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नवंबर में बढ़ गए 253 कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे
Updated Mon, 03 Dec 2018 09:59 PM IST
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अंबेडकरनगर। तमाम अभियानों के बावजूद जिले में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है। अक्तूबर माह के सापेक्ष नवंबर माह में जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में 253 का इजाफा हो गया है।
गौरतलब है कि जिले को कुपोषण से मुक्त करने के लिए शासन द्वारा योजनाएं चलायी जा रही हैं। एक तरफ जहां गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन व अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाने की योजना है। वहीं नवजात शिशुओं के भी स्वास्थ्य का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार उन्हें आवश्यक उपचार का लाभ दिए जाने की व्यवस्था है।
प्रत्येक माह इन योजनाओं के नाम पर जिले में लाखों रुपये खर्च हो रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि वह घर घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करें और उन्हें आवश्यक सलाह दें।
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आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 2 लाख 58 हजार 443 है। अक्तूबर 2018 में हुए इन बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में पता चला कि 617 बच्चे अतिकुपोषित हैं तथा 2419 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं। नवंबर माह की स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट आयी तो इसमें कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ गई। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या अक्तूबर के सापेक्ष नवंबर माह में 30 बढ़ गई।
इससे अब अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 647 पर पहुंच गई है। वहीं कुपोषित बच्चों की संख्या में 223 का इजाफा हुआ है। ऐसे में अब जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 2642 हो गई है। यह हाल तब है जब पिछले दिनों शासन के निर्देश पर जिले के 43 जिला स्तरीय अधिकारियों ने 86 गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए गोद लिया था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार कुपोषण उन्मूलन के लिए प्रयास कर रही है। बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक लाभ भी दिया जा रहा है। नवंबर माह की रिपोर्ट पर समीक्षा की जा रही है। जल्द ही इसमें सुधार तय किया जाएगा। -डॉ. अशोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
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गौरतलब है कि जिले को कुपोषण से मुक्त करने के लिए शासन द्वारा योजनाएं चलायी जा रही हैं। एक तरफ जहां गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन व अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाने की योजना है। वहीं नवजात शिशुओं के भी स्वास्थ्य का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार उन्हें आवश्यक उपचार का लाभ दिए जाने की व्यवस्था है।
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प्रत्येक माह इन योजनाओं के नाम पर जिले में लाखों रुपये खर्च हो रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि वह घर घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करें और उन्हें आवश्यक सलाह दें।
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आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 2 लाख 58 हजार 443 है। अक्तूबर 2018 में हुए इन बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में पता चला कि 617 बच्चे अतिकुपोषित हैं तथा 2419 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं। नवंबर माह की स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट आयी तो इसमें कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ गई। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या अक्तूबर के सापेक्ष नवंबर माह में 30 बढ़ गई।
इससे अब अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 647 पर पहुंच गई है। वहीं कुपोषित बच्चों की संख्या में 223 का इजाफा हुआ है। ऐसे में अब जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 2642 हो गई है। यह हाल तब है जब पिछले दिनों शासन के निर्देश पर जिले के 43 जिला स्तरीय अधिकारियों ने 86 गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए गोद लिया था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार कुपोषण उन्मूलन के लिए प्रयास कर रही है। बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक लाभ भी दिया जा रहा है। नवंबर माह की रिपोर्ट पर समीक्षा की जा रही है। जल्द ही इसमें सुधार तय किया जाएगा। -डॉ. अशोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी