक खुद ही सूखी दिखती है।

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इक्का-दुक्का को छोड़ दिया जाए तो शेष में पानी की जगह धूल उड़ रही है। तालाब के किनारे बनी सीमेंटेड सीट आदि का भी कहीं पता नहीं चलता। ऐसे में सरकार की यह अत्यंत महत्वपूूूर्ण योजना जिले में पूरी तरह धराशायी दिखती है।
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 आदर्श जलाशय योजना के तहत जिले में अब तक 3900 से अधिक तालाब खुदे हैं। तालाबों के निकट पार्क जैसा अहसास कराने के लिए सीमेंटेड पोल पर कटीले तारों से बैरीकेडिंग कर गेट आदि लगाए गए थे। तालाब के किनारे सीमेंटेड सीट आदि का भी निर्माण कराया गया।
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प्रत्येक तालाब पर लाखों रुपये तो इस योजना के तहत खर्च कर दिए गए लेकिन इसे सुरक्षित रख पाने में विभाग पूरी तरह नाकाम साबित रहा है। मौजूदा समय में आदर्श तालाबों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने व गिरते भूजलस्तर पर अंकुश पाने के मुख्य उद्देश्य से बने ये तालाब खुद  ही प्यासे हैं।

हाल यह है कि तीन चौथाई से अधिक तालाबों में पानी ही नहीं है। पानी भरवाने आदि की कोई व्यवस्था भी विभाग व प्रशासन की तरफ से नहीं दिखती। कई तालाब तो अपने अस्तित्व को लेकर खतरे में हैं। अकबरपुर विकास खंड के बरधा भिउरा में लाखों रुपये खर्च कर बना तालाब इन दिनों सूखे की चपेट में है।

यह बात अलग है कि इसका निर्माण पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए हुआ था। सोनगांव, कटरिया सम्मनपुर, रामपुर सकरवारी समेत ज्यादातर गांवों में बने तालाब उद्देश्य से कोसों दूर हैं।

यही हाल कटेहरी, भीटी, टांडा, रामनगर, जलालपुर, भियांव व बसखारी आदि विकास खंडों में बने आदर्श तालाबों का भी है। कटेहरी के शैलेंद्र प्रताप सिंह व जहांगीरगंज के मनीष पांडेय कहते हैं कि सरकार की योजना तो बहुत अच्छी थी लेकिन उपेक्षा के चलते यह पूरी तरह धराशायी है।


कहा कि अभी तो गर्मी शुरू हुई है, यदि प्रशासन ने तालाबों में पानी नहीं सुनिश्चित कराया तो विकट समस्या होगी। जंगली जानवरों व मवेशियों समेत पशु-पक्षियों के जीवन पर ही खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

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