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मोदी के बाद योगी को हटाने के लिए भी चलेगा गठबंधन
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अंबेडकरनगर। भाजपा किसी गलतफहमी में न रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद यूपी में योगी को हटाने के लिए भी गठबंधन जारी रहेगा। केंद्र के बाद यह गठबंधन ही यूपी से ऐसे लोगों को सत्ता से हटाएगा जो झूठे वादे करते हैं, और जनता को गुमराह रहते हैं। अकबरपुर नगर के निकट शिवबाबा में खचाखच भरे विशालकाय मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा प्रमुख मायावती ने यह दावा किया।
गठबंधन की तरफ से अंबेडकरनगर संसदीय सीट के प्रत्याशी रितेश पाण्डेय को बड़े बहुमत के अंतर से जीत दर्ज कराने का आह्वान करते हुए कहा कि लोगों को भाजपा व कांग्रेस से सावधान रहने की जरूरत है।
मायावती ने बीते दिनों मयाबाजार में प्रधानमंत्री की सभा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वहां कहा गया कि बाबा साहब आंबेडकर के रास्ते पर बसपा नहीं चल रही। उन्हें शायद पता नहीं कि अंबेडकरनगर जिले का गठन और उसका नामकरण बाबा साहब के नाम पर करने का काम बसपा ने ही किया था।
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सत्ता में रहने के दौरान हमने बाबा साहब के नाम पर शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्र के कमजोर वर्ग के लोगों को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाया था। जिले की जनता यह भूली नही है। जिले का अभूतपूर्व विकास सिर्फ बसपा की ही देन है। प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें डॉ. आंबेडकर व जयभीम के नाम पर अंदर से चिढ़ है। उन्हें यह दिक्कत है कि आखिर बसपा डॉ. अंबेडकर के मूवमेंट को सफलता के साथ आगे क्यों बढ़ा रही है। इसे रोकने के लिए ही समय समय पर तमाम अफवाहें उड़ाई जाती हैं, लेकिन उन्हें यह पता होना चाहिए कि बहुजन समाज के साथ ही सर्व समाज के लोग काफी जागरूक हो चुके हैं।
भाजपा को यह अच्छे से समझ लेना चाहिए कि फूट डालने व गुमराह करने की राजनीति सफल होने वाली नहीं है। केंद्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हटने के बाद यूपी से योगी सरकार को हटाने के लिए भी सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मिलकर गठबंधन पूरी मजबूूती से चलेगा।
यह गठबंधन ही केंद्र व प्रदेश से इन दोनों की विदाई तय कर आम लोगों को उनका हक व न्याय दिलाने का काम करेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुस्लिमों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार इनके हितों के विपरीत काम कर रही है। कहा कि नोटबंदी व जीएसटी जिस हड़बड़ी में लागू किया गया उसका खामियाजा अभी भी छोटे व मध्यम वर्ग के व्यापारी भुगत रहे हैं। ऐसे व्यापारी एकजुट होकर सरकार को सबक सिखाने का काम करेंगे। केंद्र की भाजपा सरकार पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक चौथाई वादे भी भी पूरे नहीं हुए।
यही काम कांग्रेस ने केंद्र व प्रदेश की सत्ता में रहने के दौरान किया, जिसका खामियाजा उसे सत्ता से बाहर होकर भुगतना पड़ा। अब बारी भाजपा की है, वह भी कांग्रेस की ही तरह आचरण कर रही है। जनता को गुमराह करने के लिए चौकीदार का नारा दिया जा रहा है, लेकिन यह इस बार चलने वाला नही है। ऐसा कौन चौकीदार होगा, जिसके रहते भ्रष्टाचार बढ़ा, बेरोजगारी बढ़ी, सीमाएं सुरक्षित नही हैं। रक्षा सौदों तक पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले गठबंधन के बसपा प्रत्याशी रितेश पाण्डेय ने पूर्व मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह सौंपा।
इस मौके पर बसपा नेता आकाश आनंद, सतीश चन्द्र मिश्र, राष्ट्रीय महासचिव रामअचल राजभर, पूर्वमंत्री लालजी वर्मा, पूर्व सांसद त्रिभुवनदत्त, पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय, पूर्वमंत्री राममूर्ति वर्मा, पूर्व मंत्री शंखलाल मांझी, सपा जिलाध्यक्ष व एमएलसी हीरालाल यादव, पूर्व विधायक अजीमुलहक पहलवान, पूर्व विधायक जयशंकर पाण्डेय एवं वरिष्ठ नेता सुभाष राय मौजूद रहे। मुख्य मंच से हटकर एक अलग से भी मंच बनाया गया था, जिसमें गठबंधन के नेताओं को प्रमुखता से महत्व दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री के आने से पहले सपा व बसपा के कई नेताओं ने सभा को संबोधित भी किया।
