{"_id":"5c0413e4bdec2241cf75da42","slug":"1543771151711-ambedkar-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"11 निजी अस्पतालों के आवेदन निरस्त, मरीजों की बढ़ी मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
11 निजी अस्पतालों के आवेदन निरस्त, मरीजों की बढ़ी मुश्किल
Updated Sun, 02 Dec 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबेडकरनगर। मरीजों के निशुल्क इलाज के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना को लेकर मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि योजना के तहत इलाज के लिए 11 निजी चिकित्सालयों के आवेदन को निरस्त कर दिया गया है। टांडा व बसखारी सीएचसी का चयन तो योजना के तहत हो गया है, लेकिन जरूरी कोड न मिलने के चलते वहां मरीजों का उपचार होना संभव नहीं हो पा रहा। तीन सरकारी अस्पतालों को ही कुछ दिनों पहले तक संचालन की अनुमति थी, जबकि दो निजी चिकित्सालयों को भी जल्द ही संचालन की सशर्त अनुमति मिली है।
केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 30 अप्रैल को आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया था। इसमें तय हुआ था कि योजना के तहत चयनित मरीजों का पूर्ण उपचार नि:शुल्क सुनिश्चित किया जाएगा। बीते 23 सितंबर को जिले में योजना के तहत सबसे पहले जिला अस्पताल में इलाज का शुभारंभ सांसद हरिओम पांडेय ने किया। मरीजों को तेजी से इलाज का लाभ मिल सके, इसके लिए 14 निजी अस्पतालों ने भी आवेदन किया था। अलग-अलग क्षेत्र के इन अस्पतालों ने इस आधार पर आवेदन किया कि उनका चयन होने से संपूर्ण जिले के मरीजों को व्यर्थ की भागदौड़ के बगैर ही आसानी से इलाज उपलब्ध हो सकेगा। मरीजों ने भी ऐसी ही उम्मीद लगा रखी थी। इन उम्मीदों को अब इसलिए करारा झटका लगा है, क्योंकि जिन 14 अस्पतालों ने आवेदन किया था, उनमें से 11 अस्पतालों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
मौजूदा समय में जिला अस्पताल, राजकीय मेडिल कॉलेज व सीएचसी जलालपुर में ही मरीजों के इलाज की सुविधा इस योजना के तहत उपलब्ध है। दो अन्य राजकीय चिकित्सालयों सीएचसी टांडा व सीएचसी बसखारी को योजना के तहत इलाज की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन केंद्र द्वारा दिए जाने वाले कोड का इंतजार अभी बना हुआ है। इसके अभाव में यहां योजना का लाभ मरीज नहीं उठा पा रहे। दो निजी अस्पतालों रमा मेडिकल सेंटर राहुलनगर अकबरपुर तथा कनक हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर जौहरडीह अकबरपुर को गत दिवस ही सशर्त अनुमति मिली है। यहां कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं।
विज्ञापन
पर्याप्त अस्पतालों को मिले अनुमति
सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक ने कहा कि सभी तहसील क्षेत्र के कम से कम दो दो अस्पतालों को इस योजना के तहत जोड़ा जाए, भले ही वे सरकारी हों। ऐसा होने से मरीजों को अनावश्यक भाग दौड़ नही करनी पड़ेगी। वरिष्ठ व्यापारी वीरेंद्र सेठ ने कहा कि ऐसी योजनाएं तभी कारगर साबित होंगी, जब मरीजों को नजदीकी अस्पतालों में ही इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाए।
और बढ़ेंगे अस्पताल
फिलहाल तीन सरकारी व दो निजी अस्पतालों में इलाज की अनुमति है। 11 निजी अस्पतालों के आवेदन निरस्त किए गए हैं। एक निजी अस्पताल के आवेदन पर आवश्यक प्रक्रिया चल रही है। कोशिश है कि और अस्पतालों में योजना के तहत इलाज शुरू कराया जा सके। पात्रों को इसके लिए गोल्डेन कार्ड बनवाना होगा। इसके आधार पर देशभर में चयनित किसी भी अस्पताल में इलाज हो सकेगा। -आशुतोष सिंह, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत योजना
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 30 अप्रैल को आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया था। इसमें तय हुआ था कि योजना के तहत चयनित मरीजों का पूर्ण उपचार नि:शुल्क सुनिश्चित किया जाएगा। बीते 23 सितंबर को जिले में योजना के तहत सबसे पहले जिला अस्पताल में इलाज का शुभारंभ सांसद हरिओम पांडेय ने किया। मरीजों को तेजी से इलाज का लाभ मिल सके, इसके लिए 14 निजी अस्पतालों ने भी आवेदन किया था। अलग-अलग क्षेत्र के इन अस्पतालों ने इस आधार पर आवेदन किया कि उनका चयन होने से संपूर्ण जिले के मरीजों को व्यर्थ की भागदौड़ के बगैर ही आसानी से इलाज उपलब्ध हो सकेगा। मरीजों ने भी ऐसी ही उम्मीद लगा रखी थी। इन उम्मीदों को अब इसलिए करारा झटका लगा है, क्योंकि जिन 14 अस्पतालों ने आवेदन किया था, उनमें से 11 अस्पतालों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
विज्ञापन
मौजूदा समय में जिला अस्पताल, राजकीय मेडिल कॉलेज व सीएचसी जलालपुर में ही मरीजों के इलाज की सुविधा इस योजना के तहत उपलब्ध है। दो अन्य राजकीय चिकित्सालयों सीएचसी टांडा व सीएचसी बसखारी को योजना के तहत इलाज की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन केंद्र द्वारा दिए जाने वाले कोड का इंतजार अभी बना हुआ है। इसके अभाव में यहां योजना का लाभ मरीज नहीं उठा पा रहे। दो निजी अस्पतालों रमा मेडिकल सेंटर राहुलनगर अकबरपुर तथा कनक हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर जौहरडीह अकबरपुर को गत दिवस ही सशर्त अनुमति मिली है। यहां कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं।
विज्ञापन
पर्याप्त अस्पतालों को मिले अनुमति
सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक ने कहा कि सभी तहसील क्षेत्र के कम से कम दो दो अस्पतालों को इस योजना के तहत जोड़ा जाए, भले ही वे सरकारी हों। ऐसा होने से मरीजों को अनावश्यक भाग दौड़ नही करनी पड़ेगी। वरिष्ठ व्यापारी वीरेंद्र सेठ ने कहा कि ऐसी योजनाएं तभी कारगर साबित होंगी, जब मरीजों को नजदीकी अस्पतालों में ही इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाए।
और बढ़ेंगे अस्पताल
फिलहाल तीन सरकारी व दो निजी अस्पतालों में इलाज की अनुमति है। 11 निजी अस्पतालों के आवेदन निरस्त किए गए हैं। एक निजी अस्पताल के आवेदन पर आवश्यक प्रक्रिया चल रही है। कोशिश है कि और अस्पतालों में योजना के तहत इलाज शुरू कराया जा सके। पात्रों को इसके लिए गोल्डेन कार्ड बनवाना होगा। इसके आधार पर देशभर में चयनित किसी भी अस्पताल में इलाज हो सकेगा। -आशुतोष सिंह, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत योजना