29 सितंबर 1995 को मुख्यमंत्री रहने के दौरान अंबेडकरनगर जनपद का गठन करने वाली मायावती ने रविवार की रैली में संकेत दिया कि उनके प्रधानमंत्री बनने का मौका आया तो वे अंबेडकरनगर से ही चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने खुलकर तो इसे क्लीयर नहीं किया लेकिन, कहा कि अगर सब ठीक रहा तो मुझे यहां से चुनाव लड़ना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली की राजनीति के लिए अंबेडकरनगर से होकर ही रास्ता जाएगा।
गौरतलब है कि मायावती अंबेडकरनगर संसदीय सीट के परिसीमन से पहले रहे अकबरपुर सुरक्षित संसदीय सीट से तीन बार सांसद चुनी जा चुकी हैं। अब एक बार फिर उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने की बात कहकर सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को यह साफ संकेत दिया है कि उन्हें इस सीट पर कब्जे के लिए पूरी ताकत लगा देनी है।
अंबेडकरनगर संसदीय सीट के परिसीमन के बाद 2009 में हुए चुनाव में बसपा के टिकट पर पूर्व विधायक राकेश पाण्डेय सांसद चुने गये थे। बसपा ने उन्हें दोबारा 2014 में टिकट दिया, लेकिन वे जीत नहीं सके। पार्टी ने अब उनके पुत्र व जलालपुर के बसपा विधायक रितेश पाण्डेय को मैदान में उतारा है।
रविवार को सभा को सम्बोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने रितेश की जमकर तारीफ की। उनकी शैक्षिक योग्यता, व्यवहार व विधायक के तौर पर कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने पिता से भी ज्यादा काबिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जब यह बोल रही थीं तो मंच पर ही मौजूद उनके पिता व पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय की आंख खुशी से छल छला उठीं। भावुक होकर उन्होंने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कार्यकर्ताओं को विधिवत चुनावी पाठ पढ़ाया। पहले तो सम्बोधन शुरू करने के साथ ही उन्होंने भारी भीड़ का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे पहले से ही पता था कि अन्य रैलियों की अपेक्षा अंबेडकरनगर में सबसे ज्यादा भीड़ जुटने वाली है।
महिलाओं की भारी तादाद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह जिले की महिलाओं का उनसे लगाव ही है कि इस कड़ी धूप में भी वे इतनी बड़ी तादाद में पहुंची हैं। इसी लगाव को उन्हें मतदान वाले दिन भी बनाए रखते हुए एक एक वोट बूथ तक पहुंचाना होगा। जीत का अंतर बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि इसकी जिम्मेदारी उन्हें संभालनी है। कहा कि प्रत्येक वोट का महत्व समझते हुए ही हमें काम करना होगा।
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गठबंधन की तरफ से अंबेडकरनगर संसदीय सीट के प्रत्याशी रितेश पाण्डेय को बड़े बहुमत के अंतर से जीत दर्ज कराने का आह्वान करते हुए कहा कि लोगों को भाजपा व कांग्रेस से सावधान रहने की जरूरत है।
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मायावती ने बीते दिनों मयाबाजार में प्रधानमंत्री की सभा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वहां कहा गया कि बाबा साहब आंबेडकर के रास्ते पर बसपा नहीं चल रही। उन्हें शायद पता नहीं कि अंबेडकरनगर जिले का गठन और उसका नामकरण बाबा साहब के नाम पर करने का काम बसपा ने ही किया था।
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सत्ता में रहने के दौरान हमने बाबा साहब के नाम पर शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्र के कमजोर वर्ग के लोगों को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाया था। जिले की जनता यह भूली नही है। जिले का अभूतपूर्व विकास सिर्फ बसपा की ही देन है। प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें डॉ. आंबेडकर व जयभीम के नाम पर अंदर से चिढ़ है। उन्हें यह दिक्कत है कि आखिर बसपा डॉ. अंबेडकर के मूवमेंट को सफलता के साथ आगे क्यों बढ़ा रही है। इसे रोकने के लिए ही समय समय पर तमाम अफवाहें उड़ाई जाती हैं, लेकिन उन्हें यह पता होना चाहिए कि बहुजन समाज के साथ ही सर्व समाज के लोग काफी जागरूक हो चुके हैं।
भाजपा को यह अच्छे से समझ लेना चाहिए कि फूट डालने व गुमराह करने की राजनीति सफल होने वाली नहीं है। केंद्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हटने के बाद यूपी से योगी सरकार को हटाने के लिए भी सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मिलकर गठबंधन पूरी मजबूूती से चलेगा।
यह गठबंधन ही केंद्र व प्रदेश से इन दोनों की विदाई तय कर आम लोगों को उनका हक व न्याय दिलाने का काम करेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुस्लिमों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार इनके हितों के विपरीत काम कर रही है। कहा कि नोटबंदी व जीएसटी जिस हड़बड़ी में लागू किया गया उसका खामियाजा अभी भी छोटे व मध्यम वर्ग के व्यापारी भुगत रहे हैं। ऐसे व्यापारी एकजुट होकर सरकार को सबक सिखाने का काम करेंगे। केंद्र की भाजपा सरकार पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक चौथाई वादे भी भी पूरे नहीं हुए।
यही काम कांग्रेस ने केंद्र व प्रदेश की सत्ता में रहने के दौरान किया, जिसका खामियाजा उसे सत्ता से बाहर होकर भुगतना पड़ा। अब बारी भाजपा की है, वह भी कांग्रेस की ही तरह आचरण कर रही है। जनता को गुमराह करने के लिए चौकीदार का नारा दिया जा रहा है, लेकिन यह इस बार चलने वाला नही है। ऐसा कौन चौकीदार होगा, जिसके रहते भ्रष्टाचार बढ़ा, बेरोजगारी बढ़ी, सीमाएं सुरक्षित नही हैं। रक्षा सौदों तक पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले गठबंधन के बसपा प्रत्याशी रितेश पाण्डेय ने पूर्व मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह सौंपा।
इस मौके पर बसपा नेता आकाश आनंद, सतीश चन्द्र मिश्र, राष्ट्रीय महासचिव रामअचल राजभर, पूर्वमंत्री लालजी वर्मा, पूर्व सांसद त्रिभुवनदत्त, पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय, पूर्वमंत्री राममूर्ति वर्मा, पूर्व मंत्री शंखलाल मांझी, सपा जिलाध्यक्ष व एमएलसी हीरालाल यादव, पूर्व विधायक अजीमुलहक पहलवान, पूर्व विधायक जयशंकर पाण्डेय एवं वरिष्ठ नेता सुभाष राय मौजूद रहे। मुख्य मंच से हटकर एक अलग से भी मंच बनाया गया था, जिसमें गठबंधन के नेताओं को प्रमुखता से महत्व दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री के आने से पहले सपा व बसपा के कई नेताओं ने सभा को संबोधित भी किया।
29 सितंबर 1995 को मुख्यमंत्री रहने के दौरान अंबेडकरनगर जनपद का गठन करने वाली मायावती ने रविवार की रैली में संकेत दिया कि उनके प्रधानमंत्री बनने का मौका आया तो वे अंबेडकरनगर से ही चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने खुलकर तो इसे क्लीयर नहीं किया लेकिन, कहा कि अगर सब ठीक रहा तो मुझे यहां से चुनाव लड़ना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली की राजनीति के लिए अंबेडकरनगर से होकर ही रास्ता जाएगा।
गौरतलब है कि मायावती अंबेडकरनगर संसदीय सीट के परिसीमन से पहले रहे अकबरपुर सुरक्षित संसदीय सीट से तीन बार सांसद चुनी जा चुकी हैं। अब एक बार फिर उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने की बात कहकर सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को यह साफ संकेत दिया है कि उन्हें इस सीट पर कब्जे के लिए पूरी ताकत लगा देनी है।
अंबेडकरनगर संसदीय सीट के परिसीमन के बाद 2009 में हुए चुनाव में बसपा के टिकट पर पूर्व विधायक राकेश पाण्डेय सांसद चुने गये थे। बसपा ने उन्हें दोबारा 2014 में टिकट दिया, लेकिन वे जीत नहीं सके। पार्टी ने अब उनके पुत्र व जलालपुर के बसपा विधायक रितेश पाण्डेय को मैदान में उतारा है।
रविवार को सभा को सम्बोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने रितेश की जमकर तारीफ की। उनकी शैक्षिक योग्यता, व्यवहार व विधायक के तौर पर कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने पिता से भी ज्यादा काबिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जब यह बोल रही थीं तो मंच पर ही मौजूद उनके पिता व पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय की आंख खुशी से छल छला उठीं। भावुक होकर उन्होंने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कार्यकर्ताओं को विधिवत चुनावी पाठ पढ़ाया। पहले तो सम्बोधन शुरू करने के साथ ही उन्होंने भारी भीड़ का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे पहले से ही पता था कि अन्य रैलियों की अपेक्षा अंबेडकरनगर में सबसे ज्यादा भीड़ जुटने वाली है।
महिलाओं की भारी तादाद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह जिले की महिलाओं का उनसे लगाव ही है कि इस कड़ी धूप में भी वे इतनी बड़ी तादाद में पहुंची हैं। इसी लगाव को उन्हें मतदान वाले दिन भी बनाए रखते हुए एक एक वोट बूथ तक पहुंचाना होगा। जीत का अंतर बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि इसकी जिम्मेदारी उन्हें संभालनी है। कहा कि प्रत्येक वोट का महत्व समझते हुए ही हमें काम करना होगा